अवमानना मामले में विधानसभा पहुंचे कुणाल कामरा के तेवर सख्त, बोले- ‘हमले का डर नहीं, मुंबई में फिर करूंगा शो’
कॉमेडियन कुणाल कामरा एकनाथ शिंदे पर विवादित टिप्पणी के मामले में विधानसभा में विशेषाधिकार हनन समिति के समक्ष पेश हुए. यह प्रस्ताव शिंदे का मजाक उड़ाने वाले गाने को लेकर दायर किया गया था.
कॉमेडियन कुणाल कामरा मंगलवार को विधानसभा पहुंचे. उन्होंने एकनाथ शिंदे द्वारा शिवसेना से अलग होने को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. इसके बाद उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Breach of Privilege Motion) दायर किया गया था. साथ ही विधानसभा समिति की ओर से नोटिस जारी किया गया था. इसी संबंध में पेश होने के लिए वो विधानसभा पहुंचे, जहां मानवाधिकार उल्लंघन समिति के समक्ष सुनवाई होनी थी लेकिन किसी वजह से सुनवाई नहीं हो सकी. अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी.
दरअसल, कॉमेडियन कुणाल कामरा ने 23 मार्च 2025 को अपने शो में एकनाथ शिंदे का मजाक उड़ाते हुए एक गाना जारी किया था. इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने खार स्थित हैबिटेट स्टूडियो में तोड़फोड़ की. फिर बीजेपी विधायक प्रवीण दारेकर ने कुणाल कामरा के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन का प्रस्ताव दायर किया.
बुलाए जाने पर मैं फिर आऊंगा
कुणाल कामरा ने कहा, मैं संविधान का सम्मान करने वाला इंसान हूं. पता नहीं क्यों आज सुनवाई नहीं हुई. बुलाए जाने पर मैं फिर आऊंगा. अनौपचारिक रूप से तारीख 10 मार्च बताई गई है. मैं तब आऊंगा. शिवसेना कार्यकर्ताओं ने इस मामले में तोड़फोड़ की थी, जिसके बाद क्या अब सुरक्षित महसूस करते हैं? इस पर कुणाल ने कहा, मुझे किसी भी हमले का डर नहीं है.
जनता को आपकी बातें पसंद आती हैं, लेकिन नेताओं को क्यों नहीं? इस सवाल पर कुणाल ने कहा, मैं नेताओं की पसंद की बातें क्यों कहूं? इसके लिए तो दूसरे लोग हैं. जब उनसे सवाल किया गया- क्या आप मुंबई में दोबारा कॉमेडी शो आयोजित करेंगे? इस पर कुणाल ने कहा, जरूर करूंगा.
यह केवल मेरी अभिव्यक्ति है
पहले जारी किए गए उल्लंघन नोटिस का जवाब देते हुए कुणाल ने कहा था, कोई भी व्यक्ति हो, चाहे वह सरकार में हो या न हो, उसकी इस तरह की व्यंग्यात्मक व्यक्तिगत आलोचना करना विधानमंडल के कामकाज में बाधा नहीं है. मैंने अपने गीत के माध्यम से विधानमंडल के कामकाज में किसी भी तरह से हस्तक्षेप नहीं किया है. यह केवल आलोचना, व्यंग्य और कला के माध्यम से मेरी अभिव्यक्ति है. अगर मैंने इस गीत से मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री का अपमान किया है तो मेरा इरादा सदन का अपमान करना या उसके सदस्यों को उकसाना नहीं था.