इतिहास: जब बिल क्लिंटन ने मुशर्रफ के साथ फोटो खिंचवाने से कर दिया था साफ इनकार
इस्लामाबाद में जारी शांति वार्ता के बीच जानें साल 2000 का वो किस्सा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाक सैन्य तानाशाह मुशर्रफ के साथ फोटो तक नहीं खिंचवाई थी।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद आज पूरी दुनिया की सुर्खियों में बनी हुई है. यहां ऐसे तनाव को खत्म करने के लिए वार्ता हो रही है, जो दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की तरफ धकेल सकता है. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब अमेरिकी डेलिगेशन किसी शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान आया हो. चीन, अफगानिस्तान और कश्मीर जैसे मुद्दों पर भी अमेरिका पाकिस्तान का रुख करता रहा है. आज पाकिस्तान ईरान-अमेरिकी वार्ता की बड़े गर्व से मेजबानी कर रहा है. इतिहास में एक दौरा ऐसा भी रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान तो आए, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ फोटो नहीं कराई.
1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हटाए जाने के तुरंत बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन 2000 में पाकिस्तान आए. ये 30 साल में देश का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे. हालांकि, उनकी ये यात्रा महज पांच घंटे की ही थी और इस यात्रा से पहले वह भारत में थे, जहां उन्होंने 5 दिन बिताए. कारगिल युद्ध के बाद और परमाणु परिक्षण के बाद हुए इस दौरे के दौरान क्लिंटन ने भारत और पाकिस्तान को दुनिया का सबसे खतरनाक क्षेत्र बताया था, क्योंकि दोनों देश परमाणु शक्ति बन चुके थे और बड़े युद्ध की कगार पर खड़े थे.
परवेज मुशर्रफ के साथ फोटो नहीं खिंचवाई
पाकिस्तान में हुए सैन्य तख्तापलट का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा था. इस वजह पर जोर देते हुए पाकिस्तान पूर्व वित्त मंत्री शौकत अजीज ने अपनी किताब में लिखा है, अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ से हाथ मिलाते हुए फोटो खिंचवाने से मना कर दिया था, “वे नहीं चाहते थे कि उन्हें मुशर्रफ के तख्तापलट का समर्थन करते हुए देखा जाए”.
डॉन के पूर्व एडिटर अब्बास नासिर ने एक ऑप-एड में लिखा था, “किसे याद नहीं है कि राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अक्टूबर 1999 में सैन्य कब्जे के बाद 2000 के वसंत में पाकिस्तान आए थे और उन्हें सैन्य शासक जनरल मुशर्रफ से सार्वजनिक रूप से हाथ मिलाते या उनके साथ फोटो खिंचवाते नहीं देखा गया था?” और फिर क्लिंटन ने सभी डिप्लोमैटिक नियमों को दरकिनार करते हुए और कई लोगों को हैरान करते हुए, एक टेलीविज़न भाषाण में पाकिस्तानी राष्ट्र को संबोधित किया. उन्होंने कुछ विषयों पर बात की, जिसमें अमेरिका-पाकिस्तान संबंध भी शामिल थे और कश्मीर मुद्दा भी था.
कश्मीर मुद्दे पर दखल देने से किया था इंकार
सन 2000 के करीब कारिगल युद्ध के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर मुद्धे पर तनाव पीक पर था. पाकिस्तान चाहता था कि कश्मीर मुद्दा UN में उठाया जाए और यूरोपीय देश तथा अमेरिका इसमें दखल दे. लेकिन इस दौरे के दौरान बिल क्लिंटन साफ किया कि अमेरिका कश्मीर मामले में दखल नहीं देगा. साथ ही कहा कि भारत और पाकिस्तान को बातचीत के जरिए कश्मीर का मुद्दा हल करना चाहिए.