कानपुर: गैस किल्लत से ‘बदनाम कुल्फी’ का चक्का जाम, 10 दिनों से तरस रहे लोग

कानपुर की मशहूर 'बदनाम कुल्फी' पर लगा ब्रेक! कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से 10 दिनों से बंद है उत्पादन। ठग्गू के लड्डू के आउटलेट्स से मायूस लौट रहे हैं हजारों शौकीन।

कानपुर को हमेशा से औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है. एक समय कानपुर को ‘ईस्ट का मैनचेस्टर’ भी कहा जाता था. समय के साथ सब बदलता गया, लेकिन इस शहर के इतिहास में कई नए सितारे भी जुड़ते गए. इसी में से एक नाम है ‘ठग्गू के लड्डू’ और ‘बदनाम कुल्फी’… गर्मियों में लोगों को राहत देने वाली बदनाम कुल्फी आजकल गायब है. इसका बड़ा कारण है गैस सिलेंडर. कॉमर्शियल LPG सिलेंडर न मिलने की वजह से पिछले करीब 10 दिन से बदनाम कुल्फी नहीं बन पा रही, जिससे हजारों कुल्फी प्रेमी निराश हैं.

‘ठग्गू के लड्डू’ के संस्थापक ने ‘बदनाम कुल्फी’ की शुरुआत की थी. इस नाम के पीछे का कारण इसका स्वाद था. बदनाम कुल्फी स्वाद में इतनी अच्छी थी कि इसकी ख्याति दूर-दूर तक पहुंच गई. एक तरह से यह अच्छे स्वाद के लिए बदनाम हो गई. इस बार गर्मी की शुरुआत में यह बदनाम कुल्फी लोगों के घरों तक नहीं पहुंच पा रही. इसका सबसे बड़ा कारण है सिलेंडर.

10 दिनों से नहीं बन रही बदनाम कुल्फी

नवाबगंज आउटलेट पर बैठने वाले संदीप बताते हैं कि कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने की वजह से पिछले तकरीबन 10 दिनों से कुल्फी नहीं बन पा रही है. शहर में मौजूद सभी सात आउटलेट कुल्फी से महरूम हैं. उन्होंने बताया कि चूंकि कुल्फी को बनाने में गैस काफी ज्यादा खर्च होती है, इसलिए उसका प्रोडक्शन बंद करना पड़ा.

मायूस होकर आउटलेट से लौट रहे लोग

संदीप के अनुसार, ‘बदनाम कुल्फी’ नहीं बन पाने से प्रतिदिन बड़ा नुकसान हो रहा. स्टाफ को बैठने के पैसे देने पड़ रहे हैं. कुल्फी की सेल जीरो हो चुकी है. बदनाम कुल्फी के इतने प्रेमी हैं कि प्रतिदिन हजारों लोग मायूस होकर वापस लौट जाते हैं. VIP रोड निवासी CA प्रशांत जौहरी बताते हैं कि उनके घर में गर्मियों के दिनों में हर तीसरे दिन बदनाम कुल्फी आती थी, लेकिन इस बार आउटलेट पर नहीं मिल रही.

क्या बोले कानपुर DSO?

प्रशांत जौहरी ने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण सिलेंडर न मिल पाना है. कुल्फी बन नहीं पा रही है. हमारे घर वाले भी कुल्फी का स्वाद न ले पाने की वजह से काफी मायूस हैं. आर्यनगर निवासी केशव बताते हैं कि बदनाम कुल्फी नहीं मिलने से जीवन में कुछ अधूरा-अधूरा सा लगता हैं. शहर के DSO राकेश कुमार का कहना है कि फिलहाल कॉमर्शियल से ज्यादा फोकस घरेलू सिलेंडर पर है, जिससे आम जनता के किचन में कोई परेशानी न हो.

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