खाटूश्यामजी में बवाल: SHO ने युवक को कॉलर से खींचा, जमीन पर पटका; फाल्गुनी मेले से पहले शर्मनाक वीडियो वायरल।
सीकर के खाटूश्यामजी में फाल्गुनी मेले की तैयारियों के दौरान लोहे के गेट लगाने को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों में झड़प हो गई. SHO पवन चौबे पर एक युवक को सड़क पर पटककर मारपीट करने का आरोप लगा है, जिसका वीडियो वायरल हुआ है.
विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में 21 फरवरी से शुरू होने वाले वार्षिक फाल्गुनी लक्खी मेले की तैयारियां विवादों में घिर गई हैं. कस्बे के मोदी चौक पर भीड़ नियंत्रण के लिए लगाए जा रहे लोहे के गेट को लेकर स्थानीय निवासियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई. इस दौरान खाटू श्याम कोतवाली थानाधिकारी (SHO) पवन चौबे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे एक युवक के साथ अभद्रता और मारपीट करते नजर आए.
बताया जा रहा है कि आगामी लक्खी मेले में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन कस्बे में विभिन्न स्थानों पर लोहे के भारी-भरकम गेट लगवा रहा है. जब टीम मोदी चौक मार्ग पर गेट लगाने पहुंची, तो स्थानीय निवासियों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया. ग्रामीणों का आरोप है कि इन गेटों के कारण कस्बे को एक तरह से ‘जेल’ में तब्दील किया जा रहा है, जिससे उनकी रोजमर्रा की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो जाएगी.
SHO की कार्यशैली पर उठे सवाल
हंगामे की सूचना मिलने पर SHO पवन चौबे जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि विवाद के दौरान SHO का पारा चढ़ गया. आरोप है कि उन्होंने गालियां देते हुए एक स्थानीय युवक की कॉलर पकड़ी और उसे सड़क पर पटक दिया. इस घटना के बाद कस्बे के लोग भड़क गए और पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए.
‘सुरक्षा के नाम पर हमें कैद क्यों?’
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे मेले के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर स्थानीय लोगों की स्वतंत्रता छीनना गलत है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि थानाधिकारी ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और शांतिपूर्ण विरोध कर रहे लोगों के साथ मारपीट की. ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय बल प्रयोग कर रहा है.
प्रशासन की दलील
दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि 21 से 28 फरवरी तक चलने वाले फाल्गुनी मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. किसी भी अप्रिय घटना या भगदड़ को रोकने के लिए भीड़ का दबाव कम करना जरूरी है, जिसके लिए मोदी चौक जैसे संवेदनशील रास्तों पर बैरिकेडिंग और गेट लगाना अनिवार्य सुरक्षा कदम है.
फिलहाल प्रशासन और ग्रामीणों के बीच खींचतान जारी है. पुलिस के खिलाफ स्थानीय लोगों की नाराजगी को देखते हुए इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है. अब देखना यह है कि प्रशासन स्थानीय लोगों की सुविधा और सुरक्षा इंतजामों के बीच कैसे तालमेल बिठाता है.