गाजर की खेती ने फिरोजपुर झिरका के किसानों की आमदनी बढ़ाई, सरकार का सहयोग जारी

फिरोजपुर झिरका में गाजर खेती से किसान लाखों कमा रहे हैं.

नूंह: जिले के फिरोजपुर झिरका उपमंडल में गाजर की खेती किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है. जिला बागवानी अधिकारी अब्दुल रज्जाक ने दोहा, रावली, अगोन, सटकपुरी, पथराली और भाकडोजी सहित अन्य गांवों का दौरा कर फसल का निरीक्षण किया.

मिल रही सरकारी मदद और तकनीकी सुविधा: इस दौरान जिला बागवानी अधिकारी अब्दुल रज्जाक ने बताया कि, “इन गांवों में लगभग 500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में गाजर की उन्नत खेती हो रही है. यह क्षेत्र अपनी बड़ी और गहरे लाल रंग की गाजर के लिए जाना जाता है, जिसकी लंबाई आधा फीट से 1 फीट तक होती है. गाजर की फसल धोने वाली मशीन पर विभाग की ओर से 70,000 रुपये तक की अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है. यह मशीन 10-12 क्विंटल गाजर को केवल आधे घंटे में धोकर तैयार कर देती है, जिससे किसानों की सुविधा बढ़ती है. इसके अलावा गाजर की खेती करने वाले किसान भावांतर भरपाई योजना का लाभ भी ले सकते हैं. इस योजना के तहत गाजर का संरक्षित रेट 7 रुपये प्रति किलो निर्धारित है.”

अलग-अलग राज्यों की मंडियों में होती है सप्लाई: किसानों की मानें तो वे अपनी गाजर मुख्य रूप से दिल्ली, मथुरा और फरीदाबाद की मंडियों में भेजते हैं. वर्तमान बाजार में गाजर का रेट 10-12 रुपये प्रति किलो है. एक एकड़ में औसतन 180-200 क्विंटल उपज हो रही है, जिससे किसान लगभग 2 लाख से 2.15 लाख रुपये प्रति एकड़ कमा रहे हैं. इस बारे में किसान साबिर ने बताया कि, “हमारे लिए गाजर की खेती बेहद लाभकारी साबित हो रही है. खर्च लगभग 25,000-30,000 रुपये आता है, लेकिन आय उससे कई गुना अधिक है.”

बागवानी विभाग की योजनाओं से बढ़ रहा उत्साह: वहीं, अन्य किसान अमीर ने कहा कि, “सरकारी सब्सिडी और अनुदान से हमारी खेती आसान हो गई है. हम 5 एकड़ तक की गाजर की खेती पर अनुदान प्राप्त कर सकते हैं.”

बता दें कि बागवानी विभाग की ये योजनाएं न केवल किसानों को बागवानी की ओर प्रोत्साहित कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं.

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