बहल: देखरेख के अभाव में खंडहर बने सरकारी वृद्धाश्रम, आवारा पशुओं का बसेरा और ढहती छतें

लोहारू के बहल कस्बे में इनेलो शासन के दौरान बने वृद्धाश्रम अब बदहाली के आंसू रो रहे हैं। दीवारों का प्लास्टर झड़ा और छतों से गिरते सरिए बुजुर्गों के लिए खतरा बन गए हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

बहल। कस्बे के सरकारी अस्पताल के सामने व ढाणी बहल के वार्ड नंबर एक में इनेलो शासन में बुजुर्ग लोगों के सहायतार्थ बनाए गए वृद्धाश्रम उचित देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गए हैं। इन वृद्धाश्रमों के कमरों की छतें पूरी तरह से खराब हो चुकी है और दीवारों का प्लास्टर झड़ चुका है। इसके अलावा इनकी सुरक्षा के लिए बनाई गई चहारदीवारी भी ढह चुकी है और अधिकतर समय इनमें आवारा पशुओं का जमावड़ा बना रहता है।

सरकार व प्रशासन ने इन वृद्धाश्रमों के निर्माण के बाद कभी इनके रखरखाव की जहमत नहीं उठाई। लिहाजा, इनकी हालत दिन प्रतिदिन खराब होती गई। अब हालत यह है कि इन वृद्ध आश्रमों में बने कमरों में बैठना तो दूर की बात है, इनके गेट खोलकर इनके अंदर झांकने से भी डर लगता है। ढाणी बहल के वार्ड नंबर एक में बने वृद्धाश्रम में दो कमरे व एक किचन बनी है। कमरों की छतें पूरी तरह से खराब हो चुकी है। छत में डाले गए लेंटर के सरिए जंग खाकर फूल चुके हैं। छत में नमी आने से प्लास्टर झड़ चुका है। ऐसा लगता है कि छत कभी भी भरभरा कर गिर सकती है। पूरे परिसर में झाड़ झखाड़ उगे है जिससे इन वृद्धाश्रमों में पैर रखने से भी डर लगता है।

वृद्ध आश्रमों की सुरक्षा के लिए बनी चाहर दीवारी भी ढह चुकी है। झाडि़यां उगने से इनमें आने-जाने के रास्ते की पहचान गायब हो चुकी है। कमोबेश यही स्थिति बहल में सरकारी अस्पताल के सामने बने वृद्धाश्रम की है। इसमें भी दीवारों की मरम्मत नहीं होने के कारण खराब हो चुकी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन वृद्ध आश्रमों की सुध ली जाए और इनको व्यवस्थित कर बुजुर्गों के लिए आरामगाह स्थल बनाया जाए, ताकि वो जिंदगी के अंतिम पड़ाव में अपना समय सही से व्यतीत कर सकें।

इनेलो सरकार ने बुजुर्गों की सहायता के लिए इन वृद्धाश्रमों का निर्माण किया था। बहल कस्बे व बहल ढाणी के वृद्धाश्रमों का वर्ष 2003 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री व लोहारू के विधायक रहे चौ. बहादुर सिंह ने लोकार्पण किया था। उस समय इन वृद्धाश्रमों में जहां कमरों में पलंग, कुर्सी जैसी सुविधाएं प्राप्त थी, वहीं उनके लिए खाट, ताश की पत्ती, अखबार जैसी सुविधाएं मिली थी। शुरुआती दिनों में बुजुर्ग इन वृद्धाश्रमों में अपना समय व्यतीत करने के लिए आते भी थे।

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