हरियाणा में दादी के जख्म से सुलझा मर्डर केस, पोते की उंगली काटने का मामला सामने

हरियाणा के करनाल जिले के असंध की घटना है.

हरियाणा के करनाल जिले के असंध में हुए डबल मर्डर केस में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. बुजुर्ग दंपति हरि सिंह और उनकी पत्नी लीला की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड को दंपति के पोते ने अंजाम दिया था. वह पुलिस को गुमराह करता रहा. लेकिन, पोते रविंद्र की उंगली पर बंधी पट्टी से शक गहराया और पुलिस ने इस पूरे केस को सुलझा लिया.

दंपति की हत्या के बाद रविंद्र की उंगली पर ताजा चोट देखी गई. जब पुलिस ने उससे इस बारे में पूछा तो उसने कहा कि लकड़ी काटते समय उसे चोट लग गई थी. लेकिन जिस जगह उसने हादसे की बात बताई, वहां पुलिस को कोई ऐसे निशान नहीं मिले. यहीं से पुलिस को उस पर शक हुआ. बाद में जांच में सामने आया कि यह चोट दरअसल उसकी दादी लीला ने उसे उस वक्त दी थी, जब वह उनका मुंह टेप से बंद कर रहा था. बचाव में दादी ने उसके हाथ पर काट लिया था और वही जख्म रविंद्र के खिलाफ सबसे मजबूत सबूत बन गया.

वारदात के बाद रविंद्र का व्यवहार बिल्कुल सामान्य

पुलिस के अनुसार, 11 जनवरी की रात हत्या के बाद भी रविंद्र का व्यवहार बिल्कुल सामान्य था. वह न तो घबराया और न ही परेशान दिखा. यहां तक कि वह मीडिया के सामने भी आया और इस वारदात को लूटपाट का मामला बताता रहा. लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि रविंद्र का अपने दादा से अक्सर झगड़ा होता रहता था.

दरअसल, रविंद्र के पिता बंसी पर करीब 15 लाख रुपये का कर्ज था, जिसे डेढ़ साल पहले दादा हरि सिंह ने चुका दिया था. अब दादा अपने पैसे वापस मांग रहे थे, लेकिन रविंद्र यह रकम लौटाना नहीं चाहता था. इसी लालच में उसने न सिर्फ पैसे से बचने, बल्कि दादा की संपत्ति और घर पर कब्जा जमाने की साजिश रच डाली.

इस साजिश में रविंद्र ने जयसिंहपुरा गांव के कबाड़ी प्रदीप कुमार को शामिल किया, जो पहले भी चोरी के मामलों में संलिप्त रहा था. प्रदीप ने अपने भतीजे गुलशन को भी साथ ले लिया. योजना के अनुसार, तीनों ने दादा की दुकान में रखे तांबे और अन्य कीमती सामान की चोरी का बहाना बनाया.

रविंद्र दीवार फांदकर दादा के घर में घुसा

11 जनवरी की रात करीब 12 बजे रविंद्र दीवार फांदकर दादा के घर में घुसा और मेन गेट खोल दिया. इसके बाद प्रदीप और गुलशन भी अंदर आ गए. तीनों ने दादा-दादी के हाथ-पैर बांधे. दादी शोर मचा रही थीं, इसलिए रविंद्र ने उनके मुंह पर टेप लगा दी. इसी दौरान उन्होंने रविंद्र को पहचानते हुए मदद के लिए पुकारा, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उनका अपना पोता ही उनका हत्यारा है. संघर्ष के दौरान दादी ने उसकी उंगली काट ली.

हत्या के बाद तीनों ने घर में सामान बिखेर दिया ताकि मामला लूट जैसा लगे और फिर फरार हो गए. अगले दिन वही जख्मी उंगली रविंद्र को सलाखों के पीछे ले गई.

रविंद्र भगवा वस्त्र पहनता था, पूजा-पाठ करता और लोगों को दवाइयां बांटकर उन्हें प्रभावित करता था. वह दादा के घर में मंदिर बनाना चाहता था और एक ही वारदात से तीन मकसद पूरे करना चाहता था—कर्ज से छुटकारा, संपत्ति पर कब्जा और मंदिर निर्माण. फिलहाल पुलिस ने रविंद्र, प्रदीप और गुलशन को दो दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.

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