हरियाणा PAC का कर्नाटक दौरा: स्पीकर यू.टी. खादर ने किया भव्य स्वागत
हरियाणा विधानसभा PAC का कर्नाटक दौरा। चेयरमैन चन्द्र शेखर धरणी का सम्मान। स्पीकर यू.टी. खादर के AI अटेंडेंस और पेपरलेस विधानसभा जैसे डिजिटल सुधारों का अध्ययन।
कर्नाटक: हरियाणा विधानसभा प्रैस एडवाइजरी कमेटी (पीएसी) का स्टडी टूर कर्नाटक पहुंचने पर गर्मजोशी और आत्मीयता के साथ स्वागत किया गया। कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर यू. टी. खादर ने अपने निवास पर हरियाणा से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक कर्नाटक रीति-रिवाज के अनुसार अभिनंदन किया तथा उनके सम्मान में रात्रि भोज का आयोजन भी किया। इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा प्रैस एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन चन्द्र शेखर धरणी का विशेष रूप से सम्मान किया गया। कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर ने उन्हें पारंपरिक सम्मान स्वरूप अभिनंदन कर दोनों राज्यों के लोकतांत्रिक और संसदीय संबंधों को और अधिक मजबूत करने का संदेश दिया।
यह स्टडी टूर केवल औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि विधानसभा कार्यप्रणाली, मीडिया समन्वय, संसदीय परंपराओं और जनसंचार तंत्र को समझने और साझा अनुभवों से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। हरियाणा विधानसभा की प्रैस एडवाइजरी कमेटी का यह दौरा मीडिया और विधायिका के बीच बेहतर संवाद, पारदर्शिता और कार्यकुशलता को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल में पीएसी चेयरमैन चन्द्र शेखर धरणी के साथ योगिंद्र शर्मा, दिनेश भारद्वाज, राकेश गुप्ता, अनुराग अग्रवाल, गीतांजलि, संजीव शर्मा, अनिल गाबा, आशीष वर्मा, थानेश्वर शर्मा, हरियाणा विधानसभा के अंडर सेक्रेटरी नवीन भारद्वाज तथा मीडिया से संबंधित दिनेश भी शामिल हैं।
कर्नाटक विधानसभा स्पीकर यू. टी. खादर फरीद द्वारा किया गया यह स्वागत कार्यक्रम सदस्यों के लिए यादगार रहा। आत्मीयता, सम्मान और पारंपरिक आतिथ्य से परिपूर्ण इस आयोजन ने दोनों राज्यों की संसदीय संस्थाओं के बीच सौहार्द, सहयोग और संवाद को नई मजबूती दी। पीएसी के इस अध्ययन दौरे से यह अपेक्षा की जा रही है कि हरियाणा विधानसभा की मीडिया और जनसंपर्क व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपयोगी अनुभव और सुझाव प्राप्त होंगे। कर्नाटक विधानसभा की कार्यशैली और व्यवस्थाओं का अध्ययन हरियाणा के लिए भी कई स्तरों पर लाभकारी साबित हो सकता है।
कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के रूप में यू. टी. खादर ने बताया कि उन्होंने अपनी भूमिका को केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे व्यवस्था, अनुशासन, तकनीक, प्रशिक्षण और जनसुलभता से जोड़ने की कोशिश की है। यही वजह है कि स्पीकर बनने के बाद उनकी पहचान केवल “कुर्सी संभालने वाले अध्यक्ष” की नहीं, बल्कि विधानसभा को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और सहभागितापूर्ण बनाने वाले अध्यक्ष के रूप में उभरी है। यू. टी. खादर ने बताया कि विधायकों के लिए विशेष प्रशिक्षण/वर्कशॉप की शुरुआत। 2025 में उन्होंने यह विचार आगे बढ़ाया और 2026 में पहली बार राज्य के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के लिए बजट की बारीकियों पर औपचारिक कार्यशाला आयोजित कराई।इस कार्यशाला का मकसद था कि विधायक केवल नारेबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि बजट पढ़ना, राजस्व, आवंटन, खर्च, उपयोग और सदन में प्रभावी बहस जैसी चीजों को भी समझें। इसे विधायी गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक संस्थागत पहल माना गया। राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि आमतौर पर विधानसभा में नए विधायकों को प्रक्रियात्मक ज्ञान की कमी रहती है। खादर ने इस कमी को प्रशिक्षण आधारित सुधार से भरने की कोशिश की। यह उनके कार्यकाल की एक ऐसी उपलब्धि मानी जा सकती है, जिसका असर केवल एक सत्र नहीं, बल्कि विधायी गुणवत्ता पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
यू. टी. खादर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक रही विधानसभा में तकनीक और डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। स्पीकर बनने के कुछ ही समय बाद यू. टी. खादर ने साफ संकेत दिया था कि वे विधानसभा की कार्यवाही को डिजिटल और पेपरलेस दिशा में ले जाना चाहते हैं। उन्होंने सदन की प्रक्रियाओं को अधिक तकनीकी बनाने, जनता के लिए मोबाइल ऐप जैसे विचारों और विधानसभा को अधिक आधुनिक संस्थान बनाने की बात रखी। इसी क्रम में 2024 के सत्र के दौरान पहली बार AI-आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू की गई। यह कदम प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रशासनिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इससे सदन की कार्यप्रणाली में डेटा-आधारित निगरानी और जवाबदेही का तत्व जुड़ा। उसी सत्र में विधानसभा की उपस्थिति और कार्यवाही के आंकड़े भी उल्लेखनीय रहे।
सदन की उत्पादकता और प्रक्रियात्मक प्रबंधन पर फोकस
यू. टी. खादर के कार्यकाल में कई मौकों पर यह बात सामने आई कि वे सदन को अधिक उत्पादक और व्यवस्थित रूप से चलाने पर जोर देते हैं। 2025 के एक सत्र के बाद उन्होंने बताया कि 39 में से 37 विधेयक बहस और सहमति के बाद पारित हुए, जिसे उन्होंने एक तरह का रिकॉर्ड बताया। यह बात इस ओर संकेत करती है कि वे केवल टकराव की राजनीति के बजाय प्रक्रियात्मक सहमति की दिशा में सदन को ले जाने की कोशिश करते रहे। हालांकि आलोचकों ने कभी-कभी सदन के दिनों की संख्या और विपक्ष के आरोपों को भी उठाया, लेकिन स्पीकर के तौर पर खादर का जोर अक्सर इस बात पर दिखा कि जो समय मिले, वह अधिक उपयोगी और सार्थक हो। कुछ रिपोर्टों में यह भी दर्ज हुआ कि सीमित सत्र दिनों के बावजूद कई बैठकों को देर रात तक चलाया गया और अधिक सदस्यों को बोलने का अवसर देने की कोशिश हुई।
सदन की सुरक्षा और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
स्पीकर बनने के बाद यू. टी. खादर ने विधानसभा और विधान सौधा परिसर की सुरक्षा को भी गंभीरता से लिया। 2023 में एक सुरक्षा चूक के बाद उन्होंने कहा कि अब विधानसभा परिसर में बेहतर सुरक्षा तंत्र और संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके बाद उन्होंने सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकों की बात भी सार्वजनिक रूप से रखी। 2025 और 2026 में भी उन्होंने विधान सौधा के बुनियादी ढांचे और प्रवेश व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया। 2026 में नए मुख्य प्रवेश द्वार और सोलर पैनल जैसी परियोजनाओं को लेकर उनकी भूमिका चर्चा में रही। इससे उनकी प्राथमिकता केवल सदन के भीतर की बहस तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विधान परिसर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की भी दिखाई देती है। विधानसभा को अधिक समावेशी और जनोन्मुख बनाने की कोशिशयू. टी. खादर की एक मानवीय और संस्थागत उपलब्धि वह पहल भी रही, जिसमें उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही देखने आए श्रवण-बाधित बच्चों के लिए अगले सत्र से विशेष शिक्षकों/साइन-लैंग्वेज सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की।
यू. टी. खादर ने अपने कार्यकाल में कई बार सार्वजनिक रूप से यह कहा कि विधायकों को गरिमापूर्ण आचरण रखना चाहिए और सदन की प्रतिष्ठा किसी भी दलगत आक्रामकता से ऊपर है। उन्होंने हंगामे, नफरत भरी भाषा और सार्वजनिक राजनीतिक टकराव को लेकर कई मौकों पर सख्त संदेश दिए। यू. टी. खादर की अध्यक्षीय शैली—जिसमें शांत स्वभाव, प्रक्रियात्मक नियंत्रण, समावेशी रवैया और सदन की गरिमा पर जोर दिखा—को सार्वजनिक मान्यता भी मिली। 2025 में बेंगलुरु विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया। विश्वविद्यालय ने इसे उनके लोकतांत्रिक मूल्यों, समावेशी दृष्टिकोण और सदन में अनुशासन बनाए रखने के प्रयासों से जोड़ा।
निष्कर्ष
उन्होंने विधायकों के प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, AI-आधारित व्यवस्था, सुरक्षा सुधार, समावेशी लोकतंत्र, सदन की गरिमा और संस्थागत आधुनिकीकरण जैसे मुद्दों पर ठोस पहल की। यही वजह है कि कर्नाटक की राजनीति में यू. टी. खादर का स्पीकर कार्यकाल केवल “कुर्सी संभालने” के लिए नहीं, बल्कि विधानसभा को ज्यादा आधुनिक, अधिक जिम्मेदार और ज्यादा जनोन्मुख बनाने की कोशिशों के लिए भी याद किया जा रहा है।