हिसार: कैंसर की मार और कर्ज का बोझ, अपनों को खोकर पाई-पाई को मोहताज परिवार

हिसार के चिड़ौद गांव में कैंसर तेजी से फैल रहा है, जिससे 15 ग्रामीण पीड़ित हैं और पिछले 10-15 सालों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उपचार के लिए परिवार कर्ज में डूब रहे हैं, जैसे सुरेंद्र ने पिता के इलाज के लिए 6 लाख का कर्ज लिया।

हिसार। हरियाणा के हिसार जिले के चिड़ौद गांव में कैंसर की बीमारी पांव पसार रही है। गांव के अंदर 15 के करीब ग्रामीण इस घातक बीमारी से जूझ रहे हैं। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग हैं। कैंसर होने पर गरीब परिवार के लोग कर्जा उठाकर अपने परिवार के सदस्य का उपचार करवा रहे हैं। लाखों रुपये लगाने के बाद भी मरीज की जान नहीं बचा पा रहे।

ऐसा ही दर्द लेकर गांव में सुरेंद्र और उसका परिवार जी रहा है। सुरेंद्र ने कैंसर बीमारी से ग्रस्त पिता ओमप्रकाश सैनी की जिंदगी बचाने के लिए दो रुपये सैंकड़ा की ब्याज पर छह लाख रुपये उठाए। आठ माह तक शहर के एक निजी अस्पताल में उपचार करवाते रहे, लेकिन ओम प्रकाश 10 सितंबर 2025 को जिंदगी की जंग हार गए।

अब उनका बेटा सुरेंद्र और अनिल ब्याज पर लिए रुपये लौटाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। गांव में रहने वाले कई परिवारों की कहानी ऐसी ही है। इन परिवारों ने अपने घर के सदस्यों को कैंसर बीमारी के कारण खोया तो है ही, कर्ज में भी डूब गए हैं। पीड़ित परिवार गांव के जलघर से सप्लाई होने वाले भूमिगत खारे पानी को कोस रहे हैं।

साथ ही सरकारी सिस्टम को भी इसका जिम्मेदार ठहरा रहे है। मंत्री से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के सामने बार-बार गुहार लगाने के बाद भी गांव में स्वच्छ पेयजल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। उनका दावा है कि स्वच्छ पेयजल की सप्लाई न होने के कारण ही गांव में कैंसर की बीमारी फैल रही हैं।

15 ग्रामीण कैंसर की चपेट में

अजमेर ने बताया कि चिड़ौंद में कैंसर तेजी से फैल रही है। पिछले दस से 15 सालों में 50 से अधिक लोगों की मौत कैंसर जैसी घातक बीमारी से हो चुकी हैं। इनमें अधिकतर बुजुर्ग हैं। जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है। गांव में अब भी 15 ग्रामीण कैंसर बीमारी से लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के राजेंद्र (65) और उनके छोटे भाई सतपाल (60) की मौत भी कैंसर के कारण हुई थी। करीब दस साल पहले दोनों की एक साल के अंतराल के दौरान ही मौत हुई। बीमारी चिंता का विषय बनी है।

भगवानी को गले का कैंसर

गांव में 70 साल की भगवानी देवी गले के कैंसर से पिछले सात-आठ सालों से जूझ रही है। उनका कहना है कि 15 साल पहले यहां आकर बसे थे। उस समय ग्रामीणों का कहना था कि यहां का पानी पीने के लायक नहीं है। यह पानी पीने से लोग कैंसर की से ग्रस्त हो रहे हैं। उसके बाद सप्लाई का पानी नहीं पिया। खेत में लगे ट्यूबवेल से पानी लेकर आते हैं। इसके बावजूद गले में कैंसर हो गया।

कैंसर से इन ग्रामीणों की हो चुकी मौत

ग्रामीणों ने बताया कि कैंसर जैसी घातक बीमारी से ओमप्रकाश सैनी, राजेंद्र श्योराण, सतपाल श्योराण, निहाल सिंह उनकी पत्नी, मदन सिंह, बृजलाल, महाबीर, राजा, विजय सिंह नंबरदार, गोलू, शांति देवी, मेदा, हवासिंह, रामकुमार, रमेश कुमार, जगदीश और कृष्ण की मौत हो चुकी है।

नहरी पानी में डालते हैं ड्रेन

का गंदा पानी ग्रामीणों ने बताया कि गांव के पास से गुजरने वाली नहर में 15 दिन पानी चलता है। उस नहर में ड्रेन का गंदा पानी डालते हैं। वह पानी पीने के लायक नहीं है।

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