49 लाख की बोली, फिर 2.22 लाख में बिका नोएडा का VIP नंबर! आखिर क्या था इसके पीछे का पूरा खेल?

गौतमबुद्ध नगर में वीआईपी वाहन नंबरों के नीलामी की चर्चा हो रही है.

गौतमबुद्ध नगर में वीआईपी और प्रीमियम वाहनों के नंबरों की ऑनलाइन नीलामी इस बार चर्चा का विषय बनी हुई है. हैरानी की बात यह है कि जिले का सबसे प्रीमियम माने जाने वाला वीआईपी नंबर जिस पर नीलामी के दौरान पिछली बार 49 लख रुपए तक की बोली लगी थी. अंत में वह अब 2.22 लाख रुपए में बेच दिया गया है. इससे सरकार को मिलने वाले राजस्व में कही ना कहीं भारी नुकसान देखने को मिला है, लेकिन आरटीओ विभाग इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है.

एआरटीओ विभाग हर साल वीआईपी नंबरों की नीलामी इस उद्देश्य से करता है कि सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिल सके. खासतौर पर 0001, 0007 और 0786 जैसे नंबरों पर आमतौर पर लाखों रुपए की बोली लगती है. इस बार भी नीलामी के दौरान एक प्रीमियम नंबर पर बोली 49 लख रुपए तक की पहुंच गई थी, जिससे यह उम्मीद की जा रही थी कि विभाग को रिकॉर्ड तोड़ राजस्व मिलेगा, लेकिन भुगतान के समय सबसे ऊंची बोली लगाने वाले व्यक्ति ने तय सीमा पर राशि नहीं जमा करा सका. इसके बाद पूरी प्रकिया ने नया मोड़ ले लिया.

नीलामी पर उठ रहे सवाल

विभाग के मुताबिक नीलामी के दौरान जो व्यक्ति सबसे ऊंची बोली लगता है और रकम तय सीमा पर जमा नहीं करता है तो वही नंबर दूसरी सबसे ऊंची बोली लगने वाले को दे दिया जाता है. वहीं इस मामले में आरोप है कि नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. अंत में वही प्रीमियम नंबर केवल 2.22 लाख रुपए में आवंटित कर दिया गया. अब इससे यह सवाल उठने लगा है कि जब 49 लाख तक की बोली पहुंच गई थी तो यह नंबर इतनी कम रकम में कैसे आवंटित कर दिया गया.

क्या कहता है परिवहन विभाग?

इस मामले में एआरटीओ प्रशासन के अधिकारी नंदकिशोर ने बताया इस व्यवस्था को सुधारने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा. कई बार देखा गया है कि लोग बोली के दौरान ऊंची बोली तो लगा देते हैं, लेकिन जब राशि जमा करने की बारी आती है तो वह लोग पीछे हट जाते हैं. इस मामले में ऐसे ही हुआ जो दूसरे व्यक्ति ने सबसे ज्यादा बोली लगाई थी. उसने भी यह नंबर लेने से अंत में मन कर दिया था. इस मामले में और गहनता से जांच की जा रही है.

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