पैरेंटिंग टिप्स: बच्चों को जरूर सिखाएं ये 5 बेसिक मैनर्स, कभी नहीं होना पड़ेगा शर्मिंदा!
बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए सिर्फ अच्छा खाना-कपड़ा ही काफी नहीं। जानें वो 5 जरूरी मैनर्स (Social Manners) जो बच्चों के भविष्य को संवारेंगे और आपको दिलाएंगे गर्व।
“बीज से एक पेड़ बनने तक का सफर बहुत लंबा होता है और इस दौरान खाद-पानी, सही रोशनी की जरूरत होती है. इसी के बाद आपको फल, सब्जियां, फूल मिलते हैं, नहीं तो पेड़ बनने से पहले ही पौधा खराब होने लगता है.” इसी तरह से बच्चे की परवरिश करना भी बहुत जिम्मेदारी का काम होता है, जो उन्हें सिर्फ अच्छा खाना देना, अच्छे कपड़े पहनाना या सिर्फ पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है. बच्चे को अच्छे संस्कार देने के साथ ही उन्हें सोशल बिहेवियर सिखाना भी बेहद जरूरी होता है. कई बार बच्चे दूसरों के सामने कुछ ऐसा कर देते हैं, जिससे पेरेंट्स को भी असहज महसूस होने लगता है. यही वजह है कि बच्चों को कुछ बेसिक मैनर्स सिखाना जरूरी होता है.
आपको दूसरों के सामने शर्मिंदा न होने पड़े और बच्चा का आने वाला फ्यूचर भी ब्राइट हो. इसके लिए बहुत जरूरी है कि आप धीरे-धीरे डेली रूटीन में बच्चों को छोटी-छोटी अच्छी बातें सिखाते रहें. हालांकि मैनर्स सिखाना एक दिन का काम नहीं होता है, बल्कि यह एक प्रोसेस हैं जिसमें खुद भी पेरेंट्स को बच्चों के सामने एग्जांपल सेट करना पड़ता है. तो चलिए जान लेते हैं कि कौन से 5 बेसिक मैनर्स बच्चों को सिखाने जरूरी होते हैं.
विनम्रता सिखाना है जरूरी
लाइफ में आगे बढ़ने और एक खुशहाल जीवन बिताने के लिए जरूरी है कि बच्चों को विनम्रता (Politeness) सिखाई जाए. ये बहुत जरूरी है कि उन्हें प्लीज, थैंक्यू और सॉरी कहना आना चाहिए. जैसे जब वे किसी से कुछ मांगे तो ‘प्लीज’ या कृपया जरूर कहें. कोई अगर उन्हें कुछ दे तो थैंक्यू बोलना आना चाहिए. कोई आपके यहां आता है तो उसे ग्रीट करना सिखाएं जैसे गुड मॉर्निंग, हेलो या नमस्ते. सबसे जरूरी है कि आप उन्हें माफी मांगना सिखाएं. ये चीजें न सिर्फ दूसरों के सामने आपके बच्चे को अच्छा दिखाती हैं, बल्कि ये आगे आने वाली लाइफ में भी बहुत काम आने वाला बिहेवियर होता है.
टेबल मैनर्स जरूर सिखाएं
बच्चों को टेबल मैनर्स जरूर सिखानाचाहिए. ऐसे में जब आप कहीं बाहर जाते हैं या फिर कोई आपके घर खाने पर आता है तो असहजता नहीं होती है. उम्र बढ़ने के साथ बच्चे इससे पब्लिक प्लेस पर सही बिहेव करना सीखते हैं और उनमें कॉन्फिडेंस भी बिल्ड होता है. बच्चों को खाने से पहले हाथ धोना, डाइनिंग टेबल पर आराम से बैठना, मुंह बंद रखकर आराम से खाना चबाना जैसी आदतें सिखानी चाहिए.
आराम से कोई भी बात बताना
अक्सर बच्चे जब कोई बात कह रहे होते हैं तो वो चिल्लाने लगते हैं. बच्चों में ये आदत डालना बहुत जरूरी होता है कि वह अपनी पूरी बात कहें, लेकिन आराम से कहें. दरअसल ये तब होता है जब आप बच्चे की बात को गौर से नहीं सुनते हैं, इसलिए आपके बच्चे आपसे अगर कोई बात करना चाहें तो दो मिनट सारे काम छोड़कर उन्हें सुनें. इससे उनमें ये आदत डेवलप होगी कि अपनी बात को आराम से किस तरह कहना है और घर के अलावा वह पब्लिक प्लेस पर भी सही बिहेव करना सीखेंगे.
नॉक करके ही अंदर जाएं
बच्चों को हमेशा ये सिखाएं कि किसी के भी रूम में बिना नॉक (खटखटाया) किए अंदर नहीं जाना है. इसी तरह से यह भी सिखाएं कि किसी और की चीज को बिना पूछे नहीं लेना होता है. दरअसल प्राइवेसी की समझ अगर बचपन से ही हो तो ये आगे आने वाली लाइफ में भी काम आती है. ऐसे में जब बच्चे किसी और के घर जाते हैं या फिर कोई मेहमान आपके यहां आता है तो असहजता की स्थिति पैदा नहीं होती है.
बच्चे को बात सुनना सिखाएं
छोटे बच्चों को अपनी बात कहने की जल्दी होती है और अक्सर वह किसी की बात करने के दौरान बीच में बोलने लगते हैं. ये गलत नहीं है, दरअसल बच्चे भी अपनी बात रखना चाहते हैं. हालांकि कई बार इससे स्थिति काफी अजीब हो सकती है, इसलिए उन्हें सिखाएं कि जब कोई बात कर रहा हो तो पहले ध्यान से पूरी बात सुननी चाहिए. इसके बाद आप अपनी बात को भी दूसरे से कहें. ये आदत डेवलप करने के लिए आपको अपने ही डेली रूटीन में इसे अपनाना होगा. जैसे जब बच्चे कुछ कहें तो उसे सुनें. इससे बच्चे में धैर्य की भावना बढ़ती है और वह सम्मान करना भी सीखते हैं.