Organ Donation Rohtak: जेल वार्डर कुलदीप ने जाते-जाते दी कई लोगों को नई जिंदगी, बना मिसाल
रोहतक पीजीआई में जेल वार्डर कुलदीप के निधन के बाद परिजनों ने किया अंगदान। पुलिस ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर। जेल मंत्री ने ₹5 लाख की निजी सहायता और सरकारी मदद का दिया भरोसा।
रोहतक : मानवता की मिसाल पेश करते हुए जेल वार्डर कुलदीप ने मृत्यु के बाद अंगदान कर कई लोगों को नई जिंदगी दी। ब्रेन ट्यूमर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे कुलदीप का निधन पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजीआईएमएस रोहतक में हुआ, जिसके बाद उनके परिजनों ने बड़ा निर्णय लेते हुए अंगदान के लिए सहमति दी। इस फैसले से कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने का रास्ता खुल गया।
कुलदीप के अंगों को समय पर विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और पुलिस ने मिलकर ग्रीन कॉरिडोर बनाया। इसके जरिए अंगों को तेजी से संबंधित अस्पतालों में पहुंचाया गया, जिससे ट्रांसप्लांट प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकी। डॉक्टरों के अनुसार, एक व्यक्ति के अंगदान से 8 लोगों तक की जान बचाई जा सकती है और कुलदीप का यह योगदान उसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
हरियाणा के जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पीजीआई रोहतक पहुंचकर कुलदीप को अंतिम विदाई दी। मंत्री ने कहा कि कुलदीप अपने इस महान कार्य से अमर हो गए हैं और उन्होंने कई लोगों को जीवनदान देकर समाज को एक नई दिशा दिखाई है। उन्होंने कहा कि अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं होता और लोगों को इस दिशा में जागरूक होना बेहद जरूरी है।
कुलदीप के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे : डॉ. अरविंद
डॉ. अरविंद शर्मा ने यह भी कहा कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री से बातचीत कर कुलदीप के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने अपनी ओर से 5 लाख रुपये की मदद देने की घोषणा भी की, ताकि परिवार को इस कठिन समय में सहारा मिल सके।
वहीं डॉ एचके अग्रवाल, जो स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर हैं, ने कहा कि कुलदीप का अंगदान समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि एक शरीर दान से कई लोगों को जीवन मिल सकता है और इस तरह के कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुलदीप के परिजनों के इस निर्णय की हर ओर सराहना हो रही है। डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन ने परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहसिक फैसले दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बनते हैं। परिजनों ने भी इस कठिन समय में मानवता को प्राथमिकता देते हुए अंगदान का निर्णय लिया, जो समाज के लिए एक मिसाल है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि अगर जागरूकता और इच्छाशक्ति हो तो एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। जरूरत है तो केवल लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें और जरूरतमंदों को जीवनदान मिल सके।