AAP Crisis: जिसे ‘चाणक्य’ माना उसी ने दिया दगा, संदीप पाठक की बगावत की पूरी कहानी

संदीप पाठक ने कैसे किया अरविंद केजरीवाल के साथ 'डबल क्रॉस'? राघव चड्ढा की बगावत और 7 सांसदों के BJP में विलय की इनसाइड स्टोरी। जानें 24 अप्रैल की वो कॉल।

आम आदमी पार्टी के सांसदों की बगावत से जितने हैरान आम लोग हैं, उतने ही अरविंद केजरीवाल भी हैं. क्योंकि राजनीति के अखाड़े में अरविंद केजरीवाल को उस शख्स ने पटखनी दी, जिसे खुद अरविंद केजरीवाल संगठन का चाणक्य ( संदीप पाठक) मानते थे. पार्टी के लिए पहले स्वाति मालीवाल और राघव चड्ढा की बगावत जगजाहिर थी. हरभजन सिंह भी हमेशा सतही रहे. इसलिए पार्टी आलाकमान इनको लेकर पहले से ही सतर्क था.

राघव चड्ढा पर एक्शन के बाद संभावित खतरे पर मंथन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अपने सबसे खास और भरोसेमंद मनीष सिसोदिया और संजय सिंह से पूछा कि पार्टी की कमजोर कड़ी कौन साबित हो सकता है या पाला बदल सकता है? क्योंकि लगातार इनपुट मिल रहा था कि अपनी सांसदी बचाने के राघव चड्ढा अकेले बगावत के बिगुल नहीं फूंकेंगे बल्कि वो बड़ी टूट की कोशिश में है. बाकी सांसदों से संपर्क किया जा रहा है. मनीष सिसोदिया और संजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल को भरोसा दिलाया कि मरे से मरे हाल में 4 सांसद ऐसे हैं जो टस से मस नहीं होंगे। उनमें संजय सिंह, एनडी गुप्ता, सिचेवाल और संदीप पाठक हैं. संदीप पाठक की गारंटी खुद संजय सिंह और मनीष सिसोदिया ने ली.

राघव और स्वाति का पता था, लेकिन बाकी का नहीं

अब गणित लगाया गया कि पार्टी के पास 7 राज्यसभा सांसद पंजाब और 3 दिल्ली में हैं. इन 10 में से 4 तो कहीं नहीं जाने वाले हैं. बाकी बचे 6 में से 2 यानी राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल पहले से बागी हैं. बुरे से बुरे हाल में अगर बाकी बचे 4 सांसद अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, हरभजन सिंह और राजेंद्र गुप्ता भी राघव का साथ दें दे तो भी पार्टी का नुकसान नहीं होगा. क्योंकि 2/3 संख्या के लिए 7 सांसद चाहिए. पाला बदला तो सांसदी चली जाएगी.

इसके बाद अरविंद केजरीवाल पूरी तरह से आश्वस्त हो गए कि उनकी पार्टी को कोई खतरा नहीं है, लेकिन अंदर ही अंदर कब अरविंद केजरीवाल का चौथा, राघव चड्ढा का सातवां बन गया उनको पता ही नहीं चला. आखिर में वह दिन 24 अप्रैल आया, जिस दिन अरविंद केजरीवाल का चाणक्य ( संदीप पाठक) राघव चड्ढा के साथ नजर आया और बताया दो तिहाई संख्या के लिए जरूरी सातवां सांसद कोई और नहीं बल्कि वही है.

चाणक्य ने किया अरविंद केजरीवाल के साथ डबल क्रॉस

सूत्रों के मुताबिक एक तरफ अरविंद केजरीवाल संदीप पाठक को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो चुके थे कि वह पार्टी का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे. तो दूसरी तरफ संदीप पाठक खुद केजरीवाल से मिलने आते और बताते कि कौन-कौन राघव चड्ढा के संपर्क में हैं. पाठक बातों ही बातों में अरविंद केजरीवाल से ये भी उगलवाते कि आगे का प्लान ऑफ एक्शन क्या है? राघव चड्ढा को पार्टी कैसे काउंटर करेगी? अरविंद केजरीवाल भी दिल खोलकर सारी बातें बता देते थे, लेकिन वह यह नहीं जानते थे की संदीप पाठक वही सारी बातें आगे जाकर राघव चड्ढा को बता रहे थे. यह सिलसिला बगावत से एक दिन पहले तक चला.

केजरीवाल को कब लगी खबर और सबसे पहले किसको किया फोन?

सूत्रों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल को बगावत की खबर 24 अप्रैल को दोपहर 1:30 बजे मिली. तब तक अरविंद केजरीवाल जान चुके थे कि वह सातवां सांसद कौन है? अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहला फोन मनीष सिसोदिया को किया जो कि उस वक्त गुजरात में थे. अरविंद केजरीवाल ने फोन पर मनीष सिसोदिया से कहा कि हमारे 7 सांसद अलग हो रहे हैं. मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल से पूछा कि सातवां कौन? तो सामने से जवाब आया संदीप पाठक! कुछ सेकेंड तक दोनों चुप रहे और इंतजार करने लगे सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंस का.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जैसे ही राघव चड्ढा ने बीजेपी में विलय की घोषणा की मनीष सिसोदिया ने गुजरात से ही आम आदमी पार्टी के कोर व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज लिखा “मुबारक हो ये लोग बीजेपी में जा रहे हैं.” आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अच्छा हुआ ये सांसद बीजेपी में विलय कर रहे हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है, कोर्ट में चैलेंज करेंगे. ऐसे में उनकी सांसदी चली जाएगी. अगर ये लोग अलग-अलग दल या गुट बनाते तो पार्टी के लिए ज्यादा मुश्किलें होती.

2 से 22 अप्रैल के बीच 20 दिनों में लिखी गई पूरी पटकथा

सूत्रों के मुताबिक, सांसदों को तोड़ने की शुरुआत 2 अप्रैल से शुरू हो गई थी. ये वो तारीख थी जब सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया गया था और अशोक मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाया गया. सूत्रों के अनुसार, पहले से बीजेपी के संपर्क में रहे राघव चड्ढा ने अन्य सांसदों को मोबिलाइज करना शुरू कर दिया था. पहले से बागी हो चुकी स्वाति मालीवाल को इस गुट में लेना बहुत आसान था वो पहले से ही बीजेपी के संपर्क में थी. अशोक मित्तल से लगातार संपर्क किया जा रहा था लेकिन शुरू में अशोक मित्तल इस गुट में शामिल होने के लिए राजी नहीं थे. 14 अप्रैल एक निर्णायक दिन रहा. जब अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की रेड हुई.

सूत्रों का कहना है कि ED की रेड का मनोवैज्ञानिक दबाव अन्य उद्योगपति सांसद विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता पर डाला गया. सूत्रों के मुताबिक तारीख 22 अप्रैल बहुत महत्वपूर्ण दिन था. इस दिन एक साथ कई सांसदों की मेन टू मेन मार्किंग करके उन्हें बीजेपी शामिल करवाने की कोशिश की गई. मुंबई में हरभजन सिंह के घर बीजेपी नेता विनोद तावड़े को भेजा गया और कहा गया कि अगर वह नहीं मानते हैं तो उनके BCCI के साथ एग्रीमेंट्स रद्द कर दिए जाएंगे.

राजेंद्र गुप्ता को भी दिखाया ED का डर

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका में इलाज करवा रहे सांसद राजेंद्र गुप्ता से मिलने ओवरसीज बीजेपी के कुछ पदाधिकारी मिले और उनसे कहा अशोक मित्तल के ठिकानों से निकली ED की टीम उनके यहां भी पहुंच सकती है. 22 तारीख को विक्रम साहनी अरविंद केजरीवाल से उनके नए आवास 95 लोधी इस्टेट पर मिले. सूत्रों के अनुसार विक्रम साहनी अरविंद केजरीवाल को डबल क्रॉस कर रहे थे. विक्रम साहनी ने ही अरविंद केजरीवाल को बताया कि अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और हरभजन सिंह ने अलग गुट समर्थन वाली चिट्ठी पर दस्तखत कर दिए हैं. इसी के अगले दिन 23 अप्रैल को संदीप पाठक एक बार फिर अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे. दोनों के बीच तकरीबन डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई. अरविंद केजरीवाल ने विक्रम साहनी द्वारा दी गई जानकारी संदीप पाठक से साझा किया.

अंत तक केजरीवाल को भरोसे में रखा

जिसके बाद संदीप पाठक ने ही अशोक मित्तल को अरविंद केजरीवाल के आवास पर बुलाया. इस बीच अशोक मित्तल की तरफ से अरविंद केजरीवाल को ये भरोसा दिया गया कि उनपर दवाब जरूर है लेकिन वो पार्टी के साथ बने रहेंगे. तब तक अरविंद केजरीवाल को इस बात का इल्म तक नहीं था कि संदीप पाठक खुद उस प्लान की अहम कड़ी हैं. अरविंद केजरीवाल को आखिर तक इस कदर गुमराह किया गया कि 24 अप्रैल शाम 7 बजे का विक्रम साहनी ने अरविंद केजरीवाल से मीटिंग का अपॉइंटमेंट लिया हुआ था. इधर अरविंद केजरीवाल इंतजार करते रहे और उधर 24 अप्रैल को ही सुबह 11 बजे सभी बागी सांसदों की तरफ से राज्यसभा के सभापति को आम आदमी पार्टी से अलग होकर बीजेपी में विलय करने की चिट्ठी सौंप दी गई.

Leave A Reply

Your email address will not be published.