SCO Meeting 2026: बिश्केक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आतंकवाद पर दुनिया को देंगे कड़ा संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बिश्केक में SCO बैठक में शामिल होंगे। वे आतंकवाद पर भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और वैश्विक शांति की प्रतिबद्धता को विश्व पटल पर रखेंगे।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल होंगे. राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रियों की इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी साझा की है. बैठक के इतर, रक्षा मंत्री कुछ सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी कर सकते हैं, जिसमें रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वे विश्व में व्याप्त सुरक्षा चुनौतियों के बीच वैश्विक शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को उजागर करेंगे. रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वह आतंकवाद और चरमपंथ के प्रति शून्य सहिष्णुता के देश के दृढ़ रुख को भी स्पष्ट करेंगे. बताया जा रहा है कि इस बार की बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है. ऐसे में SCO देश मौजूदा संघर्ष के असर को कम करने के उपायों पर भी चर्चा कर सकते हैं.

किन-किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

इस अहम बैठक में SCO सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे. खासतौर पर आतंकवाद से मुकाबला, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग को मजबूत करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा.

इस बार की बैठक ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है. ऐसे में SCO देश मौजूदा संघर्ष के असर को कम करने के उपायों पर भी चर्चा कर सकते हैं.

15 जून 2001 को चीन के शंघाई में हुई थी SCO की स्थापना

बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच शांति बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराएंगे. साथ ही, भारत की आतंकवाद और उग्रवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को भी प्रमुखता से रखेंगे. गौरतलब है कि SCO एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई में हुई थी. इसके सदस्य देशों में भारत, रूस, चीन, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं. भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना था और 2023 में इसकी अध्यक्षता भी कर चुका है.

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