Special 301 Report: भारत ‘प्रायोरिटी वॉच लिस्ट’ में बरकरार, वियतनाम पर संकट

अमेरिकी Special 301 रिपोर्ट में भारत को 'प्रायोरिटी वॉच लिस्ट' में रखा गया है। वियतनाम सबसे गंभीर PFC श्रेणी में शामिल, व्यापार जांच का खतरा। जानें पूरी रिपोर्ट।

अमेरिका ने अपनी सालाना स्पेशल 301 रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट दुनिया के अलग-अलग देशों में इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क की सुरक्षा और उसके पालन की स्थिति जांचने के लिए बनाई जाती है. इस बार की रिपोर्ट में वियतनाम को सबसे सख्त श्रेणी में रखा गया है, जबकि भारत का नाम भी अहम सूची में शामिल है.

अमेरिका का ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस (USTR) हर साल इस रिपोर्ट के जरिए अपने ट्रेड पार्टनर देशों की समीक्षा करता है. इस साल USTR ने 100 से ज्यादा देशों का आकलन किया. रिपोर्ट में वियतनाम को प्रायोरिटी फॉरेन कंट्री (PFC) घोषित किया गया है, जो सबसे गंभीर श्रेणी होती है. इसका मतलब है कि अमेरिका को वियतनाम की IP पॉलिसीज से बड़ी समस्या है. अब USTR अगले 30 दिनों में यह तय करेगा कि वियतनाम के खिलाफ ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 के तहत जांच शुरू की जाए या नहीं.

भारत प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में

भारत को इस बार प्रायोरिटी वॉच लिस्ट में रखा गया है. इस लिस्ट में कुल 6 देश हैं, जिनमें चिली, चीन, भारत, इंडोनेशिया, रूस और वेनेजुएला शामिल हैं. इन देशों में IP अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका को गंभीर चिंता है और आने वाले समय में इनके साथ इस मुद्दे पर गहन बातचीत की जाएगी.

इसके अलावा 19 देशों को वॉच लिस्ट में रखा गया है. इनमें अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, कनाडा, मिस्र, पाकिस्तान, मेक्सिको, यूरोपीय संघ, थाईलैंड और तुर्किये जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में भी IP से जुड़ी समस्याएं हैं, लेकिन इन्हें प्रायोरिटी वॉच लिस्ट से कम गंभीर माना गया है.

EU को पहली बार वॉच लिस्ट में डाला

इस साल की रिपोर्ट में कुछ बदलाव भी किए गए हैं. अर्जेंटीना और मेक्सिको को सुधार के कारण प्रायोरिटी वॉच लिस्ट से हटाकर वॉच लिस्ट में डाल दिया गया है. वहीं यूरोपीय संघ को पहली बार वॉच लिस्ट में शामिल किया गया है, जबकि बुल्गारिया को इस सूची से बाहर कर दिया गया है.

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि उनके लिए अपने इनोवेटर्स, क्रिएटर्स और ब्रांड्स की सुरक्षा बहुत जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी देश में IP अधिकारों का सही तरीके से पालन नहीं होता है, तो अमेरिका कार्रवाई कर सकता है. 2026 की स्पेशल 301 रिपोर्ट से साफ है कि अमेरिका IP अधिकारों को लेकर सख्त है और जिन देशों में कमी पाई जाएगी, उन पर आगे दबाव बनाया जा सकता है.

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