Delhi News: दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, सेंट्रल रिज का 673 हेक्टेयर क्षेत्र ‘आरक्षित वन’ घोषित

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सेंट्रल रिज के 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया। 30 साल से लंबित प्रक्रिया पूरी, अब इस 'ग्रीन लंग्स' को मिलेगी कानूनी सुरक्षा।

देश की राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत सेंट्रल रिज क्षेत्र के लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित कर दिया है. यह क्षेत्र वन विभाग के पश्चिमी वन प्रभाग के अधीन है. आरक्षित वन क्षेत्र सरदार पटेल मार्ग तथा राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास के हिस्सों से जुड़ा हुआ है. मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार पहले ही फैसला ले चुकी है कि आरक्षित वन घोषित किए गए रिज क्षेत्रों में जहां भी उपयुक्त और खाली भूमि उपलब्ध होगी, वहां बड़े स्तर पर देसी एवं पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएंगे.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि दिल्ली सरकार का यह निर्णय राजधानी की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरणीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. उन्होंने बताया कि दिल्ली के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील रिज क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने का विषय कई दशकों से लंबित था. हमारी सरकार ने प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सेंट्रल रिज क्षेत्र के लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया है. यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित व संतुलित भविष्य सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी की हरित संपदा को संरक्षित करने और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है.

राजधानी का ग्रीन लंग्स

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सेंट्रल रिज क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किए जाने के साथ ही तीन दशक से ज्यादा समय से लंबित एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया अब पूरी हो गई है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1994 में रिज क्षेत्रों को प्रारंभिक अधिसूचना जारी किए जाने के बावजूद लंबे समय तक इन्हें अंतिम कानूनी संरक्षण नहीं मिल सका था. वर्तमान सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल करते हुए सेंट्रल रिज क्षेत्र को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत आरक्षित वन घोषित कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. मुख्यमंत्री ने बताया कि सेंट्रल रिज क्षेत्र राजधानी के मध्य में स्थित है और यह अपर रिज रोड के दोनों ओर फैला हुआ है. यह क्षेत्र सरदार पटेल मार्ग और राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास के महत्वपूर्ण हिस्सों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि दिल्ली रिज, प्राचीन अरावली पर्वतमाला का विस्तार है और इसे राजधानी का ग्रीन लंग्स माना जाता है. यह क्षेत्र वायु गुणवत्ता सुधारने, जैव विविधता को संरक्षित करने, भूजल स्तर को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन और शहरी प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जानकारी दी कि वर्ष 1994 में दिल्ली के सभी पांच रिज क्षेत्रों को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 4 के तहत अधिसूचित किया गया था. इसके बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में पिछले वर्ष 24 अक्टूबर को दक्षिणी रिज क्षेत्र के लगभग 4080.82 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया गया था. अब सेंट्रल रिज के 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र की अधिसूचना के साथ वर्तमान सरकार अब तक कुल 4754.14 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को आरक्षित वन का दर्जा प्रदान कर चुकी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के अन्य रिज क्षेत्रों को भी शीघ्र ही धारा 20 के तहत आरक्षित वन घोषित किया जाएगा और इसके लिए प्रक्रिया तेजी से जारी है.

पर्यवारण के अनुकूल लगाए जाएंगे पेड़

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आरक्षित वन घोषित किए गए रिज क्षेत्रों में जहां भी उपयुक्त और खाली भूमि उपलब्ध होगी, वहां बड़े स्तर पर देसी एवं पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों के वृक्ष लगाए जाएंगे. इनमें नीम, पीपल, शीशम, जामुन, इमली और आम जैसे पेड़ शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि रिज क्षेत्रों की पारिस्थितिकी को मजबूत करना, जैव विविधता का संरक्षण करना तथा भूमि की उर्वरता और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेंट्रल रिज क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किए जाने से अब इस क्षेत्र को अधिक मजबूत वैधानिक सुरक्षा प्राप्त होगी. इससे अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों तथा पर्यावरणीय क्षरण पर प्रभावी रोक लगाने में सहायता मिलेगी. साथ ही वन विभाग द्वारा रिज क्षेत्रों में चलाए जा रहे संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन कार्यों को और मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार वैज्ञानिक वन प्रबंधन, पारिस्थितिक संरक्षण और हरित क्षेत्र विस्तार को लेकर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि दिल्ली के पर्यावरणीय संतुलन को स्थायी रूप से मजबूत करना है. ये निर्णय आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा.

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