Twisha Sharma Case: मिस पुणे ट्विशा शर्मा की मौत में नया मोड़; पिता ने दामाद पर लगाए गंभीर आरोप

मिस पुणे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत पर पिता निवनिधि शर्मा का बड़ा बयान। हनीमून से ही प्रताड़ना का आरोप, केस दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग। पोस्टमार्टम पर उठे सवाल।

12 मई को मिस पुणे रह चुकीं ट्विशा शर्मा की भोपाल में हुई संदिग्ध मौत सवालों के घेर में हैं. ये आत्महत्या है या सुसाइड, इसे लेकर संशय बरकरार है. परिजनों का आरोप है कि ट्विशा अपने पति और ससुरालियों को टॉर्चर से पूरी तरह टूट चुकी थीं. अब उनके पिता पिता निवनिधि शर्मा का बयान सामने आया है, जिससे दामाद समर्थ के कई काले चिट्ठे उगागर हुए हैं. उनका कहना है कि हनीमून से ही समर्थ ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए थे. टिकट बुकिंग में डिले होने को लेकर उसने हनीमून पर ट्विशा को पहली बार धक्का दिया था.

ट्विशा के पिता पिता निवनिधि शर्मा की मानें तो- उस वक्त शादी को महज डेढ़ महीने हुए थे. मगर समर्थ ने पहले ही हिंट दे दिया था कि वो कैसा है. ट्विशा ने पहले तो हमें नहीं बताया. मगर बाद में उसने ये बात हमें बताई. बोली- पापा मैं तो हैरान रह गई कि हनीमून में वो मेरे साथ कैसा बिहेव कर रहा है. ट्विशा के पिता बोले- उस वक्त मेरे बेटे ने ट्विशा को समझाया था कई बार गुस्से में इंसान ऐसा कर देता है. तू इस बात को इग्नोर कर दे. मगर उसके बाद से ये सिलसिला चलता ही रहा.

मृतका ट्विशा के पिता का ये भी कहना है कि समर्थ के रिश्तेदार बड़े ओहदों में हैं. इनके कई रिश्तेदार तो ज्यूडिशियरी में हैं, जिससे मेरी बेटी के केस में रुकावट डाली जा रही है. हम चाहते हैं कि इस केस की सुनवाई भोपाल की बजाय किसी और राज्य में हो. केस की जांच किसी और राज्य में हो.

दिल्ली ट्रांसफर होना चाहिए केस

ट्विशा के पिता निवनिधि शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें भोपाल में न्याय मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है. उन्होंने कहा कि पूरा सिस्टम उनके साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. हालत ये है कि हमारी पैरवी करने के लिए वकील तक सामने नहीं आ रहे हैं. निवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया कि ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह इतनी प्रभावशाली हैं कि उनके खिलाफ कोर्ट में खड़ा होने से भी लोग बच रहे हैं.

ट्विशा के पिता ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर मिसमैच दिखाई दे रहे हैं. परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग उठाई है ताकि सच्चाई सामने आ सके. उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केस को भोपाल से बाहर, दिल्ली ट्रांसफर किया जाना चाहिए.

बेटी पर लगाए जा रहे झूठे आरोप

गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत पर भी परिवार ने नाराजगी जताई. निवनिधि शर्मा ने कहा कि यह फैसला न्याय व्यवस्था पर काला धब्बा है और इसे हमेशा याद रखा जाएगा. ट्विशा पर ड्रग्स लेने के लगाए गए आरोपों को भी पिता ने सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी बेहद काबिल और समझदार लड़की थी. उन्होंने कहा, ट्विशा ने अपनी चैट में अपना दर्द और परेशानियां बताई थीं. वही चैट आज सबके सामने है, नहीं तो कोई हमारी बात पर भरोसा ही नहीं करता.

केस में नया विवाद भी खड़ा हुआ

वहीं, दूसरी तरफ इस हाई-प्रोफाइल में जांच प्रक्रिया को लेकर नया विवाद भी खड़ा हो गया है. सामने आया है कि संदिग्ध फांसी मामले में जरूरी लिगेचर मटेरियल यानी फंदे में इस्तेमाल पट्टा या सामग्री डॉक्टरों को दिए बिना ही पोस्टमार्टम करवा लिया गया. इस खुलासे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.

फॉरेंसिक नियमों के मुताबिक, किसी भी संदिग्ध फांसी मामले में शव के साथ उस सामग्री को भी जांच के लिए भेजना जरूरी होता है, जिससे फंदा लगाया गया हो. डॉक्टर उसी के आधार पर गले पर बने निशानों का वैज्ञानिक परीक्षण करते हैं. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि मौत वास्तव में फांसी से हुई या फिर किसी अन्य परिस्थिति में हत्या के बाद शव को लटकाया गया.

फॉरेंसिक प्रक्रिया में क्यों अहम है लिगेचर मटेरियल?

विशेषज्ञों के अनुसार, फंदे की चौड़ाई, बनावट और उसके दबाव के निशानों का मिलान मृतक के गले पर मौजूद मार्क्स से किया जाता है। यह जांच आत्महत्या और हत्या के बीच अंतर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. ट्विशा मामले में यह प्रक्रिया शुरुआती पोस्टमार्टम के दौरान पूरी नहीं हो सकी, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

विवाद बढ़ने के बाद हरकत में पुलिस

मामले ने तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने संबंधित पट्टा एम्स भोपाल के फॉरेंसिक विभाग को सौंप दिया है. अब विशेषज्ञ दोबारा गले के निशानों और फंदे की सामग्री का मिलान करेंगे. माना जा रहा है कि आने वाली रिपोर्ट केस की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है.

परिवार ने उठाए निष्पक्ष जांच पर सवाल

मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया है कि मामले में शुरू से ही गंभीर लापरवाही बरती जा रही है. उनका कहना है कि आरोपियों का प्रभावशाली बैकग्राउंड होने की वजह से जांच प्रभावित हो रही है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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