Dowry Death Statistics: भारत में दहेज हत्या का कलंक; UP-बिहार सबसे आगे, जानें क्या कहते हैं NCRB आंकड़े

देश में दहेज हत्या के 70% मामले सिर्फ 5 राज्यों में! UP और बिहार में सबसे ज्यादा केस, जबकि पूर्वोत्तर राज्य इस कुप्रथा से मुक्त। जानें क्या है भारतीय न्याय संहिता की धारा 80।

देश में दहेज उत्पीड़न और विवाहिताओं की हत्या के मामले कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं. भोपाल में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की ससुराल में मौत तो वहीं दहेज उत्पीड़न से तंग आकर नोएडा में एक महिला की खुदकुशी ने इस कलंक को फिर से उजागर कर दिया है. देश में दहेज पर अंकुश को लेकर कड़े कानून बनाए गए हैं, लेकिन इसके अमल पर कहीं न कहीं ढिलाई बरती जाती है और यही वजह है कि ऐसे मामले आज भी सामने आ जाते हैं.

भारत में दहेज से जुड़ी बढ़ती घटनाओं और हत्याओं पर अंकुश लगाने के लिए बहुत पहले ही कड़े कानून बना दिए गए थे. दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 ये 2 बड़े कानून हैं जिसमें दहेज की बुराई से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं.

दहेज को लेकर कई कड़े प्रावधान

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 80 (पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 304-B) खासतौर से शादी के 7 सालों के अंदर होने वाली दहेज से जुड़ी मौत के मामलों पर लागू होती है, जबकि कानून के कई अन्य प्रावधान, भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 (पहले IPC की धारा 498-A)—विवाह की अवधि चाहे जो भी हो, दहेज की मांग को लेकर की जाने वाली क्रूरता और उत्पीड़न के खिलाफ विवाहिता महिला को सुरक्षा प्रदान करते रहते हैं.

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 किसी तरह से दहेज देने या लेने पर रोक लगाता है और इसके लिए कड़े दंड का प्रावधान करता है, ताकि महिलाओं को दहेज संबंधी उत्पीड़न से बचाया जा सके. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 आपराधिक मामलों, जिनमें दहेज से जुड़े मामले भी शामिल हैं, की त्वरित जांच और सुनवाई का प्रावधान करती है.

UP-बिहार से आते हैं सबसे अधिक केस

हालांकि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि कड़े कानूनी प्रावधान होने के बाद भी ज्यादातर मामलों में दोषियों को सजा भी नहीं मिल पाती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि बड़ी संख्या में दहेज हत्या से जुड़े मामले (Cases Registered, CR) उत्तर प्रदेश और बिहार से आते हैं.

दहेज हत्या मामले में सबसे अधिक सजा सुनाने वाले राज्य, NCRB 2021
क्रम संख्या राज्य ट्रायल पूरी (CTC) दोषसिद्ध मामले (CON) सजा सुनाने की दर (CVR)
1 बिहार 179 128 71.50%
2 झारखंड 81 47 58.30%
3 उतार प्रदेश 753 439 58.00%
4 राजस्थान 203 98 48.30%
5 पंजाब 26 11 42.30%
6 उत्तराखंड 17 6 35.80%
7 मध्य प्रदेश 380 136 35.30%
8 छत्तीसगढ 32 11 34.40%
9 तमिलनाडु 44 12 27.30%
10 कर्नाटक 56 14 25.00%

 

NCRB की ओर से जारी 2023 के आंकड़ों के आधार पर साल 2019 में दहेज हत्या से जुड़े मामलों की संख्या 7,141 थी, जबकि इसमें 2021 में गिरावट देखी गई. 2020 में जहां 6,966 मामले दर्ज किए गए तो वहीं 2021 में घटकर 6,753 केस हो गए.

70 फीसदी से अधिक केस 5 राज्यों में

दहेज हत्या से जुड़े 70 फीसदी मामले अकेले 5 राज्यों में दर्ज हुए. इसमें सबसे अधिक उत्तर प्रदेश और बिहार में सामने आए. यूपी में साल 2019 में 2,410, 2020 में 2,274 और 2021 में 2,222 केस आए. हालांकि इसमें मामूली गिरावट देखी गई है, लेकिन अभी भी यह संख्या 2 हजार से अधिक है. बिहार में 2021 में 1,000 केस दर्ज किए गए थे. इसके बाद मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में दहेज से जुड़े मामले सामने आए.

मामला दर्ज होने और सजा सुनाए जाने के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें बहुत अंतर दिखता है. NCRB के मुताबिक, साल 2021 में देशभर में दहेज से जुड़े 6,753 केस दर्ज किए गए जिसमें महज 2,252 केसों की सुनवाई (Cases in which Trials Completed, CTC) पूरी हो सकी. इस तरह से 67 फीसदी केस पेंडिंग में हैं.

दहेज हत्या से जुड़े अभी भी हजारों केस

यही हाल साल 2020 का भी रहा. इस साल 6,843 केस दर्ज किए गए, जबकि 2,071 केस की ही सुनवाई पूरी हो सकी. इस तरह से 4,772 यानी 69.74% केस अभी भी पेंडिंग हैं. हालांकि 2019 में दर्ज 7,006 मामलों में से 49.8% (3,489 केस) की सुनवाई पूरी हो गई थी.

बिहार में दहेज से जुड़े मामलों में सजा सुनाने की दर (Case Conviction Rate यानी CVR) सबसे अधिक है. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में बिहार में यह दर सबसे अधिक 71.5 फीसदी रही. 1,000 दर्ज मामलों में 179 केसों की सुनवाई पूरी हुई और 128 मामलों में सजा सुनाई गई. इसी तरह उत्तर प्रदेश में 2,222 केसों में से 753 केसों की सुनवाई पूरी हुई तो 439 केसों में फैसला आया. इस तरह यहां 58.3 की दर रही.

पूर्वोत्तर राज्यों में दहेज हत्या की बीमारी नहीं

10 केसों से अधिक सजा सुनाने के मामले में झारखंड तीसरे नंबर पर रहा और यहां 58 फीसदी केस का फैसला आया. सुनवाई के दौरान कम CVR का मतलब आमतौर पर या तो कमजोर सबूत, लंबे समय तक केस का चलना, या गवाहों का अपने बयान से मुकर जाना होता है.

दहेज के बढ़ते मामले ज्यादातर उत्तर और पूर्वी राज्य हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में कुल मिलाकर हर साल 5000 से अधिक दहेज से जुड़े केस सामने आते हैं. जबकि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में यह बीमारी नहीं है. साल 2021 में मेघालय, सिक्किम, मिजोरम और नागालैंड में दहेज के एक भी मामले नहीं हैं जबकि मणिपुर में 2 केस दर्ज हुए. हालांकि असम में 198 मामले सामने आए थे जिसमें 20 की सुनवाई पूरी हो गई थी.

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