Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल के दाम में फिर लगी आग, $99 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल। ब्रेंट क्रूड $99 के पार, जबकि MCX पर कीमतें 1.90% बढ़ीं। जानें अमेरिकी सैन्य हमले का बाजार पर असर।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने एक बार फिर करवट ली है. सोमवार को सात फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट देखने के बाद, अचानक कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है. ग्लोबल बेंचमार्क ‘ब्रेंट क्रूड’ 99 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है, जबकि ‘वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट’ (WTI) 92 डॉलर के पार पहुंच गया है. घरेलू बाजार में भी इसका सीधा असर दिखा. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चा तेल 1.90 प्रतिशत उछलकर 8,779 रुपये प्रति बैरल तक जा पहुंचा. इस अचानक आए उबाल के पीछे ईरान में हुए नए अमेरिकी सैन्य हमले हैं. इस ताजा तनाव ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका-ईरान के बीच जल्द ही कोई अंतरिम समझौता हो सकता है.

समझौते की उम्मीदों के बीच अचानक क्यों बिगड़ा माहौल

ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए बातचीत चल रही है. इसी बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड तथा खदानों में तैनाती की कोशिश कर रही नावों को निशाना बनाया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड की इस कार्रवाई के बाद से ही कच्चे तेल के बाजार में आपूर्ति को लेकर घबराहट फैल गई है. हालांकि, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि दोनों देशों के बीच शुरुआती समझौते के मसौदे पर बातचीत अभी “कुछ और दिनों” तक जारी रहेगी. इस अनिश्चितता के कारण बाजार यह तय नहीं कर पा रहा है कि आगे मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई सुचारू रहेगी या नहीं.

परमाणु विवाद से उलझी शांति वार्ता की डोर

इस सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल के दाम तेजी से गिरे थे, क्योंकि ट्रंप ने बयान दिया था कि बातचीत “अच्छी चल रही है.” हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर बातचीत विफल रही तो और भी सैन्य कार्रवाइयां हो सकती हैं. फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच करीब दो महीने के संघर्ष विराम पर चर्चा हो रही है. इस संभावित समझौते के तहत अमेरिका अपनी नाकेबंदी में ढील देगा, जिसके बदले ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलेगा. विवाद का मुख्य पेंच यह है कि ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है. अमेरिका, अरब देशों तथा यूरोप को यह शर्त बिल्कुल मंजूर नहीं है.

स्थिति को और स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम को उसी के देश में नष्ट कर दिया जाना चाहिए या फिर वह सामग्री अमेरिका को सौंप दी जानी चाहिए. वाशिंगटन ने इजराइल के साथ इस संघर्ष में उतरने का मुख्य कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम को ही बताया है. उनका तर्क है कि तेहरान द्वारा परमाणु हथियारों की चाहत एक गंभीर वैश्विक खतरा है.

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