टोहाना की बेटियों का कमाल: JEE Advanced में मन्नत, नवप्रीत और नसीब की ऊंची उड़ान

टोहाना की मन्नत, नवप्रीत और नसीब ने जेईई एडवांस 2026 में गाड़े झंडे। किसान परिवारों की बेटियों ने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर हासिल की IIT की राह। पढ़ें सफलता की कहानी।

टोहाना : मेहनत और अनुशासन का फल मीठा होता है। इसका जीता-जागता उदाहरण पेश किया है। शहर के मेडिकल इन्क्लेव स्थित राहुल एकेडमी की तीन बेटियों ने। जेईई एडवांस 2026 में शानदार रैंक लाकर इन्होंने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे टोहाना क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सफलता की खबर मिलते ही एकेडमी में जश्न का माहौल बन गया। एकेडमी पहुंचने पर तीनों छात्राओं व उनके अभिभावकों का ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया गया।

टोहाना शहर की मन्नत ने 98.42 पर्सेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक 3950 हासिल की। पंजाब के गांव मनियाना की नवप्रीत कौर 96.96 पर्सेंटाइल के साथ 3377 रैंक पर रहीं। वहीं टोहाना के गांव दमकोरा की नसीब कौर ने 97.36 पर्सेंटाइल के साथ 5365 रैंक प्राप्त की। तीनों का लक्ष्य कंप्यूटर साइंस ब्रांच से आईआईटी में दाखिला लेकर देश-विदेश में नाम कमाना है।

किसान की बेटियों की मेहनत की कहानी

मन्नत के पिता काबल सिंह बिजनेसमेन और माता शरणजीत गृहणी हैं। नवप्रीत के पिता बिंदर सिंह और माता करमजीत कौर दोनों किसान हैं। नसीब के पिता दर्शन सिंह किसान और माता परमजीत कौर गृहणी हैं। यानी तीन में से दो बेटियां किसान परिवार से हैं।

बेटियों ने बताया कि 12वीं के बाद उन्होंने 1 साल का ड्रॉप लिया। इस दौरान जेईई मेंस और एडवांस की तैयारी की। रोजाना घर पर 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थीं। सबसे खास बात ये रही कि तीनों ने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया को हाथ तक नहीं लगाया। उनका मानना है कि विद्यार्थी को कभी डिमोटिवेट नहीं होना चाहिए। अनुशासन में रहकर लगातार मेहनत करो, सफलता जरूर मिलेगी। प्रीवियस ईयर के पेपर और मॉक टेस्ट से उन्होंने अपनी तैयारी को धार दी।

शिक्षक बोले – मन से पढ़ो, मुकाम खुद मिलेगा

राहुल गर्ग ने बताया कि ड्रॉपर बैच में ये तीनों सुबह 11 बजे से 4 बजे तक क्लास में मन लगाकर पढ़ती थीं। फिर घर जाकर रिवीजन करतीं। कोई डाउट रह जाता तो अगले दिन सुबह आकर क्लियर कर लेती थीं। उन्होंने कहा कि अगर बच्चा मन लगाकर पढ़े तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। टोहाना की इन बेटियों की सफलता ने साबित कर दिया कि सीमित संसाधन और किसान परिवार की पृष्ठभूमि भी सपनों के आड़े नहीं आती, बस जज्बा बुलंद होना चाहिए।
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