ग्वार की खेती: मिट्टी जांच और बीज उपचार से बढ़ाएं पैदावार, जानें वैज्ञानिक टिप्स
भिवानी में कृषि विभाग का जागरूकता शिविर। ग्वार की उन्नत किस्में HG-365, HG-563 और जड़ गलन रोग से बचाव के वैज्ञानिक तरीके जानें।
भिवानी। बहल खंड के गांव सिधनवा में कृषि विभाग के तत्वावधान में ग्वार फसल की पैदावार बढ़ाने को लेकर आयोजित शिविर में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने किसानों से बिजाई से पहले मिट्टी की जांच कराने और जांच रिपोर्ट के आधार पर संतुलित खाद का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच से यह पता चलता है कि भूमि में किस पोषक तत्व की कमी है, जिससे फसल प्रबंधन बेहतर ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि ग्वार की कम पैदावार का मुख्य कारण जड़ गलन और झुलसा रोग हैं। उखेड़ा बीमारी के जीवाणु भूमि में पनपते हैं और ग्वार के उगते पौधों की जड़ों को काला कर देते हैं। इससे पौधे जमीन से नमी और पोषक तत्व लेना बंद कर देते हैं तथा मुरझाकर पीले पड़ जाते हैं और अंततः सूख जाते हैं। ऐसे पौधों की जड़ें उखाड़ने पर काली दिखाई देती हैं।
एटीएम डॉ. मदन सिंह ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर देते हुए फसल चक्र के महत्व और उसके लाभों के बारे में भी विस्तार से बताया। डॉ. यादव ने किसानों को इस क्षेत्र के लिए ग्वार की उन्नत किस्में एचजी-365 और एचजी-563 बोने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि ये किस्में 85 से 100 दिन में तैयार हो जाती हैं जिससे इनके बाद सरसों की फसल आसानी से ली जा सकती है। उन्होंने प्रति एकड़ चार से पांच किलो बीज प्रयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि ग्वार की बिजाई पोरा विधि से ही करनी चाहिए तथा छीटा मारकर बिजाई नहीं करनी चाहिए।