भिवानी: मानसून की पहली बारिश में ही तालाब बना शहर, ड्रेनेज व्यवस्था फेल
भिवानी में बारिश से बिगड़े हालात, कचरा और पॉलिथीन के कारण नाले जाम। सड़कों पर जलभराव से लोग परेशान, बीमारियों का खतरा बढ़ा।
भिवानी। मानसून की पहली दस्तक ने जहां एक ओर लोगों को गर्मी से राहत दी है वहीं दूसरी ओर शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल दी है। शहर के अधिकांश मुख्य रास्तों, गलियों और बड़े नालों में पानी की निकासी ठप हो चुकी है। इसका मुख्य कारण शहरवासियों द्वारा नालों और गलियों में फेंका जाने वाला कचरा और प्रतिबंधित पॉलिथीन है। प्लास्टिक की थैलियों और मलबे से नाले जाम हो गए हैं जिससे बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है और शहर तालाब में बदल रहा है।
सड़कों पर जमा बारिश और सीवर का दूषित पानी कई दिनों तक फैला रहता है। धूप निकलने के बाद इस पानी से उठने वाली सड़न और बदबू ने राहगीरों का जीना मुश्किल कर दिया है। शहर में डेंगू, मलेरिया और त्वचा जनित बीमारियों के फैलने का खतरा तेजी से बढ़ गया है।
डिस्पोजल पर 24 घंटे कर्मचारी तैनात
विभाग के कार्यकारी अभियंता सूर्यकांत ने बताया कि बारिश के मौसम के मद्देनजर सभी डिस्पोजल पर 24 घंटे कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो उन्हें संचालित कर रहे हैं। नालों की जालियों के लिए अलग से कर्मचारी मैदान में हैं जो बारिश के दौरान नालियों की सफाई का काम करते हैं। सभी डिस्पोजल पर डीजी सेट स्थापित किए गए हैं ताकि बिजली की समस्या से पानी निकासी में बाधा न आए। सभी डिस्पोजल पर पानी निकासी की निगरानी की जा रही है। जहां भी दिक्कत आती है उसे तुरंत ठीक किया जाता है।
डीसी साहिल गुप्ता ने नागरिकों से अपील की है कि वे बरसाती पानी की निकासी के नालों में पॉलिथीन या कूड़ा-कचरा न डालें। यह कचरा पानी निकासी में बाधा बन रहा है। बरसाती पानी की अतिशीघ्र निकासी के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं और नियमित रूप से रिपोर्ट ली जा रही है। बारिश के मौसम में निचले क्षेत्रों में पानी ज्यादा समय तक जमा न रहे, इसके लिए भी योजना पर काम किया जा रहा है।