महाभारत केवल एक युद्ध की कथा नहीं, बल्कि धर्म, नीति, मर्यादा और कर्तव्य के बीच संघर्ष का महाग्रंथ है. इस महाकाव्य में कई ऐसे क्षण आते हैं, जब स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी कठिन दुविधा में पड़ जाते हैं. ऐसा ही एक सबसे भावुक और उग्र क्षण वह था, जब श्रीकृष्ण को अपनी प्रतिज्ञा तोड़नी पड़ी और रथ का पहिया उठाकर शत्रु पर प्रहार के लिए आगे बढ़ना पड़ा. यह प्रसंग न केवल महाभारत युद्ध का निर्णायक मोड़ है, बल्कि यह भी बताता है कि धर्म की रक्षा के लिए कभी-कभी नियमों से ऊपर उठना पड़ता है.
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