भारत का शुद्ध टैक्स कलेक्शन ₹6.4 लाख करोड़ पहुंचा, इंफ्रा पर सरकार ने बढ़ाया खर्च

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का शुद्ध टैक्स कलेक्शन बढ़कर ₹6.4 लाख करोड़ हो गया है। जानें अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े।

सरकार के कामकाज और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चालू वित्त वर्ष (FY27) की पहली तिमाही के आंकड़े सामने आए हैं. कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल से जून के बीच देश का टैक्स कलेक्शन काफी मजबूत रहा है. इसके साथ ही सरकार ने विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए अपना खर्च भी बढ़ाया है.

आंकड़ों के मुताबिक, इन तीन महीनों में सरकार का राजकोषीय घाटा 3.1 लाख करोड़ रुपये रहा है. राजकोषीय घाटे का सीधा मतलब ये है कि सरकार ने अपनी मौजूदा कमाई से थोड़ा आगे बढ़कर देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास पर निवेश किया है. पिछले साल इसी दौरान यह आंकड़ा 2.8 लाख करोड़ रुपये था. सबसे अच्छी बात यह है कि यह खर्च सरकार के पूरे साल के तय बजट लक्ष्य का मात्र 18.2 प्रतिशत है.

टैक्स से हुई सरकार की शानदार कमाई

सरकार की आय के मोर्चे पर स्थिति बहुत सकारात्मक है. अप्रैल से जून की अवधि में शुद्ध टैक्स कलेक्शन (Net Tax Receipts) बढ़कर 6.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले साल इसी समय 5.4 लाख करोड़ रुपये था. यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश में व्यापार और आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं. इसके अलावा, बिना टैक्स वाली कमाई (जैसे आरबीआई से मिलने वाला लाभांश और अन्य सरकारी फीस) भी 3.7 लाख करोड़ से बढ़कर 3.8 लाख करोड़ रुपये हो गई है.

इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से हो रहा निवेश

सरकार अपनी इस मजबूत कमाई का इस्तेमाल सीधे तौर पर देश का भविष्य संवारने में कर रही है. पहली तिमाही में सरकार का कुल खर्च 13.6 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल 12.2 लाख करोड़ रुपये था. इसमें सबसे खास बात यह है कि 3.4 लाख करोड़ रुपये सीधे तौर पर पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) यानी नई सड़कों, रेलवे, पुलों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर लगाए गए हैं. पिछले साल यह रकम 2.75 लाख करोड़ रुपये थी. इस भारी निवेश से न सिर्फ देश का ढांचा मजबूत हो रहा है, बल्कि बाजार में रोजगार के नए मौके भी खुल रहे हैं.

पूरी तरह से योजना के मुताबिक है सरकारी हिसाब-किताब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल के बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत (करीब 16.96 लाख करोड़ रुपये) तय किया था. वर्तमान में यह जो 3.1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा सामने आया है, वह इस लक्ष्य के दायरे में है और पूरी तरह से नियंत्रण में है. कुल मिलाकर, मजबूत टैक्स वसूली और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के स्पष्ट फोकस के साथ देश की अर्थव्यवस्था मजबूती से सही दिशा में आगे बढ़ रही है.

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