पिता की हत्या के दर्द को भूलकर धनंजय डी सिल्वा कैसे बने श्रीलंका के सबसे सफल कप्तान
भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से शुरू हो रही WTC टेस्ट सीरीज में धनंजय डी सिल्वा बड़ी चुनौती होंगे। जानिए पिता की हत्या के सदमे से उबरकर कैसे बने सफल कप्तान।
भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से 2 मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज होने जा रहा है. आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के लिहाज से यह सीरीज दोनों ही टीमों के लिए काफी अहम है. इस सीरीज में भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रीलंका के टेस्ट कप्तान धनंजय डी सिल्वा पेश कर सकते हैं. 34 साल के धनंजय न सिर्फ टीम की कप्तानी संभाल रहे हैं, बल्कि वह मौजूदा श्रीलंकाई बल्लेबाजी की सबसे मजबूत रीढ़ भी हैं.
साल 2018 में झेला था पिता की हत्या का दर्द
आज मैदान पर शांत दिखने वाले धनंजय डी सिल्वा के जीवन में एक ऐसा मोड़ भी आया था, जिसने उन्हें अंदर तक हिलाकर रख दिया था. साल 2018 उनके लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था. धनंजय के पिता रंजन डी सिल्वा, जो एक निगम पार्षद थे, उनकी अज्ञात हमलावरों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस पारिवारिक त्रासदी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और श्रीलंका क्रिकेट की सेवा करना जारी रखा.
धनंजय डी सिल्वा पिछले 2 सालों से श्रीलंका की टेस्ट टीम के कप्तान है. इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के लिए 16 टेस्ट मैचों में कप्तानी की है. इसमें से 7 मुकाबलों में उन्हें जीत मिली है और इतने ही मैचों में हार का सामना करना पड़ा है. वहीं, 2 टेस्ट मैच ड्रॉ भी रहे हैं. उनकी कप्तानी में श्रीलंका का विनिंग परसेंटेज 43.75 है, जो पिछले 10 सालों में सबसे बेहतर है, जिन्होंने भी श्रीलंका के लिए 10 से ज्यादा टेस्ट मैचों में कप्तानी है.
10 सालों से श्रीलंकाई टीम के अहम स्तंभ
पिछले एक दशक से इंटरनेशनल क्रिकेट में श्रीलंका के लिए खेल रहे धनंजय डी सिल्वा का टेस्ट रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है. उन्होंने कुल टेस्ट 67 मैच खेले हैं और 39.27 की औसत से 4,320 रन बनाए हैं, जिसमें 13 शतक और 19 अर्धशतक शामिल रहे हैं. भारत के खिलाफ भी उनका रिकॉर्ड अच्छा रहा है. उन्होंने भारत के खिलाफ अब तक खेले गए 4 टेस्ट मैचों में 1 शतक की मदद से 182 रन बनाए हैं. ऐसे में आगामी टेस्ट सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के लिए उनके विकेट की चाबी हासिल करना काफी अहम होगा.