डिंडौरी के 1000 साल पुराने ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की अनोखी कहानी, दर्शन से मिटते हैं सभी कर्ज

मध्य प्रदेश के डिंडौरी में स्थित 1000 साल पुराना ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर अपने अनूठे इतिहास, पश्चिममुखी स्थापत्य कला और कर्ज मुक्ति की मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

सावन के पावन महीने की शुरुआत के साथ ही शिवालयों में ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजने लगे हैं. मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है. मध्य प्रदेश में भगवान शिव के कई अनूठे और ऐतिहासिक मंदिर हैं, लेकिन डिंडौरी जिले में स्थित ऋण मुक्तेश्वर महादेव मंदिर की कहानी बेहद अलग और दिल को छू लेने वाली है. मान्यता है कि इस धाम में श्रद्धा से दर्शन और पूजा-अर्चना करने से इंसान को आर्थिक कर्ज ही नहीं, बल्कि पितृ ऋण, देव ऋण और गुरु ऋण से भी मुक्ति मिल जाती है.

कुत्ते, बंजारा और साहूकार से जुड़ी कहानी

इस मंदिर के नाम और स्थापना के पीछे एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है, जो एक कुत्ते, बंजारा और साहूकार से जुड़ी हुई है. बताया जाता है कि प्राचीन समय में कंचनीपुर वर्तमान कुकर्रामठ गांव में एक लाखा बंजारा नाम का एक व्यापारी रहता था. जब लाखा बंजारे को रुपयों की सख्त जरूरत पड़ी, तो उसने अपने प्यारे और समझदार कुत्ते को एक साहूकार के पास गिरवी रख दिया. कुछ समय बाद साहूकार के घर भीषण चोरी हुई. चोरों ने सारा माल गांव के पास स्थित एक तालाब में छिपा दिया.

वफादार कुत्ता यह सब देख रहा था. सुबह होते ही उसने साहूकार की धोती खींचकर तालाब तक पहुंचाया और छिपाया हुआ पूरा खजाना वापस बरामद करवा दिया. कुत्ते की वफादारी और सूझबूझ से गदगद होकर साहूकार ने बंजारे का पूरा कर्ज माफ कर दिया. इसके बाद साहूकार ने कुत्ते के गले में एक ऋण-मुक्ति पत्र बांधा और उसे मालिक के पास वापस जाने के लिए आजाद कर दिया.

उधर, लाखा बंजारा भी कर्ज की रकम चुकाने साहूकार के पास ही आ रहा था. रास्ते में जब उसने अपने कुत्ते को सामने से आते देखा तो उसे लगा कि कुत्ता साहूकार के घर से भाग आया है. गुस्से में आकर बंजारे ने बिना सोचे-समझे कुत्ते के सिर पर लाठी से वार कर दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. जब बंजारे ने कुत्ते के गले में बंधा साहूकार का पत्र पढ़ा, जिसमें उसकी वफादारी और कर्ज मुक्ति का जिक्र था, तो वह फूट-फूटकर रोने लगा. अपने किए पर भारी पश्चाताप जताते हुए उसने उसी स्थान पर अपने वफादार कुत्ते की याद में एक स्मारक का निर्माण कराया. कुत्ते को स्थानीय भाषा में कुकुर कहा जाता है इसीलिए आगे चलकर इस गांव का नाम कुकर्रामठ पड़ गया.

मंदिर के शिखर को लेकर द्वापर युग से जुड़ी मान्यताएं

मंदिर के अपूर्ण शिखर को लेकर एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रचलित है. कहा जाता है कि द्वापर युग में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में शुरू किया था. पांडव चाहते थे कि सूर्योदय से पहले मंदिर का शिखर और कलश स्थापित हो जाए. हालांकि, भोर होने के कारण गुंबद पर कलश की स्थापना नहीं हो सकी और मंदिर का ऊपरी हिस्सा अधूरा ही रह गया. आज भी मंदिर के ऊपरी भाग में एक समतल प्लेटफॉर्म दिखाई देता है.

पुलिस ने सुरक्षा के किए विशेष इंतजाम

सावन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लग रही हैं. भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन और ASI की टीमों ने पुख्ता इंतजाम किए हैं. कोतवाली थाना प्रभारी और पुलिस बल की ओर से सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रखी गई है ताकि श्रद्धालु सुगमता से भगवान ऋण मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन कर सकें.

Leave A Reply

Your email address will not be published.