अंबाला छावनी फ्री होल्ड पॉलिसी पर भड़के अनिल विज, कैबिनेट मीटिंग में रुकवाया एजेंडा
अंबाला छावनी की नई फ्री होल्ड लैंड पॉलिसी के एजेंडे को कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने रुकवा दिया है। उन्होंने नीति की खामियों और भारी कलेक्टरेट रेट का विरोध किया है।
अंबाला: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने अग्रवाल धर्मशाला में बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. इस दौरान उन्होंने अंबाला छावनी को फ्री होल्ड करने की सरकार की नई पॉलिसी पर चर्चा की. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि “आज बहुत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है. आप के माध्यम से अंबाला की जनता से इसकी बात करना बहुत जरूरी है.”
फ्री होल्ड पॉलिसी का एजेंडा डेफर: ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि “जो लैंड पॉलिसी बनाई गई है. वो गत दिनों कैबिनेट मीटिंग के एजेंडे में आ गई. पहले दिन जो एजेंडा पेश हुआ. उसमें वो दर्ज नहीं थी, मगर दूसरे दिन सुबह जब मीटिंग शुरू हुई, तो एजेंडे में 17 नंबर पर अंबाला छावनी लैंड/फ्री होल्ड पॉलिसी दर्ज थी. अधिकारियों ने मीटिंग में जब ये पॉलिसी पढ़नी शुरू की और इसे पास करने का प्रस्ताव रखा, तो मैंने कहा मुख्यमंत्री जी अंबाला छावनी की लैंड पॉलिसी बनाई जा रही है और मैं अंबाला छावनी का नुमाइंदा हूं, मुझसे एक बार भी इस बारे नहीं पूछा गया. मैं एक बार नहीं, सात बार अंबाला छावनी से विधायक हूं. इस पॉलिसी में क्या है? क्या नहीं है? अंबाला के लोग क्या चाहते हैं? इसपर एक बार भी मुझसे नहीं पूछा गया.”
‘अधिकारियों ने की पॉलिसी पास कराने की कोशिश’: कैबिनेट मंत्री ने बताया कि “मुख्य सचिव ने इस एजेंडे को पास करने को कहा, मगर मैंने इस एजेंडे पर अड़ते हुए एजेंडे को डेफर करने को कहा. मैंने मुख्यमंत्री को कहा कि आप इस मसले पर मीटिंग बुला लो, मीटिंग में मुझे बुला लो और इसमें उन सभी लोगों शामिल करो, जिन्होंने पॉलिसी बनाई, इसके बाद सभी पक्षों को सुना जाए और फिर निर्णय लिया जाए. उस दिन मैंने इस एजेंडे को पास नहीं होने दिया और अधिकारियों के लाख जोर लगाने के बावजूद एजेंडे को डेफर कराया. यदि ये एजेंडा उस मीटिंग में पास हो जाता, तो आज सड़क-सड़क पर अंबाला छावनी के लोग धक्के खा रहे होते जिस प्रकार से ये पॉलिसी बनाई गई है.”
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताए पॉलिसी के मुख्य बिंदु: कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि जो नई पॉलिसी बनाई गई है. उस पर मैंने अपने वकीलों के साथ स्टडी की है. जो बनाई गई है. इस पॉलिसी की मुख्य बात ये है कि उसमें जिस आदमी को जितनी जमीन अलॉट हुई है. उसे कलेक्टरेट पर रजिस्टरी करानी होगी. उदाहरण के तौर पर किसी कि पास हजार गज की जमीन है और 60 हजार कलेक्टरेट रेट है, तो उसे 6 करोड़ रुपये रजिस्टरी के लिए जमा कराने होंगे. चाहे 100 गज, चाहे 200 गज, चाहे 500, चाहे 1000 गज या 2000 हजार गज का मकान है. सबको कलेक्टरेट के हिसाब से पैसे जमा कराने होंगे.
ओरिजनल डाक्यूमेंट को लेकर संसोधन जरूरी: पॉलिसी के मुताबिक जो पैसे जमा नहीं कराएगा. उसका मकान सील करके सरकार उसे अपने कब्जे में लेकर स्वयं बेच देगी. सरकार आगे उस मकान को किसी को भी बेच सकती है. इसके अलावा व्यक्ति को रजिस्टरी कराने के लिए जमीन के ओरिजनल डाक्यूमेंट (मूल दस्तावेज) जमा कराने होंगे. ओरिजनल डाक्यूमेंट डेढ़ सौ साल पहले किसी के परदादे के समय के होंगे, पहले बंटवारे घर के बुजुर्ग जुबानी ही बंटवारा कर देते थे, अब वो कागज कहां से लाए जाएं, जबकि पॉलिसी में लिखा है कि ओरिजनल कागज लाकर देने पड़ेंगे
रजिस्ट्री प्रक्रिया से बढ़ेगी परेशानी: ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि “रजिस्ट्री कराने के लिए 25 प्रतिशत राशि पोर्टल पर आवेदन करते समय ही देनी पड़ेगी. बाजारों में मुझसे लोग ये बहस करते थे कि अंबाला छावनी को फ्री होल्ड कराओ, मैंने तभी कहा था कि लोगों को दिक्कत होगी, जब फ्री होल्ड का चेप्टर खुलेगा. 25 प्रतिशत राशि जमा कराने के एक वर्ष के भीतर सारा पैसा जमा कराना होगा और जो नहीं जमा कराएगा. उसका सारा सामान निकाल बाहर फेंक दिया जाएगा, मकान पर ताला लगा दिया जाएगा, प्रॉपर्टी सरकार की हो जाएगी. इसी तरह जो फ्री होल्ड कराने के लिए पोर्टल पर अप्लाई नहीं करता, तो एक वर्ष बाद उस मकान पर ताला लगाकर उससे मार्केट रेट पर किराया लिया जाएगा. इसके अलावा कब्जा करने वालों से भी पैसा लिया जाएगा. इसके अलावा इस पॉलिसी में बहुत सारे लीगल प्वाइंट हैं.”
‘सरकार के साथ लड़ना पड़ा, तो अनिल विज जनता के साथ’: ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कार्यकर्ताओं से कहा कि “हमारे सामने तीन रास्ते हैं. जिनमें पहला रास्ता है कि हमें उम्मीद है कि आगे होने वाली मीटिंग में हम इस पॉलिसी में जो गलत चीजें हैं, उन्हें रद्द करवा देंगे, क्योंकि हमें अंबाला छावनी का इतिहास शुरू से आखिरी तक पता है.”
‘पॉलिसी को कोर्ट में चैलेंज करना पड़ेगा’: दूसरी बात यदि हमारी बात सरकार नहीं मानती, तो हमें इस पॉलिसी को कोर्ट में चैलेंज करना पड़ेगा, उसके लिए शहर में बड़ी समिति बननी चाहिए जो दिलचस्पी लेकर लड़े और तीसरी जो सबसे खतरनाक बात आपसे कहने जा रहा हूं कि हो सकता है कि हमें सरकार के साथ भी लड़ना पड़े, मैं आज आपको ये विश्वास देने के लिए खड़ा हूं कि अगर अंबाला छावनी की जनता को अपना जायज काम कराने के लिए भी सरकार के साथ लड़ना पड़ा, तो अनिल विज सरकार के साथ नहीं, बल्कि अंबाला छावनी की जनता के साथ होगा. लड़ेंगे, मरेंगे, धरने, जुलुस, जलसे, जो करने होंगे अनिल विज तुम्हारे साथ बैठा होगा.
‘ये पूरे अंबाला की लड़ाई’: ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि ये बहुत बड़ा खतरा है. इसलिए आप सभी को विश्वास में लेना जरूरी है. उन्होंने अंबाला छावनी निवासियों से कहा कि एक बात गांठ बांध लेना कि ये लड़ाई सदर क्षेत्र की नहीं. पूरी अंबाला छावनी की है और सभी को इसमें मिलकर लड़ना पड़ेगा. मुझे भरोसा है कि हम इसे ठीक करा लेंगे.
पूर्व विधायक देवेंद्र बंसल पर निशाना: ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि “पूर्व विधायक देवेंद्र बंसल के बाद से अंबाला छावनी को फ्री होल्ड करो की बात जगह-जगह उठाई जाती रही है. ये बात अदालतों में भी चली गई, कई केसों में जजों ने टिप्पणियां की और अभी एक कब्जे के मामले में हाई कोर्ट के जस्टिस ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिए कि अंबाला छावनी की फ्री होल्ड पॉलिसी को बनाया जाए.”
1063 एकड़ जमीन का मामला: मंत्री अनिल विज ने कहा कि “फ्री होल्ड का मसला है. ये केवल अंबाला छावनी सदर क्षेत्र का है. दूसरा ये सदर क्षेत्र 5 फरवरी 1977 से पहले कैंटोनमेंट का हिस्सा था. यहां नगर पालिका नहीं, बल्कि कैंटोनमेंट बोर्ड था. 5 फरवरी 1977 को जब बंसीलाल रक्षामंत्री थे. उन्होंने 1063 एकड़ जगह कैंटोनमेंट बोर्ड से काटकर नगर पालिका बना दिया और उसकी कुछ शर्ते भी लगाई गई कि भारत सरकार की जो जमीन है. वो हरियाणा सरकार की हो जाएगी. छावनी बोर्ड की प्रॉपर्टी नगर पालिका की हो जाएगी. बशर्ते की हरियाणा सरकार सेना की मर्जी की 150 एकड़ जमीन खरीदकर सेना को निशुल्क देगी.”
रजिस्ट्री में होती है परेशानी: अनिल विज ने कहा कि “5 फरवरी 1977 को ये एक्सीसर एग्रीमेंट हुआ था और सन 2000 तक किसी सरकार ने ये कोशिश नहीं की कि हम 150 एकड़ जमीन सेना को लेकर दें. सन 2000 में जब बंसीलाल मुख्यमंत्री थे. तब मैंनें उन्हें कहकर 150 एकड़ जमीन सेना को लेकर दी, ताकि जो भारत सरकार की जमीन है. वो हरियाणा सरकार की हो जाए और ये हरियाणा सरकार की हुई भी. यहां पर रजिस्ट्रयां कराने, नक्शे पास कराने, पार्टिशन कराने, लोन लेने के लिए लोग बहुत दिक्कत झेलते थे, क्योंकि वहां फ्री होल्ड का मासला डाला गया, जबकि उससे पहले भी रजिस्ट्रियां होती थी और कोई दिक्कत नहीं थी.
‘मलबे की होनी लगी रजिस्ट्री’: मंत्री ने कहा कि “पूर्व विधायक देवेंद्र बंसल के बाद वो रजिस्ट्रियां मलबे की होने लगी. हर रजिस्ट्री पर लिखा है कि जो ढांचा है, इसकी रजिस्ट्री होगी. जमीन की रजिस्ट्री नहीं होगी, क्योंकि जमीन की मालिक तो सरकार है. इसलिए रजिस्टरी होगी तो सिर्फ ढांचे या मलबे की होगी. नतीजतन बैंकों ने लोन देना बंद कर दिया और यहां के एक महापुरूष ने अंबाला की किसी प्रॉपर्टी को बैंक के नाम गिरवी रखकर बैंक से बहुत बड़ा लोन ले लिया और लोन चुकाया नहीं. जब लोन नहीं चुकाया, तो बैंक उसकी बिल्डिंग की कुर्की करने आया.”
सिर्फ ढांचे की रजिस्ट्री, जमीन की नहीं: जब बैंक कुर्की करने आया, तो देखा कि वहां बिल्डिंग नहीं, केवल खाली जमीन थी. जब बैंक जमीन की कुर्की करने लगा, तो सरकार ने कहा कि जमीन तो हमारी है व्यक्ति की नहीं है. इससे अधिकारियों में बड़ा भय ला दिया. जिसके बाद ये लिखना ही बंद कर दिया. अब जितने भी अर्जी नवीस (डीड राइटर) हैं. वो यहीं लिखते हैं कि जो ढांचा है. इसकी रजिस्ट्री की गई है. इसकी वजह से बैंक लोन नहीं देते, नक्शा पास नहीं होता, प्रॉपर्टी का विभाजन नहीं होता. अब जब हाई कोर्ट ने ये आदेश दिया कि अंबाला छावनी की लैंड पॉलिसी बनाई जाए, तो मुख्य सचिव ने इसमें हामी भरी कि हम ये पॉलिसी बना लेंगे. इसके बाद अब हरियाणा सरकार ने लैंड पॉलिसी बना ली.