कुत्तों पर अत्याचार का विरोध करने वाले लॉ स्टूडेंट पर थर्ड डिग्री का मामला, आरोपी को अग्रिम जमानत
कुत्तों से क्रूरता का विरोध करने पर लॉ स्टूडेंट से मारपीट और टॉर्चर करने के आरोपी को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली। पढ़ें पूरा मामला।
चंडीगढ़ : कुत्तों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार का विरोध करना एक कानून छात्र को भारी पड़ गया। विरोध से नाराज होकर छात्र को कथित तौर पर जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले जाने, मारपीट करने, कपड़े उतरवाने और गर्म रॉड पर पेशाब करने के लिए मजबूर करने के मामले में आरोपित को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है।
जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपित जांच में शामिल हो चुका है और फिलहाल उसकी हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
कुत्तों को पीटने का वीडियो देखने के बाद हुआ विवाद
मामले के अनुसार, 31 मार्च को कानून छात्र ने एक वीडियो देखा था, जिसमें एक व्यक्ति कथित तौर पर कुत्तों को पीट रहा था। छात्र ने इस व्यवहार का विरोध करते हुए आरोपित से कुत्तों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करने की अपील की। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। छात्र का आरोप है कि उसकी आपत्ति से नाराज आरोपित और उसके साथियों ने उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाया और आटो मार्केट की ओर ले गए। वहां उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।
गर्म रॉड पर पेशाब कराने का गंभीर आरोप
शिकायत में छात्र ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने उसके कपड़े उतरवाए और उसे अपमानित किया। इतना ही नहीं, उसे गर्म हीटिंग रॉड पर पेशाब करने के लिए मजबूर किया गया। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर उसे करंट लगाने और जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में 50 हजार रुपये की कथित मांग और गूगल-पे के माध्यम से एक हजार रुपये ट्रांसफर कराने का आरोप भी लगाया गया।
एक अप्रैल को थाने पहुंचा छात्र
घटना के अगले दिन, एक अप्रैल को छात्र ने फतेहाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के दौरान कुछ धाराओं को मामले से हटा दिया गया। आरोपित ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी।
जांच में शामिल होने को माना राहत का आधार
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि आवेदक जांच में शामिल हो चुका है और जांच में सहयोग कर रहा है। अदालत ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में आरोपित को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने आदेश में कहा कि आवेदक ने जांच में सहयोग किया है, इसलिए उसकी याचिका स्वीकार की जाती है और उसे अग्रिम जमानत प्रदान की जाती है।
आदेश के उल्लंघन पर छात्र के लिए कानूनी रास्ता खुला
हाई कोर्ट ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपित अदालत के आदेश या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करता है तो पीड़ित छात्र कानून के तहत उपलब्ध उचित उपाय का सहारा ले सकता है। इस तरह अदालत ने एक ओर आरोपित को गिरफ्तारी से राहत दी, वहीं दूसरी ओर छात्र के कानूनी अधिकारों को भी सुरक्षित रखा है।