सैदुलाजाब हादसा मामले में साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, मकान मालिक और बिल्डर्स पर कसता शिकंजा
सैदुलाजाब इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। 3 आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या का केस।
दिल्ली के सैदुलाजाब क्षेत्र में इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। पुलिस ने आरोपी भवन मालिक कर्मवीर सिंह, बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश गुप्ता के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, मरम्मत या निर्माण के दौरान लापरवाही, लापरवाही से किसी की जान या सुरक्षा को खतरे में डालने और गंभीर चोट पहुंचाने समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। मामले में अगली कार्रवाई और आरोपपत्र पर सुनवाई के लिए इसे संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत के समक्ष 22 अगस्त को पेश किया जाएगा।
मेट्रो के पास गली नंबर पांच में हुआ था हादसा
यह हादसा 30 मई को हुआ था। इसमें छह लोगों की मृत्यु हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस की महरौली थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक ढही हुई इमारत सैदुलाजाब की गली नंबर पांच में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास स्थित थी। पुलिस के मुताबिक हादसे के समय इस इमारत में कई कार्यालय और एक कैफे भी चल रहा था। इमारत के पास एक महिला किचन चलाती थी। हादसे के समय किचन में कुछ लोग रात का खाना खाने के लिए मौजूद थे और वहां कर्मचारी भी मौजूद थे।
गश्त के दौरान पुलिस को मिली थी सूचना
प्राथमिकी के मुताबिक, 30 मई की शाम करीब साढ़े सात बजे सैदुलाजाब इलाके में नियमित गश्त कर रहे महरौली थाने के बीट स्टाफ को इमारत ढहने की जानकारी मिली। पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और अतिरिक्त बल को सूचना दी। इसके बाद शाम सात बजकर 38 मिनट पर पहली पीसीआर कॉल दर्ज की गई। पुलिस के मुताबिक स्थानीय पुलिस टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। शुरुआत में मलबे में फंसे छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके साथ ही सभी आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों को भी एक साथ अलर्ट किया गया। हादसे में इमारत के मलबे के नीचे कई लोग दब गए थे। इनमें से कुछ लोगों को बचा लिया गया, जबकि हादसे में कुल छह लोगों की मौत हुई।
बीएनएस की धाराओं के तहत लगाए आरोप
1- धारा 105- गैर-इरादतन हत्या
2- धारा 290-इमारत या निर्माण को गिराने या नया बनाने के दौरान खतरनाक लापरवाही
3- धारा 125(ए)-किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा को खतरे में डालना
4- धारा 125 (बी)-लापरवाही से ऐसे कार्यों से संबंधित जिसके कारण गंभीर चोट लगे
5- धारा 3(5)- साझा मंशा
निगम की लापरवाही से गिरी थी इमारत
इमारत गिरने को लेकर हुई मजिस्ट्रेट जांच में नगर निगम की लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया कि नगर निगम ने अवैध निर्माण को लेकर की गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ। इतना ही नहीं हादसे के बाद जांच को गुमराह करने के लिए रिकॉर्ड में भी हेरफेर किए जाने का खुलासा इस रिपोर्ट में किया गया। यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को सौंप दी गई थी। इस मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। डीएम की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि यदि नगर निगम समय पर कार्रवाई करता तो हादसे को रोका जा सकता था। इमारत का गिरना मुख्य रूप से बिना इजाजत इमारत के ढांचे में किए गए बदलावों और नियमों को ठीक से लागू नहीं करने का नतीजा था।