10 किमी सड़क पर हाथियों का कब्जा, लोगों के लिए खतरे का कारण

जशपुर जिले के ग्रामीणों में इन दिनों हाथियों का खौफ है.

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इन दिनों हाथियों का खौफ है. वन विभाग ने हाथियों के खौफ को देखते हुए पातेबहाल से जामटोली चौक तक 10 किमी रास्तों को बैरियर लगाकर बंद कर दिया है. पिछले दिनों दो ग्रामीण इस सड़क से जा रहे थे. अचानक से हाथियों का झुंड आ गया, जिसे देकर डर के मारे दोनों युवक बाइक छोड़कर भाग गए थे, जिन्हें हाथियों ने दौड़ा लिया था. इसके बाद स्थानीय लोगों में हाथियों को लेकर दहशत है.

हाथियों के झुंड को देखते हुए राज्य वन विभाग ने तपकारा वन रेंज में गाड़ियों की आवाजाही बंद कर दी है. यह 10 किलोमीटर का रास्ता सतपुरिया जंगल से गुजरता है. हाथियों के झुंड की लगातार आवाजाही की वजह से जशपुर के जंगल के गांव और हाईवे चिंता का क्षेत्र बन गए हैं. पटेबहाल के रहने वाले बबलू नागवंशी और राजकुमार नागवंशी अपने परिवारों के साथ सतपुरिया सड़क से शोक पत्र बांटने जा रहे थे. तभी अचानक हाथियों का झुंड सामने आ गया. जैसे ही झुंड उनके पीछे भागा, बबलू खुद को बचाने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया, जबकि राजकुमार मुड़कर गांव की तरफ भाग गया.

वन विभाग की टीम ने निकाला सुरक्षित

गार्ड नंदकुमार यादव के नेतृत्व में वन बचाव टीम मौके पर पहुंची और सावधानी से ऑपरेशन करके उसे सुरक्षित नीचे उतारा. पिछले बीस दिनों से इलाके में हाथियों का एक बड़ा झुंड घूम रहा और कई बार बाल-बाल बचने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद वन विभाग को चार-सूत्री रणनीति लागू करनी पड़ी. करीब 37 हाथियों के झुंड ने जशपुर के जंगलों में डेरा जमाया है.

पिछले साल हुई थी कई घटनाएं

जिला वन अधिकारी ने बताया कि रास्ता बंद करना एक अस्थायी और बचाव का इंतजाम है जो मुख्य रूप से गांव के रास्तों पर किया जा रहा है, जिन्हें आसानी से डायवर्ट किया जा सकता है. जब हाथी दूसरी जगह चले जाते हैं तो बैरियर हटा दिया जाता है. यह चार-सूत्री रणनीति जशपुर में असरदार रही है, क्योंकि पिछले सालों की तुलना में 2025 में जिले में इंसान-हाथी संघर्ष की सबसे कम घटनाएं दर्ज की गई हैं.

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