हिसार के निशांत मेहता ने रचा इतिहास, 4000 किमी साइकिल चलाकर जीता नॉर्थकेप-4000
हिसार के निशांत मेहता ने 4000 किमी लंबी नॉर्थकेप-4000 साइकिलिंग चुनौती पूरी कर नया इतिहास रचा है। वह ऐसा करने वाले हरियाणा के पहले साइकिलिस्ट बने।
हिसार: जुनून, हौसले और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर हिसार के साइकिलिस्ट निशांत मेहता ने दुनिया की कठिन लंबी दूरी की साइकिलिंग चुनौतियों में शामिल नॉर्थकेप-4000 को सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया. करीब 4000 किलोमीटर लंबी यह यात्रा इटली के रोवेरटो से शुरू हुई और नॉर्वे के उत्तरी छोर नॉर्थ केप पर जाकर पूरी हुई. इस उपलब्धि के साथ निशांत हरियाणा से नॉर्थकेप-4000 पूरा करने वाले पहले साइकिलिस्ट बन गए हैं.
आठ देशों को साइकिल से किया पार: निशांत ने इस अभियान के दौरान इटली से सफर शुरू कर ऑस्ट्रिया, जर्मनी, चेक गणराज्य, पोलैंड, स्वीडन, फिनलैंड और नॉर्वे को पार किया. यानी हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए उन्होंने आठ देशों की सीमाएं साइकिल से पार कीं. वर्ष 2026 के आधिकारिक प्रतिभागी रिकॉर्ड में भी उनका नाम भारत के प्रतिभागियों में दर्ज है. भारत से इस चुनौती के लिए आठ लोग निकले थे, जिनमें छह प्रतिभागी इसे पूरा कर सके.
चढ़ाई ने बढ़ाई चुनौती: नॉर्थकेप-4000 की कठिनाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 4000 किलोमीटर के दौरान निशांत ने लगभग 28,800 मीटर की कुल चढ़ाई पूरी की. यह समुद्र तल से माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई के तीन गुना से भी अधिक है. इस लिहाज से उनकी कुल चढ़ाई करीब 3.25 एवरेस्ट के बराबर रही.
बारिश, बर्फीली ठंड और तेज हवाओं से मुकाबला: यह अभियान सामान्य साइकिल यात्रा नहीं थी. पूरे रास्ते निशांत को मूसलाधार बारिश, आर्कटिक क्षेत्र की जमा देने वाली ठंड, तेज हवाओं और लंबी चढ़ाइयों का सामना करना पड़ा. कई मौकों पर मौसम इतना चुनौतीपूर्ण रहा कि शरीर को गर्म रखना, सामान सुरक्षित रखना और साइकिल पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो गया. इसके बावजूद उन्होंने लगातार आगे बढ़ते हुए नॉर्थ केप तक पहुंचने का लक्ष्य हासिल किया.
46 साल की उम्र में युवाओं के लिए बने प्रेरणा : निशांत मेहता ने यह कठिन चुनौती 46 वर्ष की उम्र में पूरी की. वह लंबे समय से लंबी दूरी की साइकिलिंग से जुड़े हुए हैं. उन्होंने 1200 किलोमीटर की पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस चुनौती समेत कई कठिन साइकिलिंग अभियानों को पूरा किया है. इसके अलावा वह लगातार दस बार सुपर रैंडोन्यूर की उपलब्धि भी हासिल कर चुके हैं. नॉर्थकेप-4000 की सफलता उनके साइकिलिंग सफर का एक और ऐतिहासिक अध्याय बन गई.
हिसार लौटने पर हुआ जोरदार स्वागत : नॉर्थकेप-4000 पूरा करने के बाद हिसार लौटे निशांत मेहता का हिसार रोडीज क्लब के साइकिलिस्टों और शहरवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया. साथियों ने फूल-मालाएं पहनाकर, केक काटकर और ढोल की थाप पर उनका अभिनंदन किया. इस उपलब्धि को हिसार और पूरे हरियाणा के लिए गौरव का क्षण बताया गया.
निशांत मेहता ने साझा किया अनुभव: निशांत मेहता ने अपनी उपलब्धि को लेकर कहा कि, “यह सिर्फ 4000 किलोमीटर की यात्रा नहीं, बल्कि 4000 बार खुद को चुनौती देने का सफर था. इस अभियान ने उन्हें शारीरिक से कहीं अधिक मानसिक रूप से चुनौती दी. कई बार मौसम, थकान और कठिन परिस्थितियों के कारण आगे बढ़ना मुश्किल लगा, लेकिन लक्ष्य हमेशा आंखों के सामने रहा.”
“रास्ता लंबा हो तो भी लगातार आगे बढ़ते रहें”: निशांत ने आगे कहा कि, “साइकिल हमें सिखाती है कि रास्ता कितना भी लंबा और कठिन क्यों न हो, यदि हम लगातार आगे बढ़ते रहें तो मंजिल जरूर मिलती है.”
बता दें कि निशांत की यह उपलब्धि केवल साइकिलिंग जगत के लिए गौरव की बात नहीं है, बल्कि हिसार और हरियाणा के युवाओं के लिए भी प्रेरणा है. उन्होंने साबित किया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए उम्र से ज्यादा जरूरी जुनून, अनुशासन और लगातार प्रयास है.