सिरसा में 6 दिन से जारी किसानों का धरना खत्म, टंकी से उतरे किसान, ADC कमेटी करेगी मुआवजे की जांच
सिरसा के वैदवाला में बिजली टावर के मुआवजे को लेकर चल रहा धरना समाप्त। ADC की अध्यक्षता में बनी कमेटी 10 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।
सिरसा: सिरसा के गांव वैदवाला में बिजली टावर के मुआवजे को लेकर पिछले छह दिन से चल रहा किसानों का धरना बुधवार को प्रशासन के आश्वासन के बाद खत्म हो गया. जलघर की टंकी पर चढ़े खेत मालिक भूपेंद्र सिंह और किसान वेदप्रकाश को प्रशासन ने समझाकर नीचे उतार लिया. डीसी शांतनु शर्मा ने दोनों किसानों को पानी पिलाकर धरना समाप्त करवाया.
कमेटी करेगी मुआवजे का दोबारा मूल्यांकन: प्रशासन और किसानों के बीच हुई सहमति के अनुसार एडीसी अर्पित संगल की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी. कमेटी में तीन किसान प्रतिनिधियों के साथ बिजली निगम के अधिकारी शामिल होंगे. यह कमेटी टावरों के लिए अधिग्रहित जमीन और मुआवजे का दोबारा मूल्यांकन कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट देगी.
CM से मुलाकात का आश्वासन: प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाया कि पुनर्मूल्यांकन के बाद उनकी मांगों को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने रखा जाएगा. किसानों की जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाने की बात भी कही गई है. इसी आश्वासन के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन समाप्त करने पर सहमति जताई.
चढ़ूनी ने टंकी से किसानों को उतारा: किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी मौके पर मौजूद रहे. प्रशासन से बातचीत के बाद चढ़ूनी ने टंकी पर चढ़े दोनों किसानों को नीचे उतरने के लिए कहा. किसानों के नीचे आने के बाद चढ़ूनी ने उन्हें सिरोपा पहनाकर सम्मानित किया. इस दौरान धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने भी सहमति का स्वागत किया.
“मजबूती और संघर्ष से चला आंदोलन”: इस दौरान गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि, “किसानों का यह धरना मजबूती और संघर्ष के साथ चला है. अब एडीसी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें तीन किसान प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे. कमेटी 10 दिन में टावरों की कीमत का पुनर्मूल्यांकन कर रिपोर्ट देगी.रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. प्रशासन से बातचीत के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया है. किसानों की मांगों के समाधान के लिए कमेटी में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई है.”
पुलिस कार्रवाई नहीं होगी: बातचीत के दौरान किसानों की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई गई. इस पर एसपी दीपक सहारण ने किसानों को भरोसा दिया कि आंदोलन को लेकर उनके खिलाफ किसी तरह का केस दर्ज नहीं किया जाएगा. प्रशासन के इस आश्वासन से भी किसानों का रुख नरम हुआ.
टावर उखाड़ने का था ऐलान: दरअसल, मुआवजे के मुद्दे का समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों और धरनारत किसानों ने बुधवार दोपहर दो बजे खेतों में लगे बिजली टावरों की ओर कूच करने और लाइन उखाड़ने का ऐलान किया था. सुबह से ही किसान और ग्रामीण गांव में जुटने लगे थे. स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी.
गांव में भारी पुलिस बल तैनात: किसानों के ऐलान के बाद भारी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी वैदवाला पहुंचे. टावरों के आसपास पुलिस की तैनाती की गई. अधिकारी लगातार किसानों से संपर्क में रहे और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकने के प्रयास किए गए. इसके बाद प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत का रास्ता खुला. इससे एक दिन पहले मंगलवार को किसान प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच दिनभर बातचीत चली थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था. किसान कमेटी की मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात की मांग कर रही थी. देर शाम तक स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलने पर किसानों ने टावरों की लाइन उखाड़ने का अल्टीमेटम बरकरार रखा था.
छह दिन से टंकी पर डटे थे किसान: वैदवाला में खेत मालिक भूपेंद्र सिंह और किसान वेदप्रकाश पिछले छह दिनों से जलघर की टंकी पर चढ़े हुए थे. किसानों का कहना था कि बिजली टावरों के लिए अधिकृत जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिला है. दोनों किसानों को नीचे उतारने के लिए प्रशासन पहले भी प्रयास कर चुका था.
जाल लगाने पहुंची थी प्रशासन की टीम: प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ सोमवार शाम धरनास्थल पर पहुंची थी. टीम ने टंकी के आसपास सुरक्षा जाल लगाने का प्रयास किया था. किसानों ने आरोप लगाया था कि प्रशासन दोनों किसानों को जबरन नीचे उतारने की कोशिश कर रहा है. हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया कि टीम का उद्देश्य केवल सुरक्षा के लिए जाल लगाना था और किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की गई.
किसान संगठनों ने दिया समर्थन: प्रशासन की कार्रवाई की सूचना के बाद विभिन्न किसान संगठन भी वैदवाला पहुंचने लगे थे. किसान नेताओं ने आंदोलन को समर्थन दिया. गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व में भी किसान नेताओं की बैठक हुई. इसके बाद प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव और बढ़ गया.
प्रशासन ने निकाला समाधान: बुधवार को डीसी शांतनु शर्मा, एडीसी अर्पित संगल और एसपी दीपक सहारण समेत जिला प्रशासन के अधिकारी धरनास्थल पर पहुंचे. अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों के साथ लंबी बातचीत की. आखिरकार पुनर्मूल्यांकन के लिए कमेटी गठन, 10 दिन में रिपोर्ट और मुख्यमंत्री से मुलाकात के आश्वासन पर सहमति बनी और छह दिन से चल रहा आंदोलन शांतिपूर्वक समाप्त हो गया.