भोटेकोशी नदी में उफान से कई गांव बहे, भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही। 160 से अधिक लोगों की मौत, 133 भारतीयों समेत सैकड़ों विदेशी पर्यटक लापता।

नेपाल में कल बुधवार की सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है और अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, साथ ही बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी बाढ़ की चपेट में आने से लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ की वजह से 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड समेत कई देशों के भी नागरिक लापता हैं. तबाही इस कदर रही कि घर, सड़क और पुल सब बह गए.

तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. नेपाल के टूरिस्ट बोर्ड के मुताबिक, बाढ़ से लापता पर्यटकों में भारत के 100 से अधिक, अमेरिका के 54, ऑस्ट्रेलिया के 34 और इंग्लैंड के 33 लोग शामिल हैं; साथ ही नेपाल के भी 100 से अधिक लोग लापता हैं. पुलिस बुलेटिन के अनुसार आज गुरुवार सुबह 5 बजे तक, 8 जिलों में 162 शव बरामद किए गए हैं.

बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक हताहत

जिस इलाके में यह प्राकृतिक आपदा आई है वह तीर्थयात्रियों और ट्रेकर्स के बीच काफी लोकप्रिय है. ऐसे में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों के हताहत होने की संभावना है. चीन के सरकारी मीडिया ने तिब्बत में, 3 लोगों के मारे जाने और 265 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है. तिब्बत से आए कई CCTV फुटेज में पानी और कीचड़ की एक लहर को बॉर्डर क्रॉसिंग पर बनी इमारतों से टकराते हुए देखा जा सकता है.

साथ ही नेपाल के दर्जनों पुलिस अधिकारी और सेना के जवान भी लापता बताए जा रहे हैं. लापता होने वालों में बिजली विभाग के भी कई कर्मचारी भी शामिल हैं. कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं भी क्षतिग्रस्त हो गईं.

आपदा में घर, सड़क और पुल सब बह गए

नेपाली अधिकारियों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें लगा कि बाढ़ आने से पहले भूकंप आया होगा, लेकिन US जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि “भूकंप जैसी ऊर्जा असल में लैंडस्लाइड की वजह से पैदा हुई थी.”

तिब्बत बॉर्डर के पास नेपाल में आई जबरदस्त बाढ़ और लैंडस्लाइड की वजह से कई गांव पानी में बह गए हैं. इन आपदा को आए 24 घंटे हो चुके हैं. अधिकारियों के अनुसार, अब तक 160 लोगों से अधिक लोगों की मौत हो गई है और विदेशी पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं.

नेपाल में खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है, और आपदा में मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका है. हवाई तस्वीरों में नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी के पास घरों, सड़कों और पुलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है.

भारत ने जारी की हेल्पलाइन नंबर

आपदा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष पीएम शाह से फोन पर बात की और उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया. नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है.

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए. X पर अपने एक पोस्ट में बताया कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं. भारतीय दूतावास ने भी कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है.

NRI और मानसरोवर यात्रा पर गए यात्री भी लापता

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है. बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है.

अधिकारियों का कहना है कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं. कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी लापता लोगों में शामिल हैं. गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे.

काठमांडू में भारतीय दूतावास और तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने प्रभावित भारतीयों और उनके परिवारों के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं.

सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के मुताबिक, पीड़ित भारतीयों में से कम से कम 59 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री थे. प्रभावित भारतीयों के बारे में अभी बहुत कम जानकारी मिल पाई है क्योंकि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था बाधित हो गई है.

तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जबकि बाकी 20 पर्यटकों के बारे में जानकारी मिल गई है. बताया जा रहा है कि ये पर्यटक हिमालय में स्थित एक मंदिर जा रहे थे. वहीं कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के कई लोगों का पता नहीं चल पा रहा है, जिनमें कोलकाता का कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों का एक समूह भी शामिल है.

देश सदमे में और दुखीः नेपाली प्रधानमंत्री शाह

आपदा को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि पूरा देश “सदमे में है और बहुत दुखी है”. कुछ बचे हुए लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को बाढ़ में बहते हुए देखा.

अचानक आई बाढ़ से प्रभावित इलाकों में अब तक करीब आठ टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है. भारत समेत अमेरिका, चीन और यूरोपीय संघ के अलावा कई अन्य देशों ने राहत सामग्री भेजी है या फिर मदद का वादा किया है.

हादसे के बाद विशेषज्ञ अब घटनाओं के पीछे के क्रम को समझने की कोशिश में लगे हैं. यह तो पता है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से हिमालय के कुछ हिस्सों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घटना में इसकी भूमिका के बारे में अभी कुछ भी पक्के तौर पर कहना जल्दबाजी होगी.

ऑस्ट्रेलिया-यूक्रेन समेत कई देशों के पर्यटक लापता

नेपाल में आई विपदा से दुनिया के कई देश भी प्रभावित हुए हैं. ऑस्ट्रेलिया के भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने पुष्टि की है कि लापता लोगों में 34 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक भी शामिल हैं.

इस बीच, न्यूज़ीलैंड के विदेश मामलों और व्यापार मंत्रालय की ओर से बताया गया कि उसे इस इलाके में मौजूद न्यूजीलैंड के “कुछ” नागरिकों (कीवी) के बारे में जानकारी है और वह उनके परिवारों के संपर्क में है. लेकिन मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया है कि अभी तक इस बारे में कोई “आधिकारिक या पुष्टि की गई जानकारी” नहीं है कि कौन-कौन प्रभावित हुआ है.

मंत्रालय ने आगे बताया, “भारत में न्यूजीलैंड का हाई कमीशन भी नेपाल के अधिकारियों से तुरंत जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है.”

8 ट्रकों में 8 टन राहत सामग्री भेजी गई

स्थानीय अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर, यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के कारण यूक्रेन के 53 नागरिक अभी लापता हैं.

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है जिससे पता चले कि लापता नागरिकों में से कोई मृत या घायल है, और उन्हें लापता लोगों के रिश्तेदारों से संदेश मिल रहे हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री शाह के ऑफिस ने बताया है कि रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में करीब 8 टन राहत सामग्री भेजी गई है. सचिवालय का कहना है कि यह सामग्री बुधवार शाम को नेपाल सेना के 8 ट्रकों के जरिए भेजी गई. इसमें 500 मच्छरदानी, 500 कंबल, 500 सोलर लाइट, 500 सोलर पैनल और 220 स्लीपिंग बैग जैसी चीजें शामिल हैं.

बाढ़ की चपेट में 200 किलोमीटर के इलाके

नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया. उसके 3 मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी. नेपाली अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए.

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई. फिर बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया. और राजधानी काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया.

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