पीएम मोदी पर टिप्पणी मामले में राहुल गांधी को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीएम मोदी पर टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी की याचिका खारिज की। निचली अदालत में केस चलेगा।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है. कोर्ट ने आज मंगलवार को सुनवाई करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर ‘कमांडर-इन-थीफ’ और ‘चोरों का सरदार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि की शिकायत को रद्द करने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया है.

कांग्रेस नेता की ओर से इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी समन के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. चुनौती देते हुए राहुल का तर्क था कि यह शिकायत सुनवाई योग्य ही नहीं है, क्योंकि अपने भाषण के दौरान उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था. और न ही किसी पहचाने जा सकने वाले या किसी खास वर्ग का नाम नहीं लिया था.

हालांकि हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता की इस दलील को नहीं स्वीकार किया और कहा कि बीजेपी राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है. राहुल ने 2018 राजस्थान में एक रैली के दौरान पीएम पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की थी.

बीजेपी कार्यकर्ता ने दर्ज कराई थी शिकायत

राहुल गांधी के भाषण के खिलाफ यह शिकायत भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक कार्यकर्ता महेश श्रीश्रिमल की ओर से दर्ज कराई गई थी, जिसमें दावा किया गया कि कांग्रेस नेता के इन बयानों से न केवल प्रधानमंत्री बल्कि पूरी भारतीय जनता पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की छवि धूमिल हुई है.

बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राहुल के खिलाफ निचली अदालत में चल रही मानहानि की आपराधिक कार्रवाई जारी रहेगी.

भिवंडी में भी RSS से जुड़ा मानहानि का केस

कांग्रेस नेता के लिए महाराष्ट्र में कानूनी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई. राज्य के ठाणे जिले स्थित भिवंडी कोर्ट में भी उनके खिलाफ एक और आपराधिक मानहानि का मामला चल रहा है. यह केस आरएसएस के एक स्थानीय कार्यकर्ता राजेश कुंटे की ओर से दर्ज कराया था.

इससे पहले राहुल गांधी के खिलाफ साल 2014 के चुनावी भाषण के दौरान यह आरोप लगाने का दावा है कि “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या में आरएसएस का हाथ था.” शिकायतकर्ता का कहना है कि इस बयान से आरएसएस संगठन की साख को भारी ठेस पहुंची है. इस मामले में भिवंडी की अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया लगातार जारी है. बॉम्बे हाई कोर्ट और भिवंडी कोर्ट के इन मामलों ने कांग्रेस नेता की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों को एक बार फिर बढ़ा दिया है.

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