मन्त्री रेखा आर्य से जुड़े हाईप्रोफाइल केस में कल्पना मिश्रा को मिली जमानत
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े केस में कल्पना मिश्रा को ADJ कोर्ट ने 50 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी है।
देहरादून/बरेली। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर दर्ज हाईप्रोफाइल मुकदमे में जेल भेजी गईं कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को अदालत से राहत मिल गई है। एडीजे-8 (ADJ-8) अशोक कुमार यादव की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कल्पना को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश जारी किया।
यह मामला बेहद हाईप्रोफाइल और प्रदेश भर में चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू (पप्पू गिरधारी) का नाम शामिल है। मंत्री ने कल्पना पर अपने नाम, पद और पति के नाम-पते का अनधिकृत इस्तेमाल करने के साथ-साथ चोरी, जालसाजी और अवैध धन उगाही जैसे कई गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी। कल्पना को 14 जुलाई को जेल भेजा गया था, जबकि कल्पना ने खुद को राजनीतिक व व्यक्तिगत रंजिश के तहत फंसाए जाने का दावा किया है।
🚨 मंत्री ने लगाए जालसाजी, नीली-लाल बत्ती के दुरुपयोग और चोरी के गंभीर आरोप
मंत्री रेखा आर्य की ओर से दायर शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कल्पना मिश्रा ने अपने पहचान पत्र और पासपोर्ट सहित कई व्यक्तिगत दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम और बरेली स्थित आवास का पता दर्ज कराया था। मंत्री का आरोप था कि कल्पना ने उनके पति के नाम और पते का गलत इस्तेमाल किया।
इसके अलावा आरोप है कि कल्पना मंत्री के नाम और पद का रौब दिखाकर लोगों पर प्रभाव जमाती थीं और इसके जरिए कथित तौर पर धन उगाही करती थीं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि कल्पना जिस हुंडई क्रेटा कार का उपयोग करती थीं, उस पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगी हुई थी। मंत्री ने कल्पना और उनके कथित मौसा डॉ. आरसी पांडेय की संदिग्ध गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।
💰 7 लाख रुपये और सोने की रुद्राक्ष माला चोरी का मुकदमा, 14 जुलाई से जेल में थीं बंद
इसके साथ ही मामले में मंत्री ने अपने बरेली स्थित आवास से सात लाख रुपये की नकदी और सोने से जड़ी रुद्राक्ष की कीमती माला चोरी होने का भी आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर बरेली के बारादरी थाने में 9 सितंबर 2024 को तत्कालीन आईजी डॉ. राकेश सिंह के आदेश पर मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, शुरुआती जांच में इस मुकदमे में खात्मा रिपोर्ट (FR) लगा दी गई थी, लेकिन बाद में मामले में दोबारा पैरवी हुई और विवेचना आगे बढ़ाई गई। कल्पना मिश्रा को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था, जिसके बाद उन्होंने जमानत के लिए याचिका दायर की थी।
⚖️ बचाव पक्ष की दलील: ’25 हजार रुपये की नौकरी पर रखा था मैनेजर, शोषण के बाद फंसाया’
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कल्पना मिश्रा के अधिवक्ता लवलेश पाठक ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गिरधारी लाल साहू ने कल्पना को अपने व्यवसाय में 25 हजार रुपये प्रति माह के वेतन पर बतौर मैनेजर नियुक्त किया था। इसके प्रमाण स्वरूप 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध पत्र भी कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
बचाव पक्ष ने गंभीर आरोप लगाया कि सेवा के दौरान कल्पना का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण किया गया तथा उनकी निजी जमा पूंजी भी हड़प ली गई। जब कल्पना ने इस शोषण की शिकायत करने की बात कही, तो मंत्री पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर उन्हें इस झूठे मुकदमे में उलझा दिया गया।
🚫 अभियोजन पक्ष ने किया जमानत का विरोध, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की जताई आशंका
दूसरी ओर, मंत्री पक्ष की ओर से जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया गया। अभियोजन ने तर्क दिया कि कल्पना ने तीन अलग-अलग बैनामों में रेखा आर्य के बरेली वाले मकान का पता इस्तेमाल किया था। इन विलेखों में 10.50 लाख, 12 लाख और 19 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का दावा किया गया। अभियोजन पक्ष ने आशंका व्यक्त की कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो वह साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकती है।
⚖️ कोर्ट ने केस डायरी और दस्तावेजों के आधार पर दी जमानत, शर्तों का पालन अनिवार्य
अदालत ने केस डायरी और दोनों पक्षों के तर्कों का सूक्ष्मता से अध्ययन किया। कोर्ट के समक्ष कल्पना के मंत्री के पति की कंपनी में मैनेजर होने से जुड़ा पंजीकृत अनुबंध भी प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने टिप्पणी की कि आवासीय पते से जुड़े दस्तावेजों में परिवर्तन संभव है और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण प्रपत्रों में पुलिस सत्यापन की तय प्रक्रिया होती है। उपलब्ध रिकॉर्ड में दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला कोई स्पष्ट आधार नहीं मिला।
कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारणीय है और कल्पना की पूर्व दोषसिद्धि की कोई आपराधिक रिपोर्ट दर्ज नहीं है। इन परिस्थितियों पर विचार करते हुए अदालत ने जमानत स्वीकार कर ली। साथ ही निर्देश दिए कि कल्पना को न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करना होगा और साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित न करने की शर्तों का पालन करना होगा।
👤 Bareilly Politics: चर्चाओं में रहे हैं गिरधारी लाल साहू (पप्पू गिरधारी)
उल्लेखनीय है कि गिरधारी लाल साहू उर्फ गिरधारी पप्पू का नाम बरेली के बहुचर्चित जैन हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है, जिसमें वे आरोपी रहे हैं। उन पर अदालत से केस की फाइल गायब कराने का भी आरोप लगा था, जिसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर जैन हत्याकांड की फाइल पुनर्गठित की गई थी।
बरेली की स्थानीय राजनीति और सामाजिक हलकों में गिरधारी पप्पू लंबे समय से विभिन्न कारणों से सुर्खियों में रहे हैं। साहू समाज के सम्मेलनों से लेकर क्षेत्रीय राजनीति में सक्रियता और निजी मामलों को लेकर उनका नाम बार-बार सामने आता रहा है।