बार-बार आने वाले अनचाहे कॉल्स पर कसेगा शिकंजा, 10 दिन में 3 शिकायतों पर होगी कार्रवाई
स्पैम कॉल्स और फर्जी टेलीमार्केटिंग से परेशान लोगों के लिए बड़ी राहत। ट्राई ने बनाए नए और सख्त नियम, जानिए क्या बदलेगा।
आप किसी प्रेजेंशटेशन को बनाने में बिज़ी हैं या किसी मीटिंग में तभी फोन बजता है. अननोन नंबर जरूरी ना हो सोचकर आपने फोन उठाया और सामने से आवाज आई सर कोई प्रॉपर्टी सर्च कर रहें हैं, मैडम आपका क्रेडिट कार्ड सर, लोन चाहिए? मैडम आपने कौन-सी इंश्योरेंस पॉलिसी ली है? वगैरह वगैरह आप कभी झल्लाकर, कभी प्यार से मना करके फोन काटते हैं कि थोड़ी देर में एक दूसरे नंबर से वैसी ही कॉल आ जाती है. अगर ऐसी कॉल्स आपका रोज का सिरदर्द हैं, तो अब इन्हें रोकने के लिए TRAI ने नियम और सख्त कर दिए हैं.
सिर्फ नंबर नहीं, कॉल करने के तरीके पर भी नजर
TRAI ने अनचाही कमर्शियल कॉल्स पर कार्रवाई का सिस्टम और सख्त किया है.नई व्यवस्था में रोबोकॉल, ऑटो-डायल्ड कॉल और प्री-रिकॉर्डेड मैसेज जैसी कमर्शियल कॉल्स को रेगुलेटरी दायरे में लाया गया है. यानि अब बस ये नहीं देखा जाएगा कि कॉल किस नंबर से आई…इस पर भी नज़र रहेगी कि कॉलिंग पैटर्न क्या था और किसी नंबर से कितनी कॉल हुई TRAI और टेलीकॉम कंपनियां AI-बेस्ड स्पैम डिटेक्शन का इस्तेमाल भी करेंगी, ताकि संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न को जल्दी पहचाना जा सके.
10 दिन में 3 शिकायतें भी बन सकती हैं कार्रवाई का आधार
पहले स्पैम कॉल करने वाले नंबर के खिलाफ कार्रवाई के लिए ज्यादा शिकायतों की जरूरत थी. अब 10 दिनों में 3 कंज्यूमर शिकायतें और AI-बेस्ड डिटेक्शन जैसे साइन मिलने पर संदिग्ध नंबरों की जांच और कार्रवाई शुरू हो सकती है. टेलीकॉम कंपनियां संदिग्ध नंबरों की जानकारी आपस में शेयर कर सकती हैं.
बार-बार उल्लंघन किया तो ब्लैकलिस्ट
लगातार नियम तोड़ने वाले टेलीमार्केटर्स को 1 साल तक ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है. मतलब एक नंबर बंद करके दूसरे नंबर से वही काम शुरू करना अब पहले जितना आसान नहीं रहेगा.
ऑटोमेटेड कमर्शियल कॉल्स पर 5 पैसे प्रति मिनट
नई व्यवस्था में A2P यानी Application-to-Person कॉल्स पर टर्मिनेशन चार्ज का प्रावधान भी है. इसके तहत टेलीकॉम ऑपरेटर ऑटोमेटेड कमर्शियल कॉलिंग पर 5 पैसे प्रति मिनट तक का टर्मिनेशन चार्ज भी लगा सकते हैं. ताकि बड़ी संख्या में की जाने वाली ऑटोमेटेड कमर्शियल कॉलिंग को डिसकरेज किया जा सके. यानि जब कोई सिस्टम या एप्लिकेशन बड़ी संख्या में ऑटोमेटेड तरीके से कॉल करता है, वो भी रेगुलेटरी की नजर में रहेगा.
आपके लिए क्या बदलेगा?
अब अगर आपके फोन पर लगातार स्पैम कॉल आ रही हैं.तो अगर आप उसे बस ब्लॉक करने के साथ साथ स्पैम रिपोर्ट कर कंप्लेन रजिस्टर कराएँगें तो ज्यादा डेटा टेलीकॉम कंपनियों और रेगुलेटर तक पहुंचेगा, इससे स्पैम और फर्जी कॉल पैटर्न को आइडेटिफाई करना आसान होगा.
असली बदलाव नंबर में नहीं, पैटर्न में है
स्पैम करने वाला व्यक्ति आज एक नंबर से कॉल कर सकता है और कल दूसरा नंबर इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन अगर सिस्टम अलग-अलग नंबरों के पीछे एक जैसा कॉलिंग पैटर्न पहचान लेता है, तो कार्रवाई सिर्फ एक फोन नंबर तक सीमित नहीं रहेगी. अब मामसा ब्लॉक करके आगे भड़ने का नहीं है.स्पैम कॉल करने वाले के पूरे कॉलिंग पैटर्न पर नजर रखने की है.