Noida Ghaziabad Builders Clash: टाउनशिप शेयरों के विवाद में घिरे बड़े बिल्डर, मनोज गौड़ ने आरोपों को बताया तथ्यहीन
क्रॉसिंग रिपब्लिक जमीन और शेयर विवाद मामले में गौड़ संस के एमडी मनोज गौड़ समेत 6 लोगों पर मुकदमा दर्ज।
क्रॉसिंग रिपब्लिक की जमीन को लेकर नोएडा-गाजियाबाद के बड़े बिल्डरों के बीच चल रहे विवाद में एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुए इस मुकदमे में गौड़ संस के एमडी मनोज गौड़, उनकी पत्नी और दोनों बेटों सहित छह लोगों को नामजद किया गया है। इन पर साजिश रचकर नियम विरुद्ध कंपनी के शेयर अपने नाम करने और कंपनी का कार्यालय स्थानांतरित करने सहित कई आरोप हैं।
गाजियाबाद के क्रासिंग रिपब्लिक थाने में कोर्ट के आदेश पर सोमवार को मुकदमा दर्ज हुआ। विजय कुमार शर्मा की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में कहा गया है कि वह क्राॉसिंग रिपब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकृत हस्ताक्षरी है। उसे 12 जून को बोर्ड ने मुकदमा दर्ज कराने और अन्य विधिक कार्यवाही के लिए अधिकृत किया गया। इस कंपनी को जीडीए से वर्ष 2006 में टाउनशिप का लाइसेंस मिला था।
24 अप्रैल 2006 को शेयर होल्डिंग का एग्रीमेंट सुपरटेक के एमडी आरके अरोड़ा, पैरामाउंट रेजीडेंसी के एमडी मुकेश अग्रवाल, पंचशील प्रमोटर्स के एमडी अशोक चौधरी, एसोटेक लिमिटेड के एमडी संजीव श्रीवास्तव और गौर संस के एमडी मनोज गौड़ के बीच हुआ था। इसमें सभी का शेयर 14.55 प्रतिशत तय हुआ। अजनारा के एमडी अशोक गुप्ता का 10.38 प्रतिशत, महागुन के एमडी अमित जैन का 11.87 प्रतिशत, प्रोव्यू के एमडी राजीव अरोरा का 2.5 प्रतिशत और मानक बिल्डकॉन के एमडी मनोज कुमार राय का शेयर 5.2 प्रतिशत तय हुआ। इसके बाद सभी की सहमति से काम हो रहा था। वर्ष 2022 तक 15 हजार फ्लैटों का निर्माण किया गया।
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2022 के बाद मनोज गौड़ ने आपराधिक षडयंत्र रचे और शर्तों का उल्लंघन कर बगैर किसी बोर्ड मीटिंग की अनुमति के सुपरटेक और महागुन के शेयर ले लिए, जबकि सुपरटेक कंपनी के शेयर के संबंध में न्यायालय में वाद चल रहा था और कानूनी रूप से यह संभव नहीं था। उनके द्वारा अपनी कंपनी की सचिव अंजलि वर्मा को अन्य शेयर धारकों की अनुमति के बगैर साजिश के तहत क्रॉसिंग कंपनी का सचिव नियुक्त कर दिया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए। इस फर्जीवाड़े के कारण ही एलएंडटी फाइनेंस कंपनी ने क्रॉसिग इंफ्रा पर दिल्ली में मुकदमा कर रखा है।
बाउंसरों के साथ कंपनी में तोड़फोड़ का आरोप
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि 18 मई को मनोज गौड़ और उनके साथ आए बाउंसरों व अन्य लोगों ने कॉसिंग रिपब्लिक कंपनी के कार्यालय में तोड़-फोड़ कर कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी दी और सारे रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया। इस दौरान उन्होंने वहां पर लगे सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही सारे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी समाप्त कर दिए। सभी दस्तावेजों को ले जाने के बाद 22 मई को कंपनी के बोर्ड की अनुमति के बिना कारपोरेट कार्यालय अभयखंड गाजियाबाद में शिफ्ट कर दिया।
एनसीएलटी में होने पर भी हासिल की हिस्सेदारी
दर्ज मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि गौड़ ग्रुप ने ऐसी दो बिल्डर कंपनियों की हिस्सेदारी भी हासिल कर ली, जिनका मामला उस दौरान एनसीएलटी में चल रहा था और इन कंपनियों के शेयर नहीं बेचे जा सकते थे। आरोप है कि गलत तरीके से इन दोनों बिल्डर कंपनियों के शेयर अपने नाम कराए गए। इस मामले में अन्य स्तरों पर भी कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है और वह इस मामले को लेकर न्यायालय में भी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है।
आरोप तथ्यहीन, स्टे मिला: मनोज गौड़
गौड़ संस के एमडी मनोज गौड़ ने कहा कि जिस व्यक्ति ने न्यायालय के आदेश पर यह मुकदमा दर्ज कराया है, वह कभी कंपनी में कर्मचारी नहीं रहा। वह उन्हीं बिल्डरों का कर्मी है, जिनके खिलाफ वह पूर्व में मुकदमा दर्ज करा चुके हैं। यह मुकदमा तथ्यहीन है, जो गलत जानकारी देकर दर्ज कराया गया। इस मुकदमे में उन्हें सोमवार को ही हाईकोर्ट से स्टे मिल चुका है और कोर्ट ने मामले में कार्यवाही पर 30 दिन की रोक लगा दी है। उनकी ओर से अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
कई प्रयासों के बाद भी समझौता नहीं
क्रॉसिंग रिपब्लिक टाउनशिप में हिस्सेदारी को लेकर जिन बिल्डर समूहों के बीच विवाद चल रहा, उनके गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर जिले में सौ से अधिक परियोजनाएं हैं और ये लाखों लोगों को फ्लैट उपलब्ध करा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार इस विवाद को समाप्त कराने के लिए दोनों ही समूहों के बीच अन्य बिल्डरों के द्वारा बैठकें भी कराई जा चुकी हैं, लेकिन समझौता नहीं हो सका। अब इस मुकदमे के दर्ज होने के बाद बिल्डरों के बीच चल रही आपसी रार के और बढ़ने के आसार हैं।