आधार और बायोमेट्रिक डेटा से बैंक खाते साफ करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

पानीपत पुलिस ने AePS के जरिए बिना ओटीपी बैंक खाते से पैसे निकालने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश। दो आरोपी गिरफ्तार।

पानीपतः हरियाणा के पानीपत साइबर पुलिस ने AePS (आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली) के जरिए बैंक खातों से पैसे निकालने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और फिंगरप्रिंट से जुड़ा डेटा हासिल कर फर्जी बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट आईडी के माध्यम से बैंक खातों से रकम निकालते थे.

OTP और लिंक के बिना खाते से निकले थे 2 हजार: एएसपी हर्षित गोयल ने बताया कि “पुलिस को शिकायत मिली थी कि एक व्यक्ति के बैंक खाते से AePS ट्रांजैक्शन के माध्यम से 2 हजार रुपये निकाल लिए गए, जबकि पीड़ित ने न तो किसी को OTP बताया था और न ही उसे कोई संदिग्ध लिंक प्राप्त हुआ था. जांच के दौरान पुलिस ने ट्रांजैक्शन की कड़ी को खंगाला तो रकम पानीपत की विद्यानंद कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति के खाते में पहुंचने की जानकारी सामने आई. ”

PayBingo ऐप से तैयार करता था मर्चेंट आईडीः जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को पता चला कि यह खाता साकिब नामक आरोपी ने खुलवाया था. पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि साकिब आसपास के लोगों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर उनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक स्टेटमेंट हासिल करता था. इसके बाद PayBingo ऐप के माध्यम से उनकी मर्चेंट आईडी तैयार कर उन्हें फर्जी बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.

बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट एजेंट बनकर कर रहा था फर्जीवाड़ाः कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हर्षित गोयल के नेतृत्व में साइबर थाना प्रभारी अजय कुमार और उनकी टीम ने की. ASP हर्षित गोयल ने बताया कि AePS की व्यवस्था मुख्य रूप से उन ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए की गई है, जहां बैंक शाखा या एटीएम की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं होती. बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सत्यापित एजेंट के रूप में काम करते हैं और लोगों को खाते से पैसे निकालने सहित बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं.

तीन स्तर पर चल रहा था पूरा नेटवर्कः इस नेटवर्क में साकिब के अलावा हरिओम और बिहार निवासी मोहम्मद इश्तियाक की भूमिका सामने आई है. साकिब लोगों के दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट आईडी तैयार कर उन्हें आगे उपलब्ध कराता था. हरिओम लोगों के आधार नंबर और बायोमेट्रिक यानी फिंगरप्रिंट डेटा जुटाता था.
इसके बाद बिहार निवासी मोहम्मद इश्तियाक को हरिओम से आधार-बायोमेट्रिक डेटा और साकिब से बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट आईडी मिलती थी. इश्तियाक ऐप के माध्यम से इन जानकारियों का इस्तेमाल कर आधार से जुड़े बैंक खातों से अवैध रूप से रकम निकालता था.

150 लोगों से करीब 2.5 लाख रुपये निकालने का दावाः पूछताछ में पता चला कि साकिब पिछले करीब छह महीने से इस गतिविधि में शामिल था और अब तक लगभग 18 से 20 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट आईडी तैयार कर बेच चुका था. वहीं मोहम्मद इश्तियाक पिछले करीब दो महीने से सक्रिय था और उसने करीब 150 लोगों के आधार से जुड़े बैंक खातों से लगभग 2.5 लाख रुपये निकालने की बात सामने आई है. पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के संबंध में भी जांच कर रही है.

5 मोबाइल, लैपटॉप और फिंगरप्रिंट स्कैनर बरामदः पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक फिंगरप्रिंट स्कैनर बरामद किया है. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उन्होंने कितने लोगों का आधार-बायोमेट्रिक डेटा हासिल किया और कितने बैंक खातों से रकम निकाली गई. पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में एक आरोपी नौवीं कक्षा तक पढ़ा है, जबकि दूसरा मजदूरी का काम करता था. साइबर थाना पुलिस मामले में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.

अनधिकृत AePS ट्रांजैक्शन की जानकारी को तुरंत करें रिपोर्टः यह मामला इस बात को सामने लाता है कि साइबर ठगी के लिए अब OTP या लिंक भेजना ही जरूरी नहीं रह गया है. आधार नंबर, बायोमेट्रिक डेटा और फर्जी बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट आईडी के दुरुपयोग से भी बैंक खातों को निशाना बनाया जा सकता है. ऐसे में लोगों को अपने आधार और बैंकिंग दस्तावेज अनजान व्यक्तियों को देने से बचना चाहिए और किसी भी अनधिकृत AePS ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलते ही तत्काल बैंक और साइबर पुलिस को शिकायत करनी चाहिए.

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