सोनीपत की चार बेटियों ने हॉकी में जीता स्वर्ण पदक, नेहा गोयल के संघर्ष की प्रेरणादायक कहानी
एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने गोल्ड मेडल जीता है। सोनीपत की चार बेटियों ने टीम में अहम भूमिका निभाई, जिसमें नेहा गोयल का संघर्ष प्रेरणादायक है।
हरियाणा के सोनीपत की चार बेटियों ने एशियाई खेलों में भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक दिलाने में अपना अहम योगदान दिया है। नेहा गोयल, ज्योति रुमावत, साक्षी राणा और शिल्पी डबास भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा थीं, जिन्होंने चीन के खिलाफ शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीता। इन सभी खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से पूरे सोनीपत और देश भर में खुशी की लहर दौड़ गई है। इन बेटियों की इस सफलता के पीछे उनका कड़ा संघर्ष और अटूट मेहनत जुड़ी हुई है।
👟 फटे जूतों से लेकर 10 किलोमीटर पैदल अभ्यास तक: बेहद संघर्ष भरा रहा है स्टार खिलाड़ी नेहा गोयल का सफर
भारतीय टीम की स्टार खिलाड़ी नेहा गोयल का यहां तक पहुंचने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। कभी आर्थिक तंगी के कारण उन्हें फटे जूतों में और खाली पेट अभ्यास करने के लिए रोजाना 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। उनकी मां सावित्री ने दूसरों के घरों और कारखानों में काम करके अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच प्रीतम सिवाच ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तराशा। मुश्किल दौर में कोच और परिवार का साथ मिला, जिसके बाद नेहा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई।
🤝 चोट के बाद पति सुनील का मिला साथ: किया गया वादा किया पूरा, देश के नाम किया स्वर्ण पदक
नेहा के जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया जब 2015 में पैर की गंभीर चोट के कारण उनका करियर खतरे में पड़ गया था, लेकिन ऐसे कठिन समय में उनके पति सुनील उनके ढाल बनकर खड़े हुए। इलाज से लेकर हर कदम पर साथ देते हुए सुनील ने उनका हौसला बढ़ाया। एशियाई खेलों के लिए रवाना होने से पहले नेहा ने अपने पति से देश के लिए सोना जीतने का वादा किया था, जिसे उन्होंने मैदान पर शानदार खेल दिखाकर आखिरकार पूरा कर दिखाया।