क्या है ‘तुर्किस्तान’ विवाद? उइघुर मुस्लिमों की पहचान को लेकर आमने-सामने आए चीन और तुर्की

शिनजियांग और उइघुर मुस्लिमों की ऐतिहासिक पहचान को लेकर चीन और तुर्की के बीच ऑनलाइन विवाद तेज हो गया है। जानिए 'तुर्किस्तान' विवाद और सोशल मीडिया बहस का पूरा मामला।

चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित शिनजियांग इलाके को लेकर चीन और तुर्की के बीच मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। हाल ही में दोनों देशों के सोशल मीडिया यूज़र्स के बीच उइघुर मुस्लिमों की जातीय पहचान, इतिहास और इस क्षेत्र से जुड़े दावों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत तब हुई जब तुर्की के एक यूज़र ने शिनजियांग की एक उइघुर लड़की से मुलाकात का संस्मरण साझा किया। जब यूज़र ने उससे पूछा कि क्या वह खुद को तुर्किक मानती है, तो लड़की ने जवाब दिया कि वह चीनी है। इसके बाद तुर्की यूज़र द्वारा उसे अपनी जड़ों की ओर लौटने की सलाह देने वाली पोस्ट वायरल हो गई, जिससे भाषा की बाधा दूर करने के लिए AI टूल्स का सहारा लेकर दोनों देशों के नागरिक आमने-सामने आ गए।

🗺️ ‘तुर्किस्तान’ शब्द और पाठ्यपुस्तकों पर तनातनी: कूटनीतिक संबंधों और व्यापारिक हितों के बीच फंसा शिनजियांग मुद्दा

इस विवाद के केंद्र में ‘तुर्किस्तान’ शब्द का ऐतिहासिक और भौगोलिक दायरा है। तुर्की की नई पाठ्यपुस्तकों में मध्य एशिया की जगह ‘तुर्किस्तान’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने से विवाद और गहरा गया है, जिसमें शिनजियांग के कुछ हिस्सों को भी दर्शाया गया है। चीन इस तरह की व्याख्या को अपनी प्रादेशिक अखंडता और संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती मानता है। भले ही तुर्की में हजारों उइघुर शरणार्थी रहते हैं और तुर्की मानवाधिकारों के मुद्दे पर चीन की आलोचना करता रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक हित भी जुड़े हुए हैं। हाल के वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की मुलाकातों के बावजूद शिनजियांग का यह सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विवाद लगातार सुलग रहा है।

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