महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सांस्कृतिक पुनर्जागरण, चित्रकूट से बिठूर तक चल रही हैं विकास परियोजनाएं
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर योगी सरकार ने सांस्कृतिक विरासत के विकास के साथ सफाई-मित्रों के लिए न्यूनतम मानदेय, ईएसआई और बीमा जैसी बड़ी घोषणाएं की हैं।
अपने राज्य का सांस्कृतिक गौरव और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के प्रति संवेदना—महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन्हीं दोनों आदर्शों को धरातल पर उतारकर एक अनूठा संदेश दिया है। एक ओर जहां आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से जुड़े पवित्र स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए करोड़ों रुपये की विराट योजनाएं आकार ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर पिछली सरकारों में उपेक्षित रहे समाज को उनके श्रम का सच्चा सम्मान और सामाजिक सुरक्षा का कवच प्रदान किया जा रहा है। चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम में 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा, भव्य पर्यटन सुविधा केंद्र, वाल्मीकि घाट और परिक्रमा पथ जैसी परियोजनाएं इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। इसके अलावा अयोध्या हवाई अड्डे का नामकरण और सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में महापुरुषों की मूर्तियां स्थापित करने जैसे प्रयास सांस्कृतिक पुनर्जागरण को नया आयाम दे रहे हैं।
💰 बिचौलियों का खत्म होगा खेल: यूपी आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए सफाई-मित्रों को मिलेगी 16,000 रुपये न्यूनतम मानदेय की गारंटी
प्रतीकों और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ सरकार ने समाज के वास्तविक उत्थान के लिए ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छता सेनानियों (सफाई-मित्रों) के जीवन स्तर को सुधारने के लिए ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। आउटसोर्सिंग व्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या यानी बिचौलियों और ठेकेदारों द्वारा मेहनताना मारे जाने की समस्या का समाधान करते हुए ‘यूपी आउटसोर्स सेवा निगम’ के माध्यम से 16,000 रुपये न्यूनतम मानदेय की गारंटी दी गई है। इसके साथ ही कर्मचारियों को ईएसआई के तहत मुफ्त इलाज, सुरक्षा बीमा और पीएफ (PF) जैसी सुविधाओं से जोड़ा गया है, ताकि इन जोखिम भरे पेशों से जुड़े कर्मियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके। आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार ही सामाजिक भेदभाव को मिटाने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।