विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे अमेरिका और एंटीगुआ का दौरा, G20 और CHOGM बैठकों में करेंगे शिरकत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका और एंटीगुआ के दौरे पर G20 और CHOGM बैठकों में लेंगे हिस्सा। विदेश मंत्रालय ने तेल आयात और आतंकवाद के मुद्दे पर रखी भारत की बेबाक राय।
नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर अमेरिका के अटलांटा में आयोजित होने वाली जी20 (G20) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जानकारी दी कि इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान विदेश मंत्री ‘क्वाड’ (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी विशेष रूप से शामिल होंगे और अपने समकक्ष विदेशी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं को आगे बढ़ाएंगे।
अटलांटा के सफल दौरे के बाद विदेश मंत्री एंटीगुआ और बारबुडा के सेंट जॉन्स के लिए रवाना होंगे, जहां वे राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। विदेश मंत्रालय का मानना है कि इन उच्चस्तरीय बैठकों से भारत को वैश्विक व भू-राजनीतिक मुद्दों पर अन्य मित्र देशों के साथ संवाद बढ़ाने और आपसी आर्थिक व सामरिक सहयोग को मजबूत करने का बेहतरीन अवसर मिलेगा। इसके अलावा, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की बैठकों में भारत की भागीदारी को लेकर मंत्रालय ने कहा कि इस पर विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
🚫 पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर भारत का रुख अडिग: आतंकवाद के लिए तय होनी चाहिए जवाबदेही
आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति और सिद्धांतों में कोई बदलाव नहीं आया है।
MEA ने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद के लिए हर हाल में जवाबदेही तय होनी चाहिए। वैश्विक समुदाय को आतंकवाद के सभी कुत्सित रूपों और तौर-तरीकों के खिलाफ अधिक मुखर और प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है, ताकि मानवता के इस सबसे बड़े खतरे को पूरी तरह नेस्तनाबूद किया जा सके।
🛢️ अमेरिका के दबाव में तेल आयात पर MEA का दो टूक जवाब: “राष्ट्रीय हित सर्वोपरि”
ईरान, वेनेजुएला और रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव और पश्चिमी देशों की नीतियों के सवाल पर विदेश मंत्रालय ने भारत का पक्ष बेहद स्पष्टता से रखा।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तेल की खरीद का फैसला विशुद्ध रूप से भारतीय कंपनियां करती हैं और उनके ये सभी व्यावसायिक निर्णय राष्ट्रीय हित पर आधारित होते हैं। तेल आयात के निर्णय में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को परखा जाता है, जिसमें व्यावसायिक परिस्थितियां, अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, तकनीकी जरूरतें और व्यापक वैश्विक भू-राजनीतिक हालात शामिल हैं।
🗺️ अरुणाचल प्रदेश की स्थिति और कथित फेक वीडियो पर विदेश मंत्रालय का बयान
अरुणाचल प्रदेश से जुड़े एक कथित भ्रामक व फेक वीडियो के मामले पर MEA ने स्पष्ट किया कि संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी है।
वहां की जमीनी और सुरक्षात्मक स्थिति पर बोलते हुए विदेश मंत्रालय ने सुझाव दिया कि इस विषय पर रक्षा मंत्रालय और संबंधित सैन्य विंग्स बेहतर और विस्तृत जानकारी दे सकते हैं। MEA ने अपनी पिछली प्रेस ब्रीफिंग के जवाबों का हवाला देते हुए दोहराया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली हर परिस्थिति से निपटने के लिए भारत का व्यापक दृष्टिकोण पहले ही दुनिया के सामने स्पष्ट किया जा चुका है।
🇮🇱 इजराइल के चुनाव परिणाम और भारत-इजराइल द्विपक्षीय संबंधों पर MEA की प्रतिक्रिया
इजराइल में संपन्न हुए चुनावों के परिणामों और वहां बनने वाली संभावित नई सरकार के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव के सवाल पर MEA ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच ऐतिहासिक रूप से बेहद प्रगाढ़, मैत्रीपूर्ण और रणनीतिक संबंध रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने पूरा भरोसा जताया कि आने वाले समय में दोनों देशों की सरकारों के बीच आपसी सहयोग के नए आयाम स्थापित होंगे और इन मजबूत संबंधों को और अधिक ऊंचाइयां दी जाएंगी।
🏛️ SCO डायलॉग फोरम में पाकिस्तान को आमंत्रण: MEA ने बताई प्रक्रिया
आगामी 20 से 22 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाली SCO Civilizational Dialogue Forum की उच्चस्तरीय बैठक को लेकर विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सभी सदस्य देशों को विधिवत आमंत्रित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, एससीओ के डायलॉग पार्टनर्स और एक आधिकारिक ऑब्जर्वर देश को भी आमंत्रण भेजा गया है। पाकिस्तान के मंत्री एहसान खान खिची को भेजे गए आमंत्रण और उनकी भागीदारी की पुष्टि को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में MEA ने इस तरह के बहुपक्षीय आयोजनों की स्थापित और सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया से अवगत कराया।