‘व्यवस्था परिवर्तन’ के लिए हिंसा करने वालों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, योगी सरकार का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन नियम सख्त कर दिए गए हैं। हिंसा, पेपर लीक और गंभीर अपराधों में लिप्त अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिलेगी।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए चरित्र सत्यापन (Character Verification) से जुड़े नियमों को और अधिक सख्त एवं स्पष्ट कर दिया है।
नए जारी निर्देशों के अनुसार, अब ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर हिंसा फैलाने वाले या गंभीर आपराधिक मामलों में लिप्त पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा को मानने या महज एफआईआर दर्ज होने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा।
🚫 पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, हत्या और बलात्कार के आरोपियों के लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे बंद
नई नीति के तहत ऐसे अभ्यर्थियों को पूरी तरह से अयोग्य (Disqualified) माना जाएगा जो गंभीर और जघन्य अपराधों में संलिप्त रहे हैं:
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प्रतिबंधित अपराध: हत्या, डकैती, बलात्कार, महिला लज्जा भंग, भ्रष्टाचार, आतंकवादी कृत्य, पेपर लीक (Paper Leak) और सॉल्वर गैंग (Solver Gang) जैसे अपराधों में शामिल व्यक्तियों के लिए सरकारी सेवा के रास्ते बंद रहेंगे।
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हिंसक संगठन: ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सक्रिय सदस्य हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंसा के बल पर शासन या व्यवस्था को बदलना है, वे उत्तर प्रदेश सरकार में किसी भी पद के लिए पात्र नहीं होंगे।
⏱️ उम्र और गतिविधियों की समय-सीमा तय: 21 साल की उम्र के बाद पिछले 3 सालों के रिकॉर्ड की होगी जांच
हालांकि ये नियम पूर्व में भी लागू थे, लेकिन नई नीति में इन्हें अधिक स्पष्ट और परिभाषित किया गया है। इसमें उम्र और गतिविधियों की समय-सीमा को लेकर विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं।
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3 साल की सक्रियता का नियम: 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद, चरित्र जांच की तारीख से ठीक पिछले तीन वर्षों के भीतर यदि अभ्यर्थी किसी ‘व्यवस्था परिवर्तन’ वाली हिंसक गतिविधि में भाग लेता पाया जाता है, तो इसे इस बात का पुख्ता प्रमाण माना जाएगा कि वह व्यक्ति अब भी ऐसी अवांछित गतिविधियों में सक्रिय है।
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राजनीतिक प्रदर्शनों को छूट: नई नीति में हिंसात्मक गतिविधियों और केवल राजनीतिक विचारधारा के बीच के अंतर पर जोर दिया गया है। सामान्य और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रदर्शनों में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
📋 सभी भर्ती बोर्डों और विभागों पर लागू होंगे नियम, 30 दिन के भीतर पुलिस को देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट
योगी सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सरकारी तंत्र की शुचिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह सख्त रुख अपनाया है। नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज की ओर से इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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पुलिस को 30 दिन का अल्टीमेटम: नए नियमों के तहत पुलिस प्रशासन को अभ्यर्थी की चरित्र सत्यापन रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सौंपनी होगी।
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मौजूदा कर्मचारियों पर लागू नहीं: पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का पुन: सत्यापन नहीं किया जाएगा, हालांकि उनके पिछले विभाग से रिकॉर्ड की जानकारी ली जा सकती है।
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सभी बोर्डों पर नियम लागू: यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) और सभी भर्ती बोर्डों पर समान रूप से प्रभावी होगी। सरकार का मानना है कि यह नीति युवाओं को कानून के प्रति अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनाएगी।