शिक्षा निदेशालय पर डटे TGT-PGT छात्रों का धरना पुलिस ने जबरन कराया खत्म, हाईवे जाम करने पर कई हिरासत में
पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न पर भर्ती की मांग कर रहे TGT-PGT अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन धरना पुलिस ने जबरन खत्म करा दिया है। कानपुर हाईवे जाम करने पर कई छात्र हिरासत में।
उत्तर प्रदेश। पुरानी नियमावली और पुराने पैटर्न के आधार पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी कराने की मांग को लेकर पिछले चार दिनों से शिक्षा निदेशालय के बाहर डटे TGT-PGT छात्र-छात्राओं के अनिश्चितकालीन धरने को पुलिस ने जबरन समाप्त करा दिया है। आंदोलन के उग्र होने और अभ्यर्थियों द्वारा कानपुर हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिए जाने के बाद पुलिस व प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दर्जनों छात्र-छात्राओं को हिरासत में ले लिया है।
🛑 कानपुर हाईवे जाम होते ही एक्शन में आई पुलिस; मान-मनौव्वल के बाद किया बल प्रयोग
शिक्षा निदेशालय के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को लेकर बैठे छात्र-छात्राएं गुरुवार देर शाम अचानक उग्र हो गए और उन्होंने कानपुर हाईवे पर पहुंचकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया।
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यातायात ठप: हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लगने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा होते ही भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया।
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पुलिस की कार्रवाई: पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने आक्रोशित छात्रों को समझाने और सड़क से हटाने के लिए कई दौर की वार्ता की। जब छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे और हटने को तैयार नहीं हुए, तो पुलिस ने देर शाम बल प्रयोग कर सभी अभ्यर्थियों को हाईवे से खदेड़ दिया और धरना स्थल को खाली करा दिया।
📋 क्या हैं TGT-PGT अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें?
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि नए नियमों के लागू होने से उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
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पुरानी नियमावली की बहाली: TGT-PGT भर्ती परीक्षा को पुरानी नियमावली और पूर्व निर्धारित पैटर्न के आधार पर ही आयोजित कराया जाए।
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एक अतिरिक्त अवसर (Age/Attempt Relaxation): नए नियमों और बदलावों से प्रभावित हो रहे सभी योग्य अभ्यर्थियों को इस भर्ती प्रक्रिया में एक अंतिम अवसर या छूट प्रदान की जाए।
🔄 इससे पहले भी 19 दिनों तक चला था उग्र आंदोलन; ठोस समाधान न निकलने से फिर सड़कों पर उतरे छात्र
गौरतलब है कि अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों का यह कोई पहला प्रदर्शन नहीं है। इससे पूर्व शिक्षक दिवस (5 सितंबर) से लेकर 23 सितंबर तक लगातार 19 दिनों तक छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन चला था।
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आश्वासन के बाद पुनः आंदोलन: उस समय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई कई दौर की वार्ताओं के बाद उचित समाधान का आश्वासन देकर धरना स्थगित कराया गया था।
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छात्रों में आक्रोश: हालांकि, समय बीत जाने के बाद भी जब कोई ठोस लिखित निर्णय या समाधान नहीं निकला, तो निराश छात्र दोबारा अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर हुए। पुलिस द्वारा धरना जबरन खत्म कराए जाने और सहपाठियों को हिरासत में लिए जाने के बाद से अभ्यर्थियों में गहरा रोष व्याप्त है।