पंचकूला में पराली जलाने पर ड्रोन से पहली बार सख्त निगरानी: जियो-टैगिंग के साथ होगी एफआईआर और रेड एंट्री
पंचकूला में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए पहली बार ड्रोन तैनात किया गया है। पराली जलाने पर किसानों पर FIR, चालान और राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी।
हरियाणा के पंचकूला जिले में धान की पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं पर प्रभावी और पूर्ण रोक लगाने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने एक अभूतपूर्व पहल की है। जिले में पहली बार पराली जलाने की निगरानी के लिए विशेष हाईटेक ड्रोन तैनात किया गया है। यह ड्रोन पंचकूला के चिन्हित गांवों और अत्यधिक संवेदनशील (हॉटस्पॉट) क्षेत्रों में उड़ान भरकर हवा से निगरानी रखेगा, जिससे पराली में आग लगाने वाले किसानों की पहचान तुरंत की जा सकेगी।
⏱️ दोपहर से रात तक होगी सघन निगरानी; जियो-टैग्ड फोटो और वीडियो से जुटाए जाएंगे अकाट्य सबूत
निगरानी प्रणाली और समय:
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निगरानी की समय-सीमा: पंचकूला कृषि विभाग के उप निदेशक डॉक्टर राकेश पोरिया ने बताया कि आमतौर पर दोपहर और शाम के वक्त पराली जलाने के मामले अधिक आते हैं। इसलिए ड्रोन के माध्यम से विशेष रूप से दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक सघन गश्त और निगरानी की जाएगी।
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जियो-टैगिंग से ट्रैकिंग: संदिग्ध या आगजनी की घटनाओं की जियो-टैग्ड (Geo-tagged) फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, जिसमें सटीक स्थान (GPS Coordinates), तारीख और समय का ब्योरा दर्ज होगा।
🛑 नियम तोड़ा तो दर्ज होगी एफआईआर, कटेगा चालान; राजस्व रिकॉर्ड में होगी ‘रेड एंट्री’
कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई:
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सख्त कार्रवाई की चेतावनी: कृषि विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई भी किसान धान की पराली में आग लगाता हुआ पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी और भारी चालान काटा जाएगा।
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एमएसपी (MSP) पर बिक्री पर रोक: पराली जलाने वाले किसानों के राजस्व रिकॉर्ड (Land Revenue Record) में ‘रेड एंट्री’ कर दी जाएगी। रेड एंट्री होने के बाद संबंधित किसान मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसल बेचने के अधिकार से वंचित हो जाएगा।
🌾 कृषि विभाग की किसानों से अपील: पर्यावरण और जमीन की उर्वरक शक्ति बचाएं, फसल अवशेषों का करें उचित प्रबंधन
पर्यावरण संरक्षण की पहल:
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उर्वरक क्षमता को नुकसान: अधिकारियों ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे पराली में आग लगाने के बजाय विभागीय मशीनों के माध्यम से फसल अवशेषों का इन-सिटू या एक्स-सिटू प्रबंधन करें।
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मिट्टी और हवा को नुकसान: पराली में आग लगाने से खेत की मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं, जिससे जमीन की उर्वरक शक्ति घटती है और साथ ही जानलेवा वायु प्रदूषण बढ़ता है।
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प्रदूषण मुक्त पंचकूला: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों के सक्रिय सहयोग से पंचकूला जिले को पराली जलाने की घटनाओं से पूरी तरह मुक्त बनाना है।