महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के छात्रों का कमाल, शहद और बीवैक्स से बनाए इको-फ्रेंडली दिवाली गिफ्ट
करनाल के महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने शहद और प्राकृतिक मोम से इको-फ्रेंडली कैंडल व हर्बल उत्पाद तैयार किए। किसानों की बढ़ेगी आमदनी।
करनाल: हरियाणा में इस बार दीपावली के त्योहारी सीजन में मिठाइयों और पारंपरिक उपहारों से हटकर प्रकृति की मिठास और खुशबू से जुड़े उत्पाद लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहे हैं। करनाल स्थित महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय (MHU) के विद्यार्थियों ने शहद (Honey) और मधुमक्खियों से मिलने वाले प्राकृतिक मोम यानी बीवैक्स (Beeswax) से विभिन्न प्रकार के आकर्षक इको-फ्रेंडली उत्पाद तैयार किए हैं। इस नवाचार में हर्बल कैंडल, सजावटी बुद्ध प्रतिमाएं, लिप बाम, साबुन, रूम फ्रेशनर, हनी पीनट बटर और ड्राई फ्रूट हनी मिक्स शामिल हैं। विद्यार्थियों का यह अनूठा प्रयास न केवल दिवाली के लिए बेहतरीन गिफ्ट विकल्प पेश कर रहा है, बल्कि मधुमक्खी पालक किसानों की आमदनी बढ़ाने की नई संभावनाएं भी जगा रहा है।
🎁 मिठाइयों से अलग प्रकृति का तोहफा; शहद में ड्राई फ्रूट्स और बी-पोलन का नया स्वाद
मूल्य संवर्धन (Value Addition) और उत्पाद श्रृंखला:
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पारंपरिक उपहारों से हटकर: बाजार में जहां मिठाइयां और सजावटी सामान आम हैं, वहीं MHU के विद्यार्थियों ने प्राकृतिक संसाधनों से तैयार उपहारों की नई श्रृंखला पेश की है। इन्हें आकर्षक डिजाइन, बेहतरीन पैकेजिंग और किफायती कीमतों पर तैयार किया गया है।
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शहद का नया स्वाद: विद्यार्थियों ने शहद को पारंपरिक बोतलों से आगे बढ़ाते हुए बी-पोलन हनी मिक्स, ड्राई फ्रूट हनी मिक्स और चॉकलेट-बनाना हनी जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद बनाए हैं। इसके अलावा रिफाइंड चीनी और पाम ऑयल के विकल्प के रूप में नारियल तेल युक्त ‘हनी पीनट बटर’ भी तैयार किया गया है।
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कॉफी से लेकर लिप बाम तक: शहद आधारित स्वीटनिंग एजेंट से विशेष कॉफी, हेयर मिस्ट और लिप बाम जैसे पर्सनल केयर उत्पाद भी इस नवाचार का हिस्सा हैं।
✨ प्राकृतिक मोम (बीवैक्स) से तैयार खुशबूदार और रंग-बिरंगी कैंडल
सजावटी और हर्बल उत्पाद:
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बीवैक्स कैंडल: मधुमक्खी के प्राकृतिक मोम को साफ कर सांचों में ढालकर रंग-बिरंगी सजावटी कैंडल बनाई गई हैं, जिनमें हिबिस्कस फूल जैसी डिजाइन शामिल हैं।
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एसेंशियल ऑयल की खुशबू: इन कैंडल में लेमनग्रास और जैस्मिन जैसे प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल का उपयोग किया गया है, जिससे इनमें भीनी-भीनी खुशबू आती है। मात्र 30 से 40 रुपये की किफायती कीमत पर ये घर की सजावट और छोटे उपहारों के लिए परफेक्ट विकल्प हैं।
👨🎓 कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा बोले: “किसानों की उपज का मूल्य बढ़ाकर बाजार तक पहुंचाएं”
विशेषज्ञों और यूनिवर्सिटी प्रशासन की राय:
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आमदनी के नए रास्ते: महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने कहा कि विद्यार्थी अनुसंधान के जरिए ऐसे इको-फ्रेंडली उत्पाद बना रहे हैं जो किसानों की आय बढ़ा सकते हैं। जब किसान अपनी उपज का मूल्य संवर्धन (Value Addition) करके नए उत्पाद बाजार में उतारते हैं, तो कमाई के द्वार खुलते हैं।
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फूलों और सब्जियों का उपयोग: उन्होंने बताया कि फूलों से प्राकृतिक रंग निकालकर इको-फ्रेंडली रंगोली और ताजे फल, सब्जियां व मशरूम को आकर्षक गिफ्ट पैक के रूप में प्रस्तुत करने की अपार संभावनाएं हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।
🪔 शुभ प्रतीकों वाले गिफ्ट बॉक्स और किसानों की आय में ढाई गुना तक बढ़ोतरी की उम्मीद
व्यापारिक संभावना और लाभ:
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शुभ प्रतीक: विद्यार्थियों (जैसे पुनीत कुमार और कांता) ने स्वस्तिक, कलश और माता के चरणों जैसी आकृतियों को रंग-बिरंगी कैंडल के साथ आकर्षक गिफ्ट बॉक्स में सजाया है।
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बढ़ी हुई कीमत का फायदा: सामान्य तौर पर किसान शहद को ₹300-₹400 प्रति किलो बेचते हैं, लेकिन वैल्यू एडेड उत्पादों के जरिए इसका बाजार मूल्य ₹800 प्रति किलो तक पहुंचाया जा सकता है। मोम से कैंडल और साबुन बनाकर अतिरिक्त कमाई भी संभव है।
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अंतरराष्ट्रीय मांग और रोजगार: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) और वैश्विक बाजार में भारतीय बासमती व प्राकृतिक उत्पादों की मजबूत मांग को देखते हुए यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।