हरियाणा की सियासत में 33% महिला आरक्षण से मचेगी हलचल..!
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, तो क्या भविष्य में मुख्यमंत्री पद पर भी किसी महिला चेहरे को आगे लाने की संभावनाएं मजबूत होंगी?
न्यूज़ डेस्क हरियाणा। सिरसा । सीएम ग्रोवर । हरियाणा की राजनीति में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर चर्चाओं का दौर तेज होने लगा है। वर्ष 2029 में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू होने की संभावनाओं के बीच प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद हरियाणा की राजनीति में महिलाओं की भूमिका कितनी मजबूत होगी और क्या इससे सत्ता के शीर्ष पदों तक महिलाओं की पहुंच का रास्ता और आसान होगा?
हरियाणा की राजनीति हमेशा से अपने अप्रत्याशित फैसलों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिए जानी जाती रही है। यहां के मतदाताओं ने समय-समय पर राजनीतिक विश्लेषकों और सियासी पंडितों के आकलनों को गलत साबित किया है। ऐसे में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, तो क्या भविष्य में मुख्यमंत्री पद पर भी किसी महिला चेहरे को आगे लाने की संभावनाएं मजबूत होंगी? हालांकि महिला आरक्षण कानून में मुख्यमंत्री पद को महिलाओं या किसी विशेष समुदाय के लिए आरक्षित करने का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी इस मुद्दे ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।
पंचायत से संसद तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
हरियाणा में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का प्रयोग पहले भी हो चुका है। प्रदेश में पंचायतों, जिला परिषदों, ब्लॉक समितियों और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू है। इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं जनप्रतिनिधि बनकर स्थानीय स्तर पर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं। अब सवाल यह है कि क्या विधानसभा और लोकसभा में भी महिलाओं की भागीदारी इसी तरह नई राजनीतिक तस्वीर पेश करेगी?
शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। हरियाणा के स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं की व्यवस्था पहले से लागू है। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण के साथ ऐसी कोई अतिरिक्त शैक्षणिक अनिवार्यता लागू होने का फिलहाल कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
राजनीतिक दलों में महिला चेहरों की तलाश तेज होने के आसार
महिला आरक्षण की संभावनाओं को देखते हुए राजनीतिक दलों के लिए महिला नेतृत्व को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो सकता है। प्रदेश के कई राजनीतिक परिवारों में भी महिलाओं को सक्रिय राजनीति में आगे लाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। राजनीतिक दलों के महिला प्रकोष्ठ पहले से ही संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं और महिलाएं पार्टी पदाधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक की भूमिका निभा रही हैं।
फिलहाल हरियाणा में मुख्यमंत्री पद को महिला के लिए आरक्षित किए जाने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन 2029 के चुनावों को देखते हुए महिला आरक्षण ने सियासी चर्चाओं को नई दिशा जरूर दे दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन-से राजनीतिक दल महिला नेतृत्व पर भरोसा जताते हैं और हरियाणा की राजनीति में कौन-से नए चेहरे अपनी मजबूत दावेदारी पेश करते हैं।
कुल मिलाकर, 33 प्रतिशत महिला आरक्षण हरियाणा की राजनीति में केवल प्रतिनिधित्व का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला बड़ा विषय बनता दिखाई दे रहा है।