सिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग सख्त: 9 किसानों पर जुर्माना, 1 पर एफआईआर दर्ज

सिरसा में पराली जलाने पर कृषि विभाग का सख्त एक्शन। 9 किसानों पर जुर्माना, 1 पर एफआईआर। 300 बेलर मशीनों और ₹1200 सब्सिडी से पराली प्रबंधन की अपील।

सिरसा जिले में धान की कटाई का सीजन शुरू होते ही खेतों में पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। फसल अवशेष (पराली) जलाने के मामलों को लेकर कृषि विभाग ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। विभाग की ओर से पूरे जिले में लगातार सघन निगरानी की जा रही है और सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अब तक जिले में पराली जलाने के कुल 9 मामले सामने आए हैं, जिनमें संबंधित सभी किसानों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि एक किसान के खिलाफ एफआईआर (FIR) भी दर्ज करवाई गई है।

🚨 9 मामलों में दंडात्मक कार्रवाई; FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया लगातार जारी

प्रशासनिक सख्ती और कार्रवाई:

  • जुर्माना और केस दर्ज: कृषि विभाग ने पराली जलाने की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अब तक 9 किसानों पर चालान के साथ आर्थिक जुर्माना लगाया है। वहीं, एक किसान के खिलाफ पराली में आग लगाने के मामले में पुलिस केस दर्ज करवाया गया है।

  • सख्त संदेश: विभाग की ओर से अन्य दोषी मामलों में भी FIR दर्ज करवाने की कानूनी प्रक्रिया जारी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय कार्रवाई के बाद क्षेत्र के किसानों में हलचल देखने को मिल रही है।

📊 1.59 लाख हेक्टेयर में हुई थी धान की बिजाई; 50% कटाई का काम पूरा

कृषि विभाग के आंकड़े और चुनौतियां:

  • कटाई की स्थिति: कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. जोगिंद्र सिंह ने बताया कि इस बार सिरसा जिले में लगभग 1 लाख 59 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बिजाई की गई थी। इसमें से अब तक लगभग 50 प्रतिशत फसल की कटाई का काम पूरा हो चुका है।

  • प्रबंधन की चुनौती: कटाई का काम आगे बढ़ने के साथ ही खेतों में फसल अवशेषों के सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ गई है। विभाग की फ्लाइंग और ग्राउंड टीमें लगातार खेतों पर नजर रख रही हैं, ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

📦 300 बेलर मशीनों से किया जा रहा पराली प्रबंधन; ₹1,200 प्रति एकड़ सब्सिडी

आधुनिक तकनीक और वित्तीय प्रोत्साहन:

  • बेलर मशीनों का उपयोग: डॉ. जोगिंद्र सिंह ने आगे बताया कि कृषि विभाग की ओर से किसानों को पराली जलाने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। जिले में करीब 300 बेलर (Baler) मशीनों का इस्तेमाल धान की पराली के प्रबंधन के लिए किया जा रहा है। इन मशीनों की मदद से पराली की गांठें बनाकर उसे खेतों से हटाने और अन्य व्यावसायिक उपयोगों में लाने में मदद मिलती है।

  • सरकारी सब्सिडी: इसके अलावा सरकार की ओर से इन-सिटू व एक्स-सिटू माध्यम से पराली का उचित प्रबंधन करने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन सब्सिडी राशि भी दी जा रही है।

🧪 पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान

वैज्ञानिक दुष्प्रभाव:

  • मिट्टी पर असर: धान की कटाई के बाद खेतों में अगली फसल की बिजाई के लिए खेत जल्दी तैयार करने के उद्देश्य से कुछ किसान पराली में आग लगा देते हैं। हालांकि, इससे आग की लपटों के कारण मिट्टी में मौजूद लाभकारी मित्र कीट, सूक्ष्म जीव और आवश्यक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे जमीन की प्राकृतिक उर्वरक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

  • पर्यावरण और स्वास्थ्य: पराली से निकलने वाला जहरीला धुआं वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक बढ़ाता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

🗣️ किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने और जागरूक बनने की अपील

विभाग की सलाह और जागरूकता अभियान:

  • पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी: डॉ. जोगिंद्र सिंह ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान पराली को आग लगाने की बजाय उसका उचित प्रबंधन करें। इसके लिए आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और बेलर का इस्तेमाल करें तथा सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का लाभ उठाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

  • जागरूकता के साथ कार्रवाई: कृषि विभाग द्वारा गांवों में किसान चौपाल लगाकर पराली को खेत में मिलाने और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से उसका निपटान करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि प्रबंधन के तमाम विकल्प और सब्सिडी उपलब्ध होने के बावजूद यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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