भारत में BPaL थेरेपी को नहीं मिला पेटेंट: अमेरिकी संस्था TB Alliance का आवेदन खारिज, सस्ती दवाओं का खुला रास्ता
भारत में BPaL थेरेपी पर अमेरिकी संस्था TB Alliance का पेटेंट आवेदन खारिज। ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के इलाज में जेनेरिक दवाओं और सस्ते विकल्पों का खुला रास्ता।
ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (DR-TB) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक BPaL थेरेपी पर अमेरिकी संस्था TB Alliance को भारत में पेटेंट नहीं मिल पाया है। 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय पेटेंट ऑफिस ने इसका आवेदन आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है। इस बड़े फैसले के बाद अब इस दवा के फिक्स्ड कॉम्बिनेशन पर किसी एक इंस्टीट्यूट या ऑर्गनाइजेशन का एकाधिकार (Monopoly) नहीं रहेगा, जिससे जेनेरिक दवाएं बनाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए रास्ते खुल गए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दवाओं की कीमत तुरंत कम हो जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड रेस्पिरेट्री डिजीज के पूर्व निदेशक और टीबी विशेषज्ञ डॉ. रवीन्द्र कुमार दीवान इस ऐतिहासिक फैसले को सीधे तौर पर मरीजों के हित में बताते हैं।
🦠 क्या है BPaL थेरेपी? जानिए इसके घटक और ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का संकट
बीमारी और इलाज की प्रक्रिया:
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ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (DR-TB): इस गंभीर स्थिति में टीबी के बैक्टीरिया पर सामान्य और पारंपरिक दवाओं का असर होना बंद हो जाता है, जिसके चलते मरीजों को दूसरी और अधिक असरदार दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। पुराने दौर के इलाज में लंबा समय लगता था और कई इंजेक्शन भी शामिल होते थे, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने जैसे गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते थे।
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तीन दवाओं का कॉम्बिनेशन: BPaL मुख्य रूप से तीन असरदार दवाओं—बेडाक्विलिन, प्रेटोमैनिड और लाइनज़ोलिड—से मिलकर बनी एक थेरेपी है। इसका उपयोग ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के चुनिंदा मरीजों के इलाज में किया जाता है, जिसमें लगभग छह महीने तक दवाएं लेनी पड़ती हैं। भारत के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में BPaLM नाम की एक अन्य मेडिसिन स्कीम भी चलती है, जिसमें इन तीन दवाओं के साथ मोक्सीफ्लोक्सासिन भी दी जाती है। मरीज के लिए कौन-सी रेजिमेन सही है, यह डॉक्टर पूरी जांच के बाद तय करते हैं।
📜 पेटेंट के लिए क्या था दावा? और क्यों टीबी संगठनों ने किया था विरोध
आवेदन और आपत्तियों के कारण:
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TB Alliance का दावा: अमेरिका की नॉन-प्रॉफिटेबल ऑर्गनाइजेशन ‘ग्लोबल एलायंस फॉर टीबी ड्रग डेवलपमेंट’ यानी TB Alliance ने भारत में इन तीनों दवाओं के फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन और उसके इस्तेमाल को लेकर पेटेंट के लिए आवेदन किया था। उनका उद्देश्य तीनों दवाओं को एक तय मात्रा में मिलाकर उपलब्ध कराना था ताकि मरीजों के लिए दवा का सेवन आसान हो सके।
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संगों का विरोध: मरीजों के अधिकारों और सस्ती दवाओं के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस आवेदन का डटकर विरोध किया। उनका तर्क था कि ये तीनों दवाएं पहले से दुनिया भर में जानी-पहचानी हैं, और केवल इन्हें एक साथ एक पैक में मिलाने भर से इसे कोई नया आविष्कार नहीं माना जा सकता।
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पेटेंट कार्यालय का निर्णय: 27 अक्टूबर को पेटेंट कार्यालय ने आवेदन खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस कॉम्बिनेशन में ऐसा कोई नया मौलिक आविष्कार साबित नहीं हुआ जिसे पेटेंट दिया जा सके, और एप्लिकेशन में जरूरी जानकारियां भी पर्याप्त नहीं थीं।
⚖️ भारत ने क्यों नहीं दी पेटेंट की मंजूरी? एवरग्रीनिंग पर रोक
कानूनी और नीतिगत पहलू:
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पेटेंट कानून की धारा 3(d): भारत का पेटेंट कानून यह स्पष्ट करता है कि किसी पुरानी दवा में मामूली बदलाव करके उसे नई दवा बताकर पेटेंट हासिल नहीं किया जा सकता। कानून की धारा 3(d) इसी तरह के दावों पर रोक लगाती है, जिसे ‘एवरग्रीनिंग’ (Evergreening) कहा जाता है। हालांकि इस मामले में आवेदन दूसरी कानूनी वजहों से भी खारिज किया गया है।
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कम कीमत पर दवाएं: टीबी विशेषज्ञ डॉ. रवीन्द्र कुमार दीवान के अनुसार, भारत की राष्ट्रीय दवा नीति का मुख्य जोर टीबी, कैंसर और हृदय रोगों (Heart Diseases) जैसी गंभीर बीमारियों की जीवनरक्षक दवाएं आम मरीजों को बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराना है ताकि इलाज का आर्थिक बोझ मरीजों पर भारी न पड़े। पेटेंट आवेदन खारिज होने का यह निर्णय इसी नीति के पूरी तरह अनुरूप है।
💰 मरीजों को वर्तमान में क्या फायदा मिलेगा? सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज
वर्तमान व्यवस्था और भविष्य की उम्मीदें:
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मुफ्त इलाज: डॉ. दीवान बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों में ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के रजिस्टर्ड मरीजों को सभी जरूरी दवाएं पहले से ही पूरी तरह मुफ्त दी जा रही हैं। उनके अनुमान के मुताबिक नई इलाज योजना पर सरकार का खर्च करीब 40 हजार रुपये प्रति मरीज आता है। नई रेजिमेन शुरू होने से कुछ स्थानों पर शुरुआती दौर में दवाओं की सप्लाई में हल्की दिक्कत आ सकती है, लेकिन सरकारी कार्यक्रमों के जरिए मरीजों को निरंतर मुफ्त उपचार मिल रहा है।
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कीमतों पर असर: पेटेंट खारिज होने से अभी यह तय नहीं हुआ है कि फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन कितना सस्ता होगा या भारतीय कंपनियों की जेनेरिक दवाओं का मूल्य क्या होगा। डॉ. दीवान का मानना है कि अगले छह महीने से लेकर एक साल के भीतर इसके किफायती विकल्प बाजार में उतर सकते हैं, हालांकि यह जरूरी मंजूरियों और सप्लाई चेन पर निर्भर करेगा।
🚀 आगे क्या होगा? जेनेरिक दवाओं के निर्माण की बढ़ी गुंजाइश
भविष्य की संभावनाएं:
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इस बड़े फैसले के बाद TB Alliance के पास इस भारतीय पेटेंट आवेदन के आधार पर BPaL कॉम्बिनेशन पर कोई विशेष और एकाधिकारी अधिकार नहीं रहेगा। इससे दूसरी फार्मा कंपनियों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों और नियामकीय मंजूरियों (Regulatory Approvals) के अधीन इन दवाओं के निर्माण की गुंजाइश काफी बढ़ गई है।
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हालांकि, केवल पेटेंट खारिज होना ही अपने आप में किसी दवा को तुरंत बनाने या बाजार में बेचने की अंतिम अनुमति नहीं है। इसके लिए कंपनियों को सभी आवश्यक दिशानिर्देशों और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा, जिसमें सरकार का खरीद और सप्लाई मैनेजमेंट बेहद अहम भूमिका निभाएगा। यह फैसला देश में सस्ती दवाओं के विकल्प बढ़ाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम साबित हो सकता है।