Rahul Gandhi vs Govt: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर छिड़ा संग्राम, राहुल गांधी ने किसान नेताओं के साथ बुना राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ताना-बाना

राहुल गांधी ने संसद भवन में किसान संगठनों के साथ बैठक कर भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मक्का, सोयाबीन और कपास किसानों की चिंता जताते हुए राहुल ने देशव्यापी आंदोलन के संकेत दिए हैं। जानें किन नेताओं से हुई मुलाकात।

मजदूरों और किसानों के मुद्दों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार सरकार पर हमलावर हैं. इस बीच आज उन्होंने संसद भवन में किसान यूनियनों के नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान नेताओं ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर अपना विरोध जताया. साथ ही मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे उगाने वाले किसानों की रोजी-रोटी को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई.

राहुल गांधी ने कहा कि ट्रेड डील ने खेती के इंपोर्ट के लिए रास्ता खोल दिया है. जल्द ही कई दूसरी फसलें भी इंपोर्ट होंगी. किसान नेताओं और राहुल गांधी ने इस डील का विरोध करने और किसानों और खेत मजदूरों की रोजी-रोटी की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन की जरूरत पर चर्चा की. इस चर्चा में सुखपाल एस खैरा, रंजीत संधू और अशोक बलहारा भी मौजूद रहे.

इन किसान नेताओं से राहुल ने की मुलाकात

  • ऑल इंडिया किसान कांग्रेस के ​​सुखपाल एस खैरा
  • जीकेएस राजस्थान के रंजीत एस. संधू
  • भारतीय किसान मजदूर यूनियन, हरियाणा से एडवोकेट अशोक बलहारा
  • केएमएम केरल के पीटी जॉन
  • बीकेयू क्रांतिकारी के बलदेव एस. जीरा
  • प्रोग्रेसिव फार्मर्स फ्रंट के आर नंदकुमार
  • बीकेयू शहीद भगत सिंह के अमरजीत एस. मोहरी
  • ऑल इंडिया किसान कांग्रेस के ​​अखिलेश शुक्ला
  • आम किसान यूनियन के केदार सिरोही
  • किसान कांग्रेस पंजाब के किरणजीत एस संधू
  • राजसभा के गुरप्रीत एस संघा
  • किसान मजदूर मोर्चा इंडिया के गुरमनीत एस मंगत
  • जम्मू-कश्मीर जमीदारा फोरम के हमीद मलिक
  • केएमएम के तेजवीर सिंह
  • हरियाणा किसान संघर्ष समिति के धर्मवीर गोयत
  • कृषक समाज के ईश्वर सिंह नैन
  • दक्षिण हरियाणा किसान यूनियन के सतबीर खटाना

किसान-विरोधी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे

किसान नेताओं के साथ इस मीटिंग से पहले राहुल गांधी साफ कह चुके हैं कि एफआईआर हो, मुकदमा दर्ज हो या विशेषाधिकार प्रस्ताव लाएं, मैं किसानों के लिए लड़ूंगा.जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है.अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे.

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